खाद्य मुद्रास्फीति 17 सितंबर को समाप्त सप्ताह में फिर से बढ़कर 9.13 फीसदी पर पहुंच गई। इससे पिछले हफ्ते यह दर 8.84 फीसदी थी, जबकि उससे पहले हफ्ते में 9.47 फीसदी थी। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने खाद्य वस्तुओं के दामों में जारी तेजी को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि इस तरह का उतार-चढ़ाव गंभीर चिंता का विषय है। खाद्य मुद्रास्फीति दहाई अंक के करीब है जो गंभीर स्थिति है।औरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति 10 सितंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान गिरकर 8.84 फीसदी पर आ गई। यह हफ्ते भर पहले 9.47 फीसदी दी। लेकिन आंकड़ों में इस कमी से आम आदमी को कोई राहत नहीं मिली क्योंकि मुख्य जिंसों की कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं। सरकार द्वारा गुरुवार को जारी थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़ों के मुताबिक गेहूं को छोड़कर ज्यादातर जिंसों की कीमतें एक साल पहले की तुलना में महंगीऔरऔर भी

दाल व गेहूं की कीमतों में क्रमशः 2.45 फीसदी व 2.03 फीसदी की कमी आने से तीन सितंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति घटकर 9.47 फीसदी  पर आ गई। हालांकि इस दौरान अन्य खाद्य वस्तुएं महंगी हुईं। इससे पहले 27 अगस्त को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति 9.55 फीसदी  थी, जबकि साल भर पहले 2010 की समान अवधि में यह 15.16 फीसदी  थी। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों केऔरऔर भी

अमेरिकी बाजार कल गिरे तो सही, लेकिन आखिरी 90 मिनट की ट्रेडिंग में फिर सुधर गए। अमेरिकी बाजार में ट्रेड करनेवाले कुछ फंडों का कहना है कि इस गिरावट की वजह यूरो संकट थी, न कि यह शिकायत कि 447 अरब डॉलर का पैकेज रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करने के लिए काफी नहीं है। यह पैकेज तो अभी तक महज घोषणा है और इसका असर वास्तविक खर्च के बाद ही महसूस किया जा सकता है। इसऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति 27 अगस्त को खत्म सप्ताह में थोड़ा घटकर 9.55 फीसदी पर आ गई। हालाकि सप्ताह के दौरान दाल और गेहूं को छोड़कर अन्य सभी प्राथमिक खाद्य वस्तुओं के दाम एक साल पहले की तुलना में ऊंचे रहे। इससे पिछले सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 10.05 फीसदी थी जबकि पिछले साल 2010 के इसी सप्ताह में यह 14.76 फीसदी थी। असल में कुछ सप्ताह तक नरम रहने के बाद 20 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान खाद्यऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति के दहाई अंक में पहुंचने के बावजूद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने भरोसा जताया है कि खाद्य उत्पादों की महंगाई दर अच्छे मानसून और बेहतर पैदावार के कारण कम हो जाएगी। परिषद के चेयरमैन सी रंगराजन ने गुरुवार को कहा, “उम्मीद है कि मुद्रास्फीति आने वाले सप्ताहों में घटेगी क्योंकि मानसून अच्छा रहा है। हम मानसून के अंत के करीब पहुंच चुके है और संकेत मिल रहे हैं कि इस साल पैदावार अच्छी रहेगी।”औरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति 13 अगस्त को खत्म हफ्ते के दौरान एक बार फिर दहाई अंक के करीब 9.80 फीसदी पर पहुंच गई। खाद्य वस्तुओं की मंहगाई दर में यह बढ़ोतरी खासकर प्याज, टमाटर, फल व दूध, अंडा और मछली जैसे प्रोटीन के स्रोत वाली चीजों की कीमतों के दबाव के कारण हुई। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति इससे पिछले सप्ताह 9.03 फीसदी पर थी। एक साल पहले इसी अवधि में खाद्य मुद्रास्फीति 14.56 फीसदी थी। सरकारऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति की दर 6 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान थोड़ा घटकर 9.03 फीसदी पर आ गई। इससे ठीक पिछले हफ्ते में थोक मूल्य सूचकांक आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की यह दर 9.90 फीसदी थी। लेकिन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि 9 फीसदी से ऊपर चल रही खाद्य मुद्रास्फीति स्वीकार्य नहीं है। हालांकि आगे इससे कुछ राहत मिल सकती है। वित्त मंत्री ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि 9 फीसदीऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति एक बार दहाई के खतरनाक आंकड़े की तरफ बढ़ने लगी है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 30 जुलाई 2011 को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की दर 9.90 फीसदी दर्ज की गई है। इससे पिछले सप्ताह यह 8.04 फीसदी और उससे पहले पिछले सप्ताह 7.33 फीसदी ही थी। वैसे तसल्ली की बात यह है कि साल भर पहले इसी दौरान मुदास्फीति की दर 16.45औरऔर भी

देश जबरदस्त विरोधाभास से जूझ रहा है। खाद्यान्नों के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर थमने का नाम नहीं ले रही। 16 जुलाई को खत्म हफ्ते में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति नवंबर 2009 से बाद के सबसे न्यूनतम स्तर 7.33 फीसदी पर थी। लेकिन 23 जुलाई को खत्म हफ्ते मे यह फिर से बढ़कर 8.04 फीसदी पर पहुंच गई है। वैसे साल भर पहले तो और भी भयंकर स्थिति थीऔरऔर भी