कभी जमीन पर जीत मायने रखती थी। राज और राजा का जमाना था। लेकिन आज तो सारी लड़ाई दिमाग पर कब्जे की है। हर कोई इसी में लगा है। जो जितने ज्यादा दिमाग जीत लेगा, वह उतना बड़ा सम्राट है।और भीऔर भी

हम शरीर में न जाने कितने रोगाणु लिए फिरते हैं। न जाने कितने वाइरस व बैक्टीरिया के कैरियर बने रहते हैं। इनसे निपट लेती है शरीर की प्रतिरोधक क्षमता। लेकिन रुग्ण विचारों से निपटने का जिम्मा हमारा है।और भीऔर भी

दिमाग भी क्या स्वामिभक्त और जिद्दी किस्म का जीव है! जिस ढर्रे पर चला दो, चलता ही रहता है। जिस काम में लगा दो, बिना पूरा किए मानता ही नहीं। आप सो जाते हो, लेकिन इस बेचैन आत्मा को चैन नहीं पड़ता।और भीऔर भी

भगवान एक ट्रोज़ान हॉर्स है जो प्रकृति से हमारे मानस को मिले हर सॉफ्टवेयर की स्पीड स्लो कर देता है, मन की तमाम प्रोग्राम फाइलों को करप्ट कर देता है। पूरी क्षमता पाने के लिए इस वायरस से मुक्ति जरूरी है।और भीऔर भी

हम मन ही मन तमाम टोटके करते रहते हैं। तंत्र, मंत्र, अंधविश्वास। सिक्का सीधा पड़ा तो जीतेंगे। फूल खिला तो काम हो जाएगा। ये सब कुछ और कुछ नहीं, अनिश्चितता को नाथने के हमारे मूल स्वभाव का हिस्सा हैं।और भीऔर भी

मन शरीर के रसायनों से लेकर हार्मोंस और समाज की नैतिकताओं से लेकर पाखंडों तक का बोझ ढोता है। आगे बढ़ने के लिए सारे झाड़-झंखाड़ को काटता तराशता रहता है। इसलिए मन पर बराबर सान चढ़ाते रहना चाहिए।और भीऔर भी