देश भर में 17 मार्च से शुरू सर्राफा व्यापारियों की हड़ताल बुधवार को बारहवें दिन भी जारी  रही। इसकी धमक संसद में भी सुनाई पड़ी। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जबाव देते हुए संकेत दिया कि वे अनब्रांडेड आभूषणों पर उत्पाद शुल्क वापस ले सकते हैं। लेकिन सोने पर बढ़ा हुआ आयात शुल्क वापस लेने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि सोने पर बढ़े हुए आयातऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सफाई दी है कि जीएएआर (जनरल एंटी-एवॉयडेंस रूल) का मकसद सिर्फ टैक्स चोरों पर शिकंजा कसना है, न कि इमानदार निवेशकों को परेशानी करना। लेकिन कर देने और अपने विदेशी ग्राहकों की पहचान खुलने से डरी विदेशी ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने पी-नोट्स को बेचने का सिलसिला फिलहाल के लिए रोक दिया है। बता दें कि पी-नोट वे प्रपत्र हैं जिनके जरिए विदेशी निवेशक बगैर अपनी पहचान खोले विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) केऔरऔर भी

एक तरफ वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पिछले शुक्रवार को पेश बजट में पेट्रोलियम सब्सिडी को 25,000 करोड़ रुपए घटाकर डीजल के दाम बढ़ाने का इरादा साफ-साफ जाहिर कर दिया था। वहीं दूसरी तरफ इस शुक्रवार को हमारे पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने दावा किया कि सरकार का कोई इरादा डीजल को मूल्य नियंत्रण व्यवस्था से बाहर निकालने का नहीं है। रेड्डी ने राजधानी दिल्ली में सातवें एशियाई गैस भागीदारी सम्मेलन में संवाददाताओं से अगल सेऔरऔर भी

रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का इस्तीफा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। इसके बाद तय हुआ कि रेल बजट 2012-13 पर जो भी चर्चा होगी, उसका जवाब वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी देंगे। सोमवार से लोकसभा में रेल बजट पर चर्चा शुरू हो चुकी है। ये पहला मौका है जब अलग तरह के राजनीतिक हालात पैदा हो गए हैं। लिहाजा सरकार के सामने बड़ी चुनौती आ गई कि रेल बजट परऔरऔर भी

वित्त मंत्री ने अपने हिसाब से शेयर बाजार को लुभाने की बहुत कोशिश की। एसटीटी (सिक्यूरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) घटा दिया। ग्राहकों की तंगी से त्रस्त बाजार में नए रिटेल निवेशकों को खींचकर लाने के लिए एकदम तरोताजा, राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम शुरू कर दी। आईपीओ लाने की प्रक्रिया आसान कर दी। इसकी लागत घटा दी। कंपनियों को छोटे शहरों के और ज्यादा निवेशकों तक पहुंचने में मदद की। दस करोड़ रुपए से ज्यादा के आईपीओ कोऔरऔर भी

यह बजट किसके लिए है? आम के लिए, खास के लिए या बाजार के लिए! अगर प्रतिक्रियाओं के लिहाज से देखा जाए तो इनमें से किसी के लिए भी नहीं। आम आदमी परेशान हैं कि उसे बमुश्किल से मुद्रास्फीति की मार के बराबर कर रियायत मिली है। खास लोगों को कहना था कि वित्त मंत्री को राजकोषीय मजबूती के लिए जो ठोस उपाय करने थे, वैसा कोई भी साहसिक कदम उन्होंने नहीं उठाया है। उन्होंने दस मेंऔरऔर भी

हर खासो-आम यही तलाशने में लगा है कि उसे बजट 2012-13 से क्या मिला। कंपनियों और धंधे वालों की बात अपनी जगह है। लेकिन अगर हम नौकरीपेशा लोगों की बात करें तो आयकर के नए प्रावधानों का सबसे ज्यादा फायदा साल भर में आठ से दस लाख कमानेवालों को होगा। बजट में आयकर छूट की सीमा 1.80 लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए सालाना कर दी गई है। हालांकि संसदीय समिति ने इसे तीन लाख करनेऔरऔर भी

राजीव गांधी के नाम पर सीधे शेयरों में 50,000 रुपए लगाओ। तीन साल तक उसे हाथ न लगाओ और इस निवेश का 50 फीसदी हिस्सा आयकर में रियायत पाओ। जी हां, वित्त मंत्री ने नए साल के बजट में रिटेल निवेशकों को शेयर बाजार में खींचने के लिए पहली बार राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम शुरू की है। इसका पूरा ब्योरा तो बाद में अलग से जारी किया जाएगा। लेकिन वित्त मंत्री के प्रस्ताव के मुताबिक, जिनऔरऔर भी

चुनाव न होते तो बजट का रहस्य 16 दिन पहले ही खुल जाता। चलिए, इससे वित्त मंत्री और उनके अमले को अपने प्रस्तावों को ठोंक-बजाकर दुरुस्त करने के लिए ज्यादा वक्त मिल गया। लेकिन हम तो उन्हीं के भरोसे हैं तो हमें क्या वक्त मिलना और क्या न मिलना! इतना तय है कि बजट की एक-एक लाइन किसी न किसी रूप में कंपनियों के धंधे पर असर डालती है और इसका सीधा असर उनके शेयरों पर पड़ेगा।औरऔर भी