स्थिरता स्वभाव से चलायमान इंसान को स्थावर बना देती है। वहीं, समस्याएं इंसान को चलने पर मजबूर कर देती हैं। मगर, समस्याओं के दौर में इंसान को मामूली समस्या भी विकराल लगती है। लेकिन यही समस्याएं तो उसे पेड़ बनकर पड़े रहने से बचाती हैं।और भीऔर भी

सिर्फ भावनाओं से कुछ नहीं हो सकता। लेकिन भावनाओं के बिना भी कुछ नहीं हो सकता। भावनाएं उस लीवर का काम करती हैं जो कम बल से ज्यादा वजन उठाने की क्षमता देता है। भावनाएं ही हमें सक्रिय बनाती हैं। अन्यथा हम यूं ही पड़े रहें।और भीऔर भी