बीते हफ्ते जापान जैसा बड़ा संकट हो गया। फिर भी भारतीय बाजार ने अपनी दृढ़ता व लचीलेपन का परिचय दिया है। निफ्टी 5400 से नीचे नहीं गया। यहां तक कि शुक्रवार को भी इसने बहादुरी से 5400 पर खुद को टिकाने की कोशिश की। लेकिन भारतीय बाजार पर मंदड़ियों के एकजुट हमले और बाजार में गहराई के अभाव के चलते यह 5400 से नीचे 5373.70 पर बंद हुआ। यह जानामाना सच है कि भारत सरकार को भारतीयऔरऔर भी

शहरी विकास, जल संसाधन और ऊर्जा जैसे मंत्रालयों की योजना व्यवस्था में कमियों के चलते भारत को विदेशों से मिली एक लाख करोड़ रुपए की सहायता राशि का इस्तेमाल नहीं हो सका है। यह जानकारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की संसद को दी गई ताजा रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट में कहा है, ‘‘31 मार्च 2010 तक देश को मिले विदेशी सहायता राशि में से 1,05,399 करोड़ रुपए का इस्तेमाल नहीं कर पाया है।’’ बहुपक्षीयऔरऔर भी

अमेरिकी सरकार के बांडों में सबसे ज्यादा निवेश रखनेवाले चीन ने वहां अपना निवेश घटाना शुरू कर दिया है, जबकि भारत बढ़ाता जा रहा है। हालांकि मात्रा के लिहाज से भारत का निवेश चीन के सामने कहीं नहीं टिकता। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2010 से जनवरी 2011 के बीच चीन ने अमेरिकी बांडों में अपना निवेश 20.6 अरब डॉलर घटा दिया है। अक्टूबर में यह 1175.3 अरब डॉलर था, जबकि जनवरी मेंऔरऔर भी

बाजार एक बार फिर 5400 से 5500 की रेंज तोड़कर नीचे चला गया। निफ्टी 5367 तक जा पहुंचा और मंदड़ियों की मौज हो गई है। वे आज तीन लंबी-लंबी अफवाहें फेंकने में कामयाब रहे। एक यह कि बीजेपी विकीलीक्स के ताजा खुलासे के बाद सरकार से सदन में बहुमत साबित करने की मांग करेगी, जिसकी कोई संभावना नहीं है। दो, जापान के फंड भारत से निकलना चाहते हैं जो फिर संभव नहीं है और इसे नोमुरा सिक्यूरिटीजऔरऔर भी

हर कोई कहे जा रहा था कि रिजर्व बैंक ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ा देगा। फिर भी देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के चेयरमैन ओ पी भट्ट की तरह बाजार को भी लग रहा था कि शायद ऐसा न हो। इसी उम्मीद में बाजार थोड़ा गिरकर तो खुला, लेकिन फिर पूरी तरह सुधर गया, जबकि दुनिया के बाजार गिरे हुए थे। लेकिन 11 बजे के बाद बजार में हवा-सी चल गई कि ब्याज दरें बढ़नी हीऔरऔर भी

निराशावादी चिंतन का कोई अंत नहीं है। निवेश फंडों या ब्रोकरेज हाउसों के सरगना अपने निहित स्वार्थों के चलते बाजार को लेकर जैसी निराशा फैला रहे हैं, उसका भी कोई अंत नहीं है। लेकिन मैं इनकी रत्ती भर भी परवाह नहीं करता क्योंकि मैं कोई ब्रोकिंग के धंधे में तो हूं नहीं। फंड अपने फैसलों को जायज ठहराने की कोशिश करते हैं। कहते हैं कि वे जन-धन का प्रबंधन कर रहे हैं। सच यह है कि फंडऔरऔर भी

जापान में परमाणु बिजली संयंत्रों में धमाकों के बाद हो रहे रेडियोएक्टिव विकिरण से वहां के जन-जीवन पर खतरा बढ़ता जाएगा। इससे पूरे पूर्वी एशिया की जलवायु तक बिगड़ सकती है। फिर भी यह कारण नहीं बन सकता. बाजार को छोड़कर भाग जाने का। हमेशा देखा गया है कि जब भी कोई संकट आता है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाजार से बेचकर निकल लेते हैं। अगर मान लें कि वे जापान से बड़े पैमाने पर निवेशऔरऔर भी

तमिलनाडु में रामेश्वरम तट के पास प्रस्तावित सेतुसमुद्रम परियोजना में वैकल्पिक जहाज मार्ग के सर्वेक्षण के लिए लगाए गए उपकरण 14 महीने तक काम करने के बाद वापस तट पर पहुंच गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि सर्वे का काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने बताया कि अब इस सर्वे से प्राप्त आंकड़ों को व्यस्थित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और अंतिम रिपोर्ट जहाजरानी मंत्रालय में उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी। इस परियोजना केऔरऔर भी

जापान में भयंकर भूकंप और सुनामी से जानमाल का भारी नुकसान हुआ है और इसमें सारी दुनिया से जापान को सहयोग व मदद मिलनी चाहिए। हालांकि जापान सरकार ने जिस तरह राहत व बचाव के लिए खटाक से 18,600 करोड़ डॉलर निकाल लिए हैं, वो वाकई सराहनीय कदम है। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि जापान इस संकट से उबर जाएगा, भले ही इसमें थोड़ा वक्त लगे और उसे तकलीफ उठानी पड़े। असल में जापान में पुनर्निर्माणऔरऔर भी

भारत दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा आयातक है। यहां तक कि चीन से भी बड़ा। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 2006-10 के दौरान दुनिया के कुल हथियार निर्यात का 9% हिस्सा सोख लिया, जबकि चीन 6% के साथ दूसरे नंबर पर चला गया। भारत के हथियार आयात का 82% हिस्सा रूस से आया है। अमेरिका हथियारों का सबसे बड़ा निर्यातक है। उसके बाद रूस व जर्मनी का नंबर आताऔरऔर भी