जब चील गुरुत्वाकर्षण को तोड़ दूर गगन से धरती का निरीक्षण कर सकती है, इंसान जब हज़ारों मील ऊपर जहाज उड़ा सकता है, तब हम अपने अहम व पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर सच को क्यों नहीं देख सकते।और भीऔर भी

ज्ञान अगर कर्म की सेवा न करे तो वह अपने अहम को संतुष्ट करने का साधन बनकर रह जाता है। दरअसल हर शिक्षा, विद्या या ज्ञान का काम यही है कि वह हमारे कर्मजगत की राहों को साफ-सुथरा बना दे।और भीऔर भी

किसी मूर्ख को आसानी से खुश किया जा सकता है। बुद्धिमान को खुश करना और भी आसान है। लेकिन अपने ‘ज्ञान’ पर मुग्ध लोगों को ब्रह्मा भी खुश नहीं कर सकते। इसलिए इनके मुंह नहीं लगना चाहिए।और भीऔर भी

जमाना हम से है, हम जमाने से नहीं – जैसी बातें मुंह फुलाकर हनुमान बनने से ज्यादा कुछ नहीं। जमाना हमारे बगैर भी चलता है और चलता रहेगा। हमें जमाने को समझने की जरूरत है, न कि जमाने को हमें।और भीऔर भी

हो सकता है कि कोई रेत को मसल कर तेल निकाल ले, मरीचिका से भी अपनी प्यास बुझा ले, गधे तक के सिर पर सींग देख ले, लेकिन एक दम्भी मूर्ख को प्रसन्न कर पाना किसी के लिए भी असंभव है।और भीऔर भी

गुमान रहता है कि हम ये कर डालेंगे, वो कर डालेंगे। हालात से टकराकर हकीकत सामने आती है तो हम जीरो बन जाते हैं। लेकिन यही जीरो जरूरी जज्बे का साथ पाकर आपको फिर से हीरो बना सकता है।और भीऔर भी

चीजें तो जैसी हैं, वैसी ही रहती हैं। नियमों से बंधी, भावनाओं से रहित। सीधी-सरल, देखने की नजर हो पारदर्शी। लेकिन हमारा अहम, हमारे पूर्वाग्रह उसे जटिल बना देते हैं। रस्सी को सांप बना देते हैं।और भीऔर भी

निवेश एक कला है और विज्ञान भी। कला अनुशासन से निखरती है और विज्ञान अध्ययन से आता है। इसे साबित कर दिखाया है आईआईएम लखनऊ के छात्रों ने। 2009-11 के बैच के छात्रों के स्वैच्छिक सहयोग से बनाए गए फंड क्रेडेंस कैपिटल ने इक्विटी शेयरों में निवेश पर 17.96 फीसदी और डेरिवेटिव सौदों पर 25.84 फीसदी रिटर्न हासिल किया है, जबकि इसी दौरान निफ्टी में 5.56 फीसदी की ही बढ़त दर्ज की गई। निवेश की अवधि जुलाईऔरऔर भी

ये अहम, ये ईगो हमारे अंदर का ऐसा ब्लैक होल है जो हमारा सब कुछ सोख कर बैठा रहता है। भ्रमों के जंगल से, माया के जाल से हमें निकलने नहीं देता। निकलने की कोशिश करते ही खींचकर पुनर्मूषको भव कर देता है।और भीऔर भी

इसे अहम कहें या आत्ममुग्धता, हम अपने में खोए और आक्रांत रहते हैं। खूंटे से बंधी गाय की तरह हमारा वृत्त बंध गया है। आम से लेकर खास तक, ज्ञानी और विद्वान तक अंदर के चुम्बक से पार नहीं पा पाते।और भीऔर भी