बाजार में आज जमकर अफवाह चली कि भारत के वॉरेन बफेट माने जानेवाले प्रमुख निवेशक राकेश झुनझुनवाला (आरजे) चांदी की ट्रेडिंग में बुरी तरह फंस गए हैं और इसमें हुए नुकसान की भरपाई के लिए तमाम कंपनियों में अपना निवेश निकाल रहे हैं। मेरी समझ से यह मंदडियों द्वारा फैलाई गई अफवाह है। हालांकि यह सच है कि आरजे ने डेल्टा कॉर्प और वीआईपी इंडस्ट्रीज जैसे कुछ स्टॉक्स में अपनी होल्डिंग घटाई है क्योंकि अभी इनका मूल्यांकनऔरऔर भी

कल बाजार का कुल कारोबार एकबारगी 35 फीसदी घट गया तो हर कोई अचकचा गया। एक ही सत्र की झलक देखकर बाजार के सभी खिलाड़ी शॉर्ट सेलिंग पर उतारू हो गए। खुद मैं भी इतना कम वोल्यूम देखकर गच्चा खा गया और मैंने लिख दिया कि निफ्टी नीचे में 5010 तक जा सकता है। आज बाजार गिरा भी जमकर। निफ्टी 1.55 फीसदी गिरकर 5068.50 पर बंद हुआ। हालांकि दिन में इससे भी नीचे 5052.85 तक चला गयाऔरऔर भी

सरकार अंतरराष्ट्रीय एजेंसी मूडीज़ को पटाने में जुट गई है कि वह भारत की संप्रभु रेटिंग बढ़ा दे या न भी बढ़ाए तो उसे कम से कम घटाए नहीं। इस सिलसिले में राजधानी दिल्ली में वित्त मंत्रालय के कई बड़े अधिकारी सोमवार को मूडीज़ इनवेस्टर सर्विस की टीम से मिले। मुलाकात व प्रजेंटेशन का क्रम मंगलवार को भी जारी रहेगा। हालांकि मूडीज़ का कहना कि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मिलना एक रूटीन काऔरऔर भी

जापान अब मार्च में आए भूकंप के असर से उबर गया लगता है। अभी सितंबर में बीती इस साल की तीसरी तिमाही में जापान की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। जापान सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जुलाई-सितंबर 2011 में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर 6 फीसदी रही है। हालांकि इसकी उम्मीद अर्थशास्त्रियों को पहले से थे। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग की तरफ से किए गए सर्वेक्षण में 26 अर्थशास्त्रियों ने सितंबर तिमाही में जापान केऔरऔर भी

तकरीबन सारे अर्थशास्त्री, बैंकर व जानकार यही मानते हैं कि मंगलवार, 25 अक्टूबर को रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा में ब्याज दरों को चौथाई फीसदी और बढ़ा देगा। रेपो दर को 8.50 फीसदी, रिवर्स रेपो दर को 7.50 फीसदी और तदनुसार एमएसएफ की दर को 9.50 फीसदी कर देगा। लेकिन वित्त मंत्रालय के कुछ सूत्रों का कहना है कि इस बार माहौल को खुशगवार बनाने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाने से बाजऔरऔर भी

निर्यात में नरमी और बढ़ती महंगाई के चलते व्यापार अधिशेष में तगड़ी कमी की वजह से चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर तीसरी तिमाही में घटकर 9.1 फीसदी पर आ गई। यह 2010 की चौथी तिमाही के बाद से सबसे निचला स्तर है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) ने मंगलवार को कहा कि साल की तीसरी तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 9.1 फीसदी पर आ गई जो दूसरी तिमाही मेंऔरऔर भी

सोमवार को आपने यह खबर शायद देखी होगी कि बीएसई-500 में शामिल देश की 500 बड़ी कंपनियों के पास मार्च 2011 के अंत तक 4.7 लाख करोड़ रुपए का कैश था। लेकिन अगर सभी लिस्टेड कंपनियों को मिला दें तो यह आंकड़ा 11.6 लाख करोड़ रुपए का हो जाता है। यह वित्त वर्ष 2010-11 में रहे देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 48.78 लाख करोड़ रुपए का 23.78 फीसदी है। प्रमुख ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल की एकऔरऔर भी

शेयर बाजार में चल रही मायूसी ने पूंजी बाजार के दूसरे हिस्से प्राइमरी बाजार में भी सन्नाटा फैला दिया है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में पूंजी बाजार में उतरनेवाली 22 कंपनियों ने आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) लाने का इरादा ही छोड़ दिया है। इसके साथ ही बड़े निवेशकों को सीधे खींचनेवाले क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) बाजार में भी एकदम मुर्दनी छा गई है। ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज के ताजा अध्ययन के मुताबिक जिन 22 कंपनियों नेऔरऔर भी

यूरोप का ऋण संकट इस वक्त सबके जेहन पर छाया हुआ है। अमेरिकी सरकार की रेटिंग घटने के बाद उसके भी ऋण पर चिंता जताई जा रही है। लेकिन आईएमएफ के ताजा अध्ययन के मुताबिक दुनिया में सबसे ज्यादा कर्ज का बोझ जापान सरकार पर है। साल 2011 में उसका कर्ज सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 230% रहेगा। ग्रीस सरकार का कर्ज इससे कम, जीडीपी का 165% रहेगा। इसके बाद क्रम से इटली, आयरलैंड, पुर्तगाल औरऔरऔर भी