भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में विकसित देशों का पिछलग्गू बनने के बजाय कम से कम इतना जरूर दिखा दिया है कि उसकी रीढ़ की हड्डी अभी सही-सलामत है। अमेरिकी दौरे पर आए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शिकागो शहर में दिए गए एक बयान में कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका व यूरोपीय संघ की तरफ से बंदिशें लगाए जाने के बावजूद भारत ईरान से पेट्रोलियम तेलों के आयात में कमी नहीं करेगा। भारत अपनीऔरऔर भी

दुनिया में इस समय हर तीन में से एक कामगार या तो बेरोजगार है या इतना नहीं कमा पाता कि ठीक से जीवनयापन कर सके। इस तरह दुनिया की कुल 3.3  अरब श्रमशक्ति में में ऐसे बेरोजगार या गरीब कामगारों की संख्या लगभग 1.1 अरब है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने जिनेवा में जारी अपनी ताजा सालाना रिपोर्ट ‘ग्लोबल एम्प्लॉयमेंट ट्रेंड्स 2012’ में यह बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों के तमाम प्रयासोंऔरऔर भी

कई हफ्तों से चल रही बातचीत के बाद यूरोपीय संघ ने आखिरकार ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला कर लिया। यूरोपीय संघ के फैसले के बाद 27 देश तुरंत ईरान का तेल खरीदना बंद कर देंगे। सोमवार को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के नेताओं की बैठक के बाद एक अधिकारी ने कहा, “तेल प्रतिबंध लगाने पर राजनीतिक सहमति हो गई है।” बैठक में यूरोपीय संघ के 27 देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया।औरऔर भी

विश्व अर्थव्यवस्था इस समय ‘खतरनाक दौर’ में जा पहुंची है। यूरोप मंदी की चपेट में आ चुका है। यह किसी ऐरे-गैरे का नहीं, बल्कि विश्व बैंक का कहना है। साथ ही उसका यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर चालू वित्त वर्ष 2011-12 में 6.8 फीसदी रहेगी, जबकि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का नया अनुमान 7 से 7.5 फीसदी का है। पिछले वित्त वर्ष 2010-11 में भारत का जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 8.5 फीसदीऔरऔर भी

चीन अपने 6980 अरब डॉलर के जीडीपी का करीब 2.5% हिस्सा, 174.5 अरब डॉलर वैज्ञानिक शोध पर खर्च करता है। भारत इस मद में 1843 अरब डॉलर के जीडीपी का मात्र 0.9% हिस्सा, 16.5 अरब डॉलर खर्च करता है। चीन ने 2020 तक खर्च बढ़ाकर जीडीपी का 3% करने का लक्ष्य रखा है, जबकि भारत का लक्ष्य 2017 तक 2% पर पहुंचने का है। चीन ने 2010 में वैज्ञानिक शोध से जुड़े 9,69,315 पेपर प्रकाशित किए, जबकिऔरऔर भी

उम्मीद है कि रुपया पिछले कुछ महीनों से चल रही गिरावट का सिलसिला तोड़कर अब स्थिर हो जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता तो उसमें आई तेज हलचल को रोकने के लिए रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने को तैयार है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने गुरुवार को सिंगापुर में आयोजित एक समारोह में यह बात कही। उन्होंने कहा, “हम किसी भी तेज एकतरफा हलचल को रोकने के लिए मजबूत कदम उठाएंगे।” उन्होंनेऔरऔर भी

दुनिया में साल 2020 तक हीरे की मांग हर साल 6 फीसदी की दर से बढ़ती जाएगी और बढ़ती मांग में सबसे ज्यादा योगदान भारत और चीन का होगा। दुबई से मिली एक ख़बर के अनुसार अगले नौ सालों में दुनिया में हीरे की आपूर्ति जहां सालाना 2.8 फीसदी की दर से बढ़ेगी, वहीं हीरे की मांग में छह फीसदी सालाना का इजाफा होगा। बेन एंड कंपनी द्वारा जारी 2011 वैश्विक हीरा उद्योग रिपोर्ट में कहा गयाऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भरोसा जताया है कि भारत के आर्थिक हालात जल्दी ही बेहतर हो सकते हैं। उसने भारत की संप्रभु रेटिंग को बीएए3 पर कायम रखते हुए कहा है कि इस साल भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर सात फीसदी से नीचे आ सकती है। फिर भी यह बीएए3 की साख वाले देशों के औसत से अधिक रहेगी। मूडीज का यह रवैया काफी उत्साहजनक है। खासकर तब, जबकि स्टैंडर्ड एंड पुअर्स अमेरिका की रेटिंगऔरऔर भी

निफ्टी के 4000 तक पहुंच जाने के अंतहीन अनुमान और भारत के अंतहीन डाउनग्रेड का सिलसिला पूरा घूम चुका है। हालांकि सेंसेक्स कंपनियों के निचले लाभार्जन का अनुमान इस सूचकांक को 11,600 पर पहुंचा देता है। मतलब यह कि सेंसेक्स अगर 11,000 पर पहुंचता है तो बाजार को 9.48 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड होना पड़ेगा। लेकिन ऐसी नौबत तो 1991 में भी नहीं आई थी, जब भारत दीवालियेपन की कगार तक पहुंच गया था। पिछले 15औरऔर भी

भारत में साल 2015 तक खेल के धंधे से हर साल दो अरब डॉलर का राजस्व पाया जा सकता है।  इसमें टेलिविजन मीडिया और प्रायोजन से होने वाली आय की खास भूमिका होगी। यह निष्कर्ष है दुनिया की जानीमानी सलाहकार और एकाउंटिग फर्म प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) का। पीडब्ल्यूसी के ताजा अध्ययन के मुताबिक आनेवाले सालों में देश में टीवी विज्ञापन और प्रायोजन आय में काफी इजाफा होगा जिससे भारत ब्रिक देशों (रूस, चीन, भारत और ब्राजील)औरऔर भी