नेता और नौकरशाह
सामाजिक मामलों में गांधारी बना पढ़ा-लिखा शातिर इंसान कामयाब नौकरशाह बनता है। वहीं सामाजिक मामलों में पांचाली बना कढ़ा हुआ शातिर इंसान राजनेता बनता है। यही दोनों की पेशागत श्रेष्ठता है।और भीऔर भी
भगवान के नाम पर
हम भगवान को मानना बंद कर दें तो बाबाओं की ही नहीं, नेताओ व अभिनेताओं तक की दुकान बंद हो जाए। भगवान तो शक्तिहीन मूरत है, जबकि उसके नाम पर असली शक्ति इन कलाबाजों को मिलती है। और भीऔर भी
अहम् ब्रह्मास्मि!
पत्थर से लेकर नेता व अभिनेता तक में प्राण-प्रतिष्ठा हम्हीं करते हैं। फिर उन्हें भगवान बनाकर खुद पिद्दी बन जाते हैं। अरे! अपनी आस्था को बाहर नहीं, अंदर फेकिए। तब देखिए उसका असर और असली प्रताप।और भीऔर भी
गांवों के लोग अच्छा खाने लगे तो बढ़ गई महंगाई: रिजर्व बैंक गवर्नर
हमारे राजनेताओं को मजबूरन अपनी जुबान खोलते वक्त जन-भावनाओं का ख्याल रखना पड़ता है। लेकिन अच्छे से अच्छे नौकरशाह भी अक्सर जन-भावनाओं के प्रति इतने असंवेदनशील हो जाते हैं कि ऐसी बातें बोल जाते हैं कि अपनी परंपरा का यह नीति-वाक्य तक याद नहीं रहता – सत्यम् ब्रूयात प्रियं ब्रूयात, न ब्रूयात सत्यम् अप्रियं। आपको याद होगा कि कुछ साल पहले अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने कहा था कि दुनिया में जिंसों के दामऔरऔर भी
दूर तलक जाएगा सफाई अभियान
मुद्रास्फीति का मुद्दा सुलझ गया। मिस्र का गुबार थमता नजर आ रहा है। अब बचा भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का मसला तो वह भी 31 मार्च 2011 तक किनारे लग जाएगा क्योंकि तब तक इस पर एफआईआर दाखिल हो चुकी होगी। जहां तक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और संबंधित लोगों की गिरफ्तारी की बात है तो बाजार को इसकी परवाह क्यों करनी चाहिए? यह जानामाना सच है कि कॉरपोरेट क्षेत्र के बहुत से लोगों की मिलीभगत राजनेताओं केऔरऔर भी
मंदड़ियों को किसी कुर्सीवाले की शह!
निफ्टी टूटकर 5225 और सेंसेक्स 17508 तक चला गया। लेकिन मुझे जरा-सा भी गफलत नहीं है। मंदड़िये अपने हमले से बाजार का रुख बदल सकते हैं, मेरी राय नहीं। हालांकि मुझे यह मानने में कोई हिचक नहीं कि अब बाजार की नई तलहटी बनाने का काम मंदड़िये करेंगे क्योंकि इस समय सब कुछ उनके हाथ, उनके शिकंजे में है। इस बीच एलआईसी ने बाजार में खरीद शुरू कर दी है और अगले 30 दिनों में वह 15,000औरऔर भी
नए साल से नेताओं और अफसरों का म्यूचुअल फंड निवेश होगा पारदर्शी
1 जनवरी 2011 से कोई भी नेता या अफसर म्यूचुअल फंड में निवेश करते वक्त अपनी पहचान नहीं छिपा सकता। उसे साफ-साफ बताना होगा कि वह एमपी, एमएलए या एमएलसी है कि नहीं। और, यह भी कि वह अगर नौकरशाह है तो सरकार के किस विभाग में काम करता है। यहां तक कि देश के वर्तमान व पुराने प्रधानमंत्री और राज्यों के वर्तमान व पूर्व मुख्यमंत्रियों या राज्यपालों तक को म्यूचुअल फंड में निवेश करते वक्त अपनेऔरऔर भी
भ्रष्टाचार से 125 अरब डॉलर गया बाहर
125 अरब डॉलर कोई मामूली रकम नहीं होती। 2007-08 में देश का कुल निर्यात 163 अरब डॉलर का रहा है। लेकिन वॉशिंगटन की एक रिसर्च संस्था ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 से 2008 के बीच भारत से 125 अरब डॉलर का जनधन बाहर निकला है। यह धन राजनेताओं ने भ्रष्टाचार से हासिल किया था और छिपाने के लिए वे इसे विदेश में ले गए। संस्था की अर्थशास्त्री कार्ली करसियो ने अपने ब्लॉगऔरऔर भी

