जिस सरकार को आमतौर पर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आम आदमी के मानवाधिकारों की खास फिक्र नहीं रहती, उसे विदेश में काला धन रखनेवाले खास भारतीयों के मानवाधिकारों के उल्लंघन की भारी चिंता सता रही है। सोमवार को वित्त मंत्रालय की तरफ से कालेधन पर संसद में पेश श्वेतपत्र में कहा गया है कि सरकार ने दुनिया के जिन देशों के साथ दोहरा कराधान बचाव करार (डीटीएए) या कर सूचना विनिमय करार (टीआईईए) कर रखे हैं,औरऔर भी

एकल परिवारों के बढ़ते चलन और इससे बुजुर्गों पर पड़ने वाले असर के बारे में किए गए एक ताजा अध्ययन में बताया गया है कि एकल परिवार बुजुर्गों के मानवाधिकार हनन का कारण हैं। इस अध्ययन में कहा गया है कि एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण वरिष्ठ नागरिक अकेले जिंदगी बिताने के लिए बाध्य होते हैं जिसके परिणामस्वरूप उनकी भावनात्मक और शारीरिक सेहत पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिएऔरऔर भी

देश में एक बार फिर से बच्चों के गायब होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इन घटनाओं के आधार पर गौर करें तो बड़े शहरो में स्थिति ज्यादा भयावह है। गैर-सरकारी संस्थाओं का अनुमान है कि भारत में हर साल 45000 बच्चे गायब हो रहे हैं। साल 2007 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि देश में सबसे अधिक बच्चे झारखंड, छत्तीसगढ़, आध्र प्रदेश, बिहार और उड़ीसा से गायब हो रहे हैं।औरऔर भी