मन की तसल्ली
अपनी तसल्ली के लिए मन में यही भाव बैठा लेना श्रेयस्कर है कि हम जो भी काम करते हैं, मूलतः अपने लिए करते हैं, दूसरों के लिए नहीं। दूसरा तो बस बहाना है। वह न होता तो हम निठल्ले पड़े रहते।और भीऔर भी
अपनी तसल्ली के लिए मन में यही भाव बैठा लेना श्रेयस्कर है कि हम जो भी काम करते हैं, मूलतः अपने लिए करते हैं, दूसरों के लिए नहीं। दूसरा तो बस बहाना है। वह न होता तो हम निठल्ले पड़े रहते।और भीऔर भी
भावुक होना जरूरी है क्योंकि महज बुद्धि के दम पर हम सच तक नहीं पहुंच सकते। लेकिन बुद्धि को कभी इतनी दूर घास चरने नहीं भेज देना चाहिए कि किसी को हमारी भावनाओं से खेलने का मौका मिल जाए।और भीऔर भी
आप सभी से हमारी विनम्र गुजारिश है कि बाजार के तमाम मध्यवर्तियों की तरफ से बिना वजह किए जानेवाले डाउनग्रेड व अपग्रेड को लेकर बहुत चौकन्ने रहें। जैसे, बाजार कल और आज मूडीज द्वारा भारत की विदेशी मुद्रा रेटिंग को अपग्रेड करने पर बहक गया। हकीकत यह है कि भारत सरकार के बांडों की रेटिंग मूडीज ने पिछले महीने 20 दिसंबर को ही बढ़ा दी थी। इसलिए, रुपया जब पिछले छह महीनों में डॉलर के सापेक्ष करीब-करीबऔरऔर भी
ज्ञान तो विशाल सागर नहीं, अक्षय पात्र है। पुराना निकालो, नया बनता जाता है। कभी शेष नहीं होता। जब तक जीवन है, तब तक मन खदबद करता रहता है और ज्ञान का नया सत्व निकलता रहता है।और भीऔर भी
पहले जो है जैसा है, उससे चिढ़े नहीं, स्वीकार करें। मन की खदबद को न तो आप रोक सकते हैं और न ही रोकना चाहिए। उसे चलने दें। गंभीरता से लें। शांत मन जरूर एक न एक दिन समाधान निकाल लेगा।और भीऔर भी
बाजार खुलते ही निफ्टी 5645 तक चला गया। लेकिन बड़ी साफ वजहों से खुद को इस स्तर पर टिकाए नहीं रख सका और धड़ाधड़ 5555 तक गिर गया। बंद हुआ है 0.83 फीसदी की गिरावट के साथ 5567.05 पर। ट्रेडर भौचक और भ्रमित हैं। उनका वही पुराना सवाल है कि बाजार इस तरह आखिर गिरा क्यों? तो प्यारे! यह रोलओवर की पुरानी तकलीफ है। इस डेरिवेटिव सेटलमेंट की एक्सपायरी में सिर्फ सात दिन बचे हैं। इस बीचऔरऔर भी
एक टूटा-सताया हुआ मन, जो सारे कलह-क्लेश से भागना चाहता है, वो अनुशासन व नियमों से बंधकर काठ जैसा जड़ हो जाता है। लेकिन जो मजा जंगली घोड़ों की सवारी में है, वह काठ के घोड़ों में कहां?और भीऔर भी
शिव है तो शक्ति है। धरती है तो गुरुत्वाकर्षण है। शरीर है तो मन है। मन को निर्मल रखना है तो पहले शरीर को सहज व शुद्ध रखना जरूरी है। बाद में मन भी शरीर को साधने में मदद करता है।और भीऔर भी
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