उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बजट से पहले केवल एक कारोबारी दिन बचा है। लेकिन बाजार में छाई निराशा सुरसा के मुंह की तरह विकराल होती जा रही है। निफ्टी आज साढ़े तीन फीसदी से ज्यादा गिरकर 5242 तक चला गया। सेंसेक्स भी 600 अंक से ज्यादा गिरकर 17,560 तक पहुंच गया। हालांकि बंद होते-होते बाजार थोड़ा संभला है। इस गिरावट के पीछे खिलाड़ियों के खेल अपनी जगह होंगे। लेकिन ट्रेडर और निवेशक अब नए फेरऔरऔर भी

अभी कल तक बड़े-बड़े विद्वान कह रहे थे कि जनवरी माह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 8.5 फीसदी रहेगी। लेकिन, आज सोमवार को घोषित दर 8.23 फीसदी रही है जो इससे पहले के महीने दिसंबर की मुद्रास्फीति दर 8.43 फीसदी से कम है। अर्थशास्त्री कह रहे थे कि खाने-पीने की चीजों के ज्यादा दाम और पेट्रोल के महंगा होने से मुद्रास्फीति बढ़ जाएगी। लेकिन हकीकत में गेहूं, दाल व चीनी जैसे जिंसों केऔरऔर भी

शेयर बाजार को सायास गिराने में लगे लोग भले ही यह बात न मानें। लेकिन सच यही है कि अर्थव्यवस्था से सकारात्मक संकेत आने शुरू हो गए हैं। सबसे बड़ा संकेत यह है कि खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 29 जनवरी को समाप्त सप्ताह में करीब चार फीसदी की भारी गिरावट के साथ 13.07 फीसदी पर आ गयी है। ठीक इससे पहले के सप्ताह यह 17.05 फीसदी थी। सात हफ्ते में खाद्यऔरऔर भी

चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि 8.6 फीसदी रहने के अनुमान से उत्साहित मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने कहा है कि अगले वित्त वर्ष में नौ फीसदी आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य संभव लगता है। बसु ने सोमवार को दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हालांकि पूरी दुनिया का आर्थिक परिदृश्य ठीक-ठाक लग रहा है, लेकिन अब भी अनिश्चितता के बादल दिखते हैं। इसलिए अगले वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि की उम्मीदऔरऔर भी

महंगाई खासकर खाद्य मुद्रास्फीति ने सरकार को परेशान करके रख दिया है। इतना परेशान कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी झल्लाकर बोले कि मुद्रास्फीति को वश में करने के उपाय किए गए हैं, लेकिन सरकार के पास कोई जादुई चिराग नहीं है कि वह इसे फौरन नीचे ले आए। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसकी जिम्मेदारी केंद्र से हटाकर राज्यों पर डालने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि महंगाई को काबू में रखने के लिए राज्योंऔरऔर भी

प्याज के साथ-साथ अब फाइबर, खनिज, पेट्रोल, एलपीजी और डीजल भी महंगाई में पलीता लगाने लग गए हैं। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार 22 जनवरी 2011 को समाप्त सप्ताह में प्याज की थोक कीमतें साल भर पहले की तुलना में जहां 130.41 फीसदी बढ़ी हैं, वहीं फाइबर 47.13 फीसदी, खनिज 16.70 फीसदी, पेट्रोल 30.75 फीसदी, एलपीजी 14.99 फीसदी और डीजल के दाम 14.71 फीसदी बढ़ गए हैं। कुल मिलाकर 22 जनवरी को खत्म हफ्ते में खाद्यऔरऔर भी

प्याज की कीमतों ने कम होने की एक झलक दिखलाई और फिर से बढ़ गईं। अब टमाटर अपना रंग दिखा रहे हैं। राजधानी दिल्ली में टमाटर 60 रुपए प्रति किलो तक पहुँच गया है। ऐसा उपलब्धता में कमी और पाकिस्तान को निर्यात के कारण हुआ है। अन्य महानगरों में भी यही हाल है। मुंबइ में भी टमाटर की कीमतें बढ़कर 36-48 रुपए तक पहुँची हैं। आज़ादपुर की थोक मंडी में टमाटर की कीमतें 15-30 रुपए चल रहीऔरऔर भी

दाल, गेहूं और आलू के दाम गिरने से खाद्य मुद्रास्फीति में पिछले पांच सप्ताह से जारी तेजी पर विराम लग गया। एक जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति 1.41 फीसदी घटकर 16.91 फीसदी रही है। यह दीगर बात है कि सब्जी, प्याज और प्रोटीन आधारित खाद्य वस्तुओं के दाम में पहले जैसी तेजी बनी हुई है। इससे पिछले सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 18.32 फीसदी पर पहुंच गई थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य मुद्रास्फीति मेंऔरऔर भी

खाद्य वस्तुओं विशेषकर प्याज की बढ़ती महंगाई पर काबू पाने में विफलता के लिए आलोचना झेल रहे वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखकर जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाई जा सके। वित्त मंत्रालय के सूत्र के मुताबिक वित्त मंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है ताकि आपूर्ति में आ रही अड़चनों को दूर किया जाऔरऔर भी

महंगाई का असर लोग जब झेल चुके होते हैं, तब सरकार को पता चलता है और यह अगर ज्यादा हुई तो उसकी परेशानी बढ़ जाती है क्योंकि इससे मुद्रा से जुड़े सारे तार हिल जाते हैं, बैंकों व कॉल मनी की ब्याज दरों से लेकर सरकार की उधारी तक प्रभावित होती है और रिजर्व बैंक को फटाफट उपाय करने पड़ते हैं। ऊपर से सरकार को विपक्ष का राजनीतिक हमला अलग से सहना पड़ता है। इस समय यहीऔरऔर भी