कालरूपी परमात्मा ने ही इन सभी लोकों को धारण किया हुआ है। वह कालरूपी परमात्मा ही इन सभी लोकों में चारों ओर व्याप्त है। वही इन सब प्राणियों का पिता भी है और इन सबका पुत्र भी। संसार में उससे बड़ी कोई शक्ति नहीं। ।।अथर्ववेद।।और भीऔर भी

जब तीन-तीन सत्ताएं आपके भीतर हैं तो बाहरी सत्ता के फेर में क्यों पड़ना! मन ही मन मातृसत्ता, पितृसत्ता और गुरुसत्ता को साध लिया जाए तो आशीर्वाद व प्रेरणा का ऐसा निर्झर अंदर से बहता है कि कहीं और माथा झुकाने की जरूरत नहीं।और भीऔर भी

छुटपन में मां, फिर बाप और फिर शरीर ही हमारा खेवैया होता है। इसे शराब के क्षार, धूम्रपान व तंबाकू की घुटन और भोजन की अशुद्धता से अस्थिर रखेंगे तो वह सहजता से कैसे हमारा ख्याल रख पाएगा!और भीऔर भी

सोचिए, आप किस-किस के प्रति कृतज्ञ हैं? मां-बाप, गुरु, भाई-बंधु, पति/पत्नी! किसी के प्रति नहीं!! हर किसी ने आपका अहित किया है? अगर वाकई आपकी यही सोच है तो आपकी सोच में भारी खोट है।और भीऔर भी