जापान का परमाणु संकट हाथ से बाहर निकलता दिख रहा है। लगातार धमाकों का शिकार हुए फुकुशिमा परमाणु बिजली संयंत्र के आसपास रेडियोएक्टिव विकिरण का स्तर बढ़ जाने के कारण बुधवार को वहां हालत को संभालने में लगे मजदूरों को भी बाहर निकालना पड़ा। यहां तक कि रिएक्टर संख्या-तीन पर हेलिकॉप्टर से पानी गिराना भी संभव नहीं हो सका। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार बुधवार की सुबह फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के रिएक्टर संख्या-चार में आग लग गई।औरऔर भी

जापान के परमाणु बिजली संयंत्रों में हो रहे धमाकों का असर जर्मनी में दिख रहा है। जर्मनी ने मंगलवार को अपने सात सबसे पुराने परमाणु रिएक्टरों को अस्थायी तौर पर बंद करने का आदेश दे दिया। उसने जापान में परमाणु तबाही के बाद अपने सभी 17 परमाणु रिएक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की घोषणा किए जाने के एक दिन बाद यह आदेश दिया। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने पांच प्रांतों के मुखिया के साथऔरऔर भी

निराशावादी चिंतन का कोई अंत नहीं है। निवेश फंडों या ब्रोकरेज हाउसों के सरगना अपने निहित स्वार्थों के चलते बाजार को लेकर जैसी निराशा फैला रहे हैं, उसका भी कोई अंत नहीं है। लेकिन मैं इनकी रत्ती भर भी परवाह नहीं करता क्योंकि मैं कोई ब्रोकिंग के धंधे में तो हूं नहीं। फंड अपने फैसलों को जायज ठहराने की कोशिश करते हैं। कहते हैं कि वे जन-धन का प्रबंधन कर रहे हैं। सच यह है कि फंडऔरऔर भी

जापान में परमाणु बिजली संयंत्रों में धमाकों के बाद हो रहे रेडियोएक्टिव विकिरण से वहां के जन-जीवन पर खतरा बढ़ता जाएगा। इससे पूरे पूर्वी एशिया की जलवायु तक बिगड़ सकती है। फिर भी यह कारण नहीं बन सकता. बाजार को छोड़कर भाग जाने का। हमेशा देखा गया है कि जब भी कोई संकट आता है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाजार से बेचकर निकल लेते हैं। अगर मान लें कि वे जापान से बड़े पैमाने पर निवेशऔरऔर भी

जापान में भयंकर भूकंप और सुनामी से जानमाल का भारी नुकसान हुआ है और इसमें सारी दुनिया से जापान को सहयोग व मदद मिलनी चाहिए। हालांकि जापान सरकार ने जिस तरह राहत व बचाव के लिए खटाक से 18,600 करोड़ डॉलर निकाल लिए हैं, वो वाकई सराहनीय कदम है। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि जापान इस संकट से उबर जाएगा, भले ही इसमें थोड़ा वक्त लगे और उसे तकलीफ उठानी पड़े। असल में जापान में पुनर्निर्माणऔरऔर भी

शुक्रवार को आए शक्तिशाली भूकंप और सुनामी से भयंकर आपदा में फंसे जापान का संकट आज, सोमवार को तब और गहरा गया जब फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में एक हाइड्रोजन विस्फोट हो गया। विस्फोट में तीन लोगों के घायल होने की खबर है। समाचार एजेंसी क्योदो के मुताबिक मुख्य कैबिनेट सचिव युकियो एदानो ने कहा कि संयंत्र का परिचालन करने वाली कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कापरेरेशन (टेप्को) ने विस्फोट की पुष्टि की है। विस्फोट से संयंत्र के कंटेनरऔरऔर भी

जापान के फुकुशिमा परमाणु बिजली संयंत्र के तीसरे रिएक्टर में भी कूलिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया है। उसमें भीतर से दबाव बढ़ने लगा है और वहां कभी भी विस्फोट हो सकता है। इस तरह का अंदेशा जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव युकिओ एडानो और संयंत्र के ऑपरेटर ने जताया है। युकिओ एडानो ने रविवार को टोक्यो में दिए गए बयान में कहा कि भारी भूकंप से क्षतिग्रस्त हुए न्यूक्लियर रिएक्टर वाली इमारत में हाइड्रोडनऔरऔर भी

अर्थ और वित्त की दुनिया बड़ी निर्मम है। यहां भावना और भावुकता से ऊपर उठकर सीधा-सीधा हिसाब चलता है। जापान में त्राहि-त्राहि मची है। लेकिन चूंकि जापान दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा ग्राहक है और वहां तमाम रिफानरियां आग की चपेट में आ गई हैं तो वे बंद रहेंगी जिससे तेल की मांग तात्कालिक रूप से घट जाएगी। सो, कच्चे तेल के दाम खटाक से 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए। लेकिनऔरऔर भी

जापान में 8.9 तीव्रता के भूकंप और सुनामी के बाद दुनिया भर के समुद्रतटीय इलाकों में सुनामी का खतरा मंडराने लगा है। लेकिन इससे न तो भारत को कोई खतरा है और न ही इससे भारतीय शेयर पर नकारात्मक असर पड़ने वाला है। फिलहाल जापान के पूरे प्रशांत महासागर के तट के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है। गुआम, ताइवान, फिलीपींस, इंडोनेशिया और अमेरिकी राज्य हवाई को सुनामी पर नजर रखने को कहा गया है। इंडोनेशिया,औरऔर भी

गुल टेकचंदानी को आपने देखा भी होगा, सुना भी होगा, अंग्रेजी और हिंदी के बिजनेस चैनलों पर। निवेश सलाहकार हैं, बाजार के विश्लेषक हैं। निवेश उनका धंधा है। लेकिन सबसे बड़ी बात है धंधे में बड़े बेलाग हैं, ईमानदार हैं। बताते हैं कि छात्र जीवन में ही सट्टे का चस्का लग गया था। 1980-81 के आसपास शेयर बाजार से इतना कमाया कि दक्षिण मुंबई में दफ्तर, गाड़ी, बंगला सब कुछ हो गया। पिता को बोले कि मुझेऔरऔर भी