भारत आज़ादी के 75वें साल में प्रवेश कर रहा है। आप सभी को असीम शुभकामनाएं। लेकिन उल्लास व खुशी के इस मौके पर मनन ज़रूरी है कि हम आज प्रति व्यक्ति आय के मामले में दुनिया में 128वें स्थान पर क्यों हैं? दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के बावजूद भारत आज विश्व फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में 142वें स्थान पर क्यों है? ऐसे बहुतेरे सवाल है जिन पर आज हर देशवासी को सोचने की ज़रूरतऔरऔर भी

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने चालू वित्त वर्ष 2020-21 में देश का जीडीपी कितना रह सकता है, इसका पहला अग्रिम अनुमान पेश कर दिया है। उसका कहना है कि मौजूदा मूल्य पर हमारी अर्थव्यवस्था का आकार पिछले साल के 203.40 लाख करोड़ रुपए से घटकर इस बार 194.82 करोड़ रुपए रह सकता है, जबकि बजट अनुमान 224.89 लाख करोड़ रुपए का था। यानी, पिछले साल से 8.58 लाख करोड़ रुपए और इस साल के बजट अनुमान सेऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से भाषण दिया था कि देश को जनसंख्या विस्फोट से निपटना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि जो लोग छोटा परिवार रख रहे हैं, वह भी एक प्रकार की देशभक्ति है। लेकिन 13 दिसंबर 2020 को मोदी सरकार इस ‘देशभक्ति’ से पलट गई। उसने देश में दो बच्चों का मानक लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाऔरऔर भी

देश में कोरोना शहरों ही नहीं, गांवों तक फैला है। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट तो यहां तक कहती है कि अब ग्रामीण जिले कोविड-19 के नए हॉटस्पॉट बन गए हैं और नए संक्रमण में उनका हिस्सा 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। फिर भी चालू वित्त वर्ष 2020-21 की जून या पहली तिमाही में कृषि व संबंधित क्षेत्र के आर्थिक विकास की गति 3.4 प्रतिशत रही है, जबकि हमारी पूरी अर्थव्यवस्था इस दौरान 23.9 प्रतिशत घटऔरऔर भी

स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 2020 को शनिवार का दिन था। शनि का दिन यानी मानें तो दुर्बुद्धि का दिन। पिछली बार 15 अगस्त को गुरुवार का दिन था। गुरु का दिन, बुद्धिमत्ता का दिन। लेकिन तब 15 अगस्त 2019 के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से बड़ी दुर्बुद्धि वाली बात कही थी। उन्होंने ‘बेतहाशा जनसंख्या विस्फोट’ का जिक्र करते हुए कहा था, “जनसंख्‍या विस्‍फोट हमारे लिए, हमारी आनेवाली पीढ़ी के लिए अनेक नए संकटऔरऔर भी