गहनों से एक्साइज हटाने के मूड में सरकार

सरकार उन्नीस दिनों से चल रही सर्राफा व्यापारियों की देशव्यापी हड़ताल के आगे झुकती नजर आ रही है। उसने बुधवार को घोषित किया कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी शुक्रवार, 6 अप्रैल को नई दिल्ली में प्रमुख शहरों के आभूषण निर्माताओं के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। संबंधित संस्‍थाओं से इस बैठक के लिए अपने दो प्रतिनिधियों को मनोनीत करने को कहा गया है।

संकेत इस बात का है कि अनब्रांडेड आभूषणों पर लगाई गई एक फीसदी एक्साइज ड्यूटी वापस ले ली जाएगी। वित्त मंत्रालय के बयान ने कहा गया है, “वर्ष 2012-13 के बजट प्रस्‍तावों में महंगी धातुओं (चांदी के अलावा) के बिना ब्रांड वाले आभूषणों पर एक फीसदी उत्‍पाद शुल्‍क लगाया गया है। कारीगरों व सुनारों सहित आभूषण निर्माताओं की ओर से वित्‍त मंत्रालय को इस प्रस्‍ताव पर दोबारा विचार करने के लिए कई पत्र मिले हैं जिसमें कहा गया यह असंगठित उद्योग है और उसे केंद्रीय उत्‍पाद शुल्‍क कानून के प्रावधानों का अनुपालन करने में परेशानी होगी।”

इस तरह एक्साइज हटाने के लिए सरकार तैयार दिख रही है। लेकिन सोने के आयात पर लगाए गए 4 फीसदी शुल्क को हटाए जाने की कोई उम्मीद नहीं है। पहले सोने पर आयात शुल्क 2 फीसदी ही था। असल में सरकार देश में सोने के आयात को हतोत्साहित करना चाहती है क्योंकि वो कच्चे तेल के बाद सबसे ज्यादा आयात की जानेवाली वस्तु बन गया है। रिजर्व बैंक भी इस प्रयास में सरकार के साथ है। उसने बैंकों व अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ ही आभूषण निर्यातकों से भी हर महीने आयात किए गए सोने का आंकड़ा मांगा है। बैंकों से यह भी जानकारी मांगी गई है कि सोने के आयात के लिए उनके पास से कितने डॉलर निकल रहे हैं।

इस बीच करीब दस हजार सर्राफा कारोबारियों के प्रतिनिधि, मुंबई ज्वैलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुमार जैन ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी जब तक वापस नहीं ले ली जाती है, तब तक उनकी देशव्यापी हड़ताल जारी रहेगी। बता दें कि देश भर के सर्राफा व्यापारी बजट आने के अगले ही दिन, 17 मार्च से हड़ताल कर रहे हैं। एक्साइज ड्यूटी वापस लेने के अलावा उनकी यह भी मांग है कि दो लाख रुपए के अधिक की खरीद पर टीडीएस काटने का प्रावधान खारिज किया जाए। दिक्कत यह है कि 7 मई को संसद में फाइनेंस बिल पर विचार से पहले बजट प्रस्तावों में किसी फेरबदल का अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता।

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