सेंसेक्स और निफ्टी की बात करें तो बाजार सुबह से दोपहर तक गिरता रहा, लेकिन अंत आते-आते संभल गया। फिर भी बीएसई के मिड कैप और स्मॉल कैप सूचकांक क्रमशः 0.79 फीसदी और 1.38 फीसदी बढ़ गए। एक बात ध्यान रखें कि बाजार में करेक्शन यानी गिरावट आए या न आए, कंपनी विशेष के बारे में कोई नई सूचना लानेवाली खबर उसके शेयरों के भावों को बढ़ा देगी। हम अबन ऑफशोर, बीजीआर एनर्जी, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), रिलायंसऔरऔर भी

यूं तो हर दिन नया जन्म है। फिर खुद अपना जन्म दिन क्या मनाना? हां, दूसरे आपका जन्म दिन मनाएं, तब कोई बात है। वैसे, दूसरों के लिए भी आपका जन्म दिन अपनी खुशियों का बहाना होता है।और भीऔर भी

जीने की चाह में मरे जा रहे हैं। अस्सी साल, नब्बे साल, सौ साल। इत्ता जीकर क्या करोगे बापू? असली सुख तो पाया नहीं! जाना ही नहीं कि हमारे अंदर-बाहर जो भी हो रहा है, वो हो क्यों रहा है असल में।और भीऔर भी

हम बाहरी संसार से वास्ता जितना बढ़ाते हैं, हमारा भाव संसार उतना ही बढ़ता जाता है। खुशियों और अनुभूतियों के नए सूत्र मिलते हैं। इसलिए हर नई जानकारी को लपक कर पकड़ लेना चाहिए।और भीऔर भी

मैं कल करीब दर्जन भर दमदार विश्लेषकों के मिला और वे सभी कच्चे तेल की चढ़ाई को लेकर चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि कच्चे तेल के दाम जल्दी ही 130-140 डॉलर प्रति बैरल तक चले जाएंगे। इसलिए वे खुद भी शॉर्ट सेलिंग कर रहे हैं और दूसरों को भी ऐसा करने की सलाह दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान लगाने के बारे में मेरा रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है। 2005 में जब यहऔरऔर भी

शरीर को साधकर पहलवान बना जा सकता है और मन को साधकर वैज्ञानिक। लेकिन अनहद का उल्लास दोनों ही नहीं पा सकते। यह तो उन्हीं को मिलता है जो तन और मन दोनों को साधते हैं।और भीऔर भी

जो लोग रिश्तों और दूसरे लोगों की कद्र नहीं करते, उनका हश्र नितांत अकेलेपन और घुटन में होता है। हो सकता है कि वे बहुत ज्यादा पैसे कमा लें। लेकिन पैसे से प्यार तो छोड़िए, खुशी का धेला तक नहीं खरीदा जा सकता।और भीऔर भी

जैसे ही कोई द्वंद्व सुलझता है, खुशी के नए सोते खुल जाते हैं। प्रकृति का यही नियम है। टकराव को, गुत्थी को नहीं सुलझा पाना ही हार जाना है। और, हारा हुआ शख्स कभी खुश नहीं रहता। खुशी तो जीतने से ही मिलती है।और भीऔर भी

लक्ष्मी धन-संपदा लाती हैं। दुर्गा हमें निर्भय बनाती हैं। लेकिन धन-दौलत और सुरक्षा से ही कोई सुखी इंसान नहीं बन जाता है। सुख की तीसरी शर्त पूरी करती हैं संगीत, कला और विद्या की देवी सरस्वती।और भीऔर भी

अंधविश्वासी व्यक्ति को अपार धन के बावजूद कभी भी वो खुशी नहीं मिल सकती है जो किसी उन्मुक्त मन को मिलती है। हर खुशी का स्रोत प्रकृति है और प्रकृति उसे ही देती है जो उससे डरता नहीं, दो-दो हाथ करता है।और भीऔर भी