सब कुछ यंत्रवत। न थोड़ा इधर, न थोड़ा उधर। गिने-चुने लोगों को छोड़कर सब यही माने बैठे थे कि रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की पहली मध्य-तिमाही समीक्षा में ब्याज दरें 0.25 फीसदी बढ़ाएगा और मुद्रास्फीति को बड़ी चुनौती मानेगा। सो, ऐसा ही हुआ। रिजर्व बैंक ने चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत रेपो दर को 7.25 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। रिवर्स रेपो दर को चूंकि इससे एक फीसदी कम और एमएसएफ (मार्जिनल स्टैंडिंगऔरऔर भी

ग्लोबीकरण का शोर ज्यादा, सच्चाई कम है। अपना देश छोड़कर बाहर पढ़ने जानेवाले छात्रों की संख्या मात्र दो फीसदी है। अपनी मातृभूमि से अलग रहनेवाले लोगों की संख्या मात्र तीन फीसदी है। सीमाओं से बाहर व्यापार के लिए जानेवाले चावल की मात्रा केवल 7 फीसदी है। एस एंड पी 500 सूचकांक में शामिल कंपनियों के निदेशकों में विदेशियों की संख्या महज 7 फीसदी है। दुनिया के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का केवल 20 फीसदी हिस्सा निर्यात सेऔरऔर भी

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के चेयरमैन सी रंगराजन ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष 2011-12 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 8.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। उनका मानना है कि सेवा क्षेत्र और उद्योगों के विस्तार से यह आर्थिक वृद्धि दर हासिल हो सकती है, हालांकि कृषि क्षेत्र का योगदान घट सकता है। बता दें कि इस साल के बजट में वित्त मंत्री ने 9 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया। लेकिन रिजर्वऔरऔर भी

देश के मुख्य सांख्यिकीविद् टी सी ए अनंत के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें देश की आर्थिक विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं और चालू वित्त वर्ष में यह 8.5 फीसदी रह सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मानसून सामान्य रहने की स्थिति में अगस्त-सितंबर तक सकल मुद्रास्फीति की दर आठ फीसदी के आंकड़े से नीचे आ जाएगी। प्रमुख उद्योग संगठन फिक्की के एक समारोह के दौरान अनंत ने कहा, ‘‘तेल कीऔरऔर भी

शेयर बाजार की महत्ता हम लोग नहीं समझते। लेकिन पिछले आठ सालों में शेयर बाजार में सौदों की मात्रा में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2002-03 में यहां साल भर में हुई कुल ट्रेडिंग देश के सकल घेरलू उत्पाद (जीडीपी) का 57.28% थी। लेकिन 2010-11 में यह आंकड़ा 517.30% का हो गया। यानी, हमारी अर्थव्यवस्था का जो आकार है, उसकी पांच गुना से ज्यादा ट्रेडिंग शेयर बाजार में होने लगी है। वैसे इसमें से 445.91% ट्रेडिंग ऑप्शंस वऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने बड़े साफ शब्दों में कह दिया है कि नए वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सब्सिडी के लिए जो प्रावधान किया है, वह वास्तविकता के अनुरूप नहीं है। सोमवार को नए साल की मौद्रिक नीति जारी करने से पहले अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिति के आकलन में रिजर्व बैंक ने यह बात कही है। रिजर्व बैंक के दस्तावेज में कहा गया है कि बजट में सब्सिडी की गिनती यह मानकरऔरऔर भी

कंपनियों के नतीजों का मौसम खत्म होने को है। अब तक तस्वीर यह बनी है कि जहां इनफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी तमाम बड़े स्तर की कंपनियां बाजार की अपेक्षाओं को पूरा करने में नाकाम रही हैं, वहीं पोलारिस, एचसीएल टेक्नो व हिंदुस्तान जिंक जैसे मध्यम स्तर की कंपनियों ने उम्मीद के बेहतर नतीजे हासिल किए हैं। कुल मिलाकर कॉरपोरेट क्षेत्र का लाभार्जन बीते वित्त वर्ष 2010-11 में पहले से 20 फीसदी ज्यादा रहेगा। लेकिन चालू वित्तऔरऔर भी

विश्व अर्थव्यवस्था में एशिया की स्थिति 16वीं व 17वीं सदी जैसी होने जा रही है। तब विश्व अर्थव्यवस्था में एशिया का योगदान 60 फीसदी के आसपास था। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने अब भारत, चीन और जापान के बीच आर्थिक सहयोग में मजबूती की उम्मीद करते हुए अनुमान जताया है कि वर्ष 2050 तक दुनिया के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में एशिया का योगदान 50 फीसदी से अधिक हो जाएगा। एडीबी ने कहा कि बेहतर परिदृश्य मेंऔरऔर भी