सरकारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति की दर 16 जुलाई को समाप्त सप्ताह में घटकर 20 माह के न्यूनतम स्तर 7.33 फीसदी पर आ गई। लेकिन दूध, फल और अंडा, मांस व मछली जैसी जिन प्रोटीन-युक्त खाद्य वस्तुओं का खास जिक्र दो दिन पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने मौद्रिक की समीक्षा में किया था, उनके दाम अब भी ज्यादा बने हुए हैं। साल भर की समान अवधि की तुलना में उक्त सप्ताह में फलऔरऔर भी

मंगलवार को मई में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार घटकर 5.6 फीसदी रह जाने का आंकड़ा सामने आया तो लगने लगा कि रिजर्व बैंक शायद 26 जुलाई, मंगलवार को मौद्रिक नीति की पहली त्रैमासिक समीक्षा में ब्याज दरें बढ़ाने का अमंगल न करे। लेकिन जून माह में सकल मुद्रास्फीति के बढ़कर 9.44 फीसदी हो जाने ने इस आशा पर पानी फेर दिया है। अब नीतिगत दरों – रेपो व रिवर्स रेपो दर में कम से कम 0.25 फीसदीऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति 25 जून को खत्म सप्ताह में घटकर सात हफ्तों के न्यूनतम स्तर 7.61 फीसदी पर आ गई। लेकिन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना है कि अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का काफी दाब अभी बाकी है। गुरुवार को सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति 25 जून को खत्म सप्ताह में 7.61 फीसदी रही है। यह इससे एक हफ्ते पहले 7.78 फीसदी और एक साल पहले जून 2010औरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति ठंडी पड़ी, दयानिधि मारन का इस्तीफा हुआ और बाजार तेजी से झूम उठा। किसी को भी भान नहीं था कि निफ्टी यूं 5740 के एकदम करीब तक चला जाएगा। मुझे दुनिया को खुद के सही होने का सबूत देने की जरूरत नहीं है। हालांकि जिंदगी जब तक है, तब तक आलोचक भी रहेंगे। बिग बी तक के आलोचक हैं और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के भी। आपको किसी व्यक्ति की उपलब्धिऔरऔर भी

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 18 जून को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की दर 7.78 फीसदी रही है, जबकि इससे ठीक पिछले हफ्ते इसकी दर 9.13 फीसदी थी। एक साल पहले जून महीने के समान सप्ताह में यह 20.12 फीसदी थी। लेकिन इसी दौरान ईंधन व बिजली की मुद्रास्फीति बढ़कर आठ हफ्तों के शिखर 12.98 फीसदी पर जा पहुंची। ठीक पिछले हफ्ते यह 12.84 फीसदी और साल भर पहले 12.54औरऔर भी

देश में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 11 जून को समाप्त हुए सप्ताह में बढ़कर 9.13% पर पहुंच गई। यह ढाई महीने का उच्च स्तर है। फल, दूध, प्याज और प्रोटीन-युक्त वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ी है। इससे पिछले सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति 8.96% थी। वहीं साल भर पहले जून, 2010 के दूसरे सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर करीब 23 फीसदी थी। 26 मार्च, 2011 को समाप्त हुए सप्ताहऔरऔर भी

मुद्रास्फीति में तेजी को लेकर चिंता के बीच एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों से वास्तव में भारत, चीन व थाईलैंड जैसे खाद्य निर्यातक एशियाई देशों को राष्ट्रीय आय बढ़ाने में मदद मिलती है। सिंगापुर के अग्रणी बैंक डीबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों से हर किसी को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि कुछ को लाभ होता है। एशिया में थाईलैंड, भारत और चीन खाद्य वस्तुओं केऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति की दर 21 मई को समाप्त सप्ताह में घटकर 8.06 फीसदी पर आ गई है। इससे पिछले हफ्ते यह 8.55 फीसदी थी। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार 21 मई को खत्म हफ्ते में गैर-खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति की दर 21.31 फीसदी है, जबकि हफ्ते भर पहले यह 23.22 फीसदी थी। इन आंकड़ों के जारी होने के बाद वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने उम्मीद जताई कि आने वालेऔरऔर भी

आर्थिक सलाहकार कितने बिके हुए हो सकते हैं इसका नमूना पेश कर दिया है वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने। कौशिक बसु अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) के चेयरमैन भी हैं। इस समूह का कहना है कि महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए मल्टी-ब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश को मंजूरी दे देनी चाहिए। समूह ने कृषि विपणन कानून में बदलाव का भी सुझाव दिया है। यह सीधे-सीधे वॉलमार्ट जैसे विदेशी रिटेल स्टोरों की लॉबीइंग के सिवाऔरऔर भी

फल, अनाज और प्रोटीन आधारित खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से 14 मई को समाप्त हुए सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 8.55 फीसदी पर पहुंच गई। विशेषज्ञों ने आगाह किया कि हाल ही में पेट्रोल के दामों में की गई बढ़ोतरी से खाद्य वस्तुओं की कीमतें और बढ़ सकती है। खाद्य मुद्रास्फीति में तेजी के साथ ही विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने से रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अगले महीने मौद्रिक नीति की समीक्षा मेंऔरऔर भी