मानो या न मानो
जीने के दो ही तरीके हैं। एक, दिए हुए हालात को जस का तस स्वीकार कर उसी में अपनी कोई जगह बना ली जाए। दो, हालात से ऊपर उठकर नई संभावनाओं को तजबीज कर उन्हें मूर्त रूप दे दिया जाए।और भीऔर भी
जीने के दो ही तरीके हैं। एक, दिए हुए हालात को जस का तस स्वीकार कर उसी में अपनी कोई जगह बना ली जाए। दो, हालात से ऊपर उठकर नई संभावनाओं को तजबीज कर उन्हें मूर्त रूप दे दिया जाए।और भीऔर भी
पत्थर में न तो इच्छा होती है और न द्वेष। उसे न सुख होता है, न दुख। न ही पत्थर अपना रूप बनाए रखना चाहता है, जबकि ये अनुभूतियां ही प्राणियों की पहचान और उनके जीवन का मूल तत्व हैं।और भीऔर भी
ज़िंदगी इतनी अनिश्चित नहीं होती, दुनिया इतनी जटिल नहीं होती, लोग इतने कुटिल नहीं होते तो जीने में मज़ा ही क्या रहता! सब कुछ रूटीन, बेजान, एकदम ठंडा!! संघर्ष की ऊष्मा ही तो जीवन है।और भीऔर भी
जिंदगी में आफत नहीं, मोड़ और उतार-चढ़ाव ही आते हैं। यह एक दुस्साहस भरा सफर है। इसमें जो मोड़ या रास्ता आप चुनते हैं, वही आपकी किस्मत बनता है। ऊंच-नीच जीवन के एडवेंचर का हिस्सा भर है।और भीऔर भी
शेयर बाजार में आया आतंकवादी धन आखिर है कहां? मीडिया ने जब तीन साल पहले इस पर जमकर हल्ला मचाया था, तब क्यों नहीं इसकी तहकीकात की गई? अब अचानक आतंकवादी धन का मसला उछाल दिया गया जिससे भारतीय शेयर बाजार को करीब 600 अंकों का धक्का लग चुका है। क्या कोई इसके पीछे का कोई तर्क या तुक समझा सकता है? सबसे अहम बात यह है कि इसे तब उछाला गया है जब संसद में बहसऔरऔर भी
जीवन संविधान से मिला मूल अधिकार है। पर जब हमारे होने, न होने से किसी को कोई फर्क न पड़े तो हम जीते हुए भी मर जाते हैं। अगर आज करोड़ों लोग अप्रासंगिक हैं तो यह तंत्र ही संविधान-विरोधी है।और भीऔर भी
ज़िंदगी हमारी अपनी है। पर धरती हम साझा करते हैं। हवा-धूप साझा करते हैं। दुनिया साझा करते हैं। देश साझा करते हैं। प्रशासन व राजनीतिक तंत्र साझा करते हैं। जो साझा है, उसकी भी तो फिक्र जरूरी है। और भीऔर भी
यूरोप के मसले ने उन सभी निवेशकों व ट्रेडरों को चरका दे दिया जो उस बहस और शॉर्ट सेलिंग करते रहे। निफ्टी 4700 से सुधरता हुआ 5350 तक आ चुका है और अब 5500 के पार जाने को तैयार है। इसके आसपास पहुंचते ही टेक्निकल एनालिसिस के हिसाब से एफआईआई खरीद की भंगिमा अपना लेंगे क्योंकि 200 डीएमए (200 दिनों के मूविंग औसत) अभी 5406 है और बाजार के इसके ऊपर जाने पर आप शॉर्ट नहीं रहऔरऔर भी
संपूर्ण कमोबेश स्थिर है। पर अंश बराबर रीसाइकल होता रहता है। बनने-मिटने-बनने का चक्र अनवरत चलता है। ये नीरस-सा चक्र ही जीवन है। यह चक्र रुक जाए तो हर तरफ हाहाकार मच जाएगा।और भीऔर भी
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