देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज, बीएसई ने पर्यावरण रक्षा के प्रति देश के कॉरपोरेट जगत की परवाह को दर्शानेवाला सूचकांक, ग्रीनेक्स के नाम से लांच किया है। भारत में अपनी तरह के इस पहले सूचकांक में कुल 20 कंपनियां शामिल हैं। इस सूचकांक की औपचारिक शुरुआत बुधवार को कॉरपोरेट कार्य मंत्री वीरप्पा मोइली ने बीएसई परिसर में आयोजित एक समारोह में की। बीएसई ने इस सूचकांक का निर्धारण जर्मन सरकार के सहयोग से चलाई जा रहीऔरऔर भी

किसी शेयर की बुक वैल्यू 320 रुपए हो और उसका शेयर इसके लगभग आधे भाव पर ट्रेड हो रहा तो आप क्या करेंगे? ऊपर से शेयर दस से नीचे के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा तो हर कोई कहेगा – लूट लो, यह शेयर तो साल भर में दोगुना हो ही सकता है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या बुक वैल्यू का ज्यादा होना ही निवेश का पर्याप्त मानदंड है? क्या कम पी/ई का मतलब उसऔरऔर भी

यूं तो आज के समय में कंपनियों के साथ राष्ट्रीयता या राष्ट्रवाद को जोड़ने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि देशी-विदेशी हर कंपनी का मकसद अंधाधुंध मुनाफा कमाना है। अन्यथा, वॉलमार्ट या केयरफोर से सबसे ज्यादा चोट खा सकने वाले बिग बाज़ार या रिलायंस फ्रेश जैसे देशी रिटेलर ही उनका स्वागत पलक पांवड़े बिछाकर नहीं कर रहे होते। किशोर बियानी जैसे लोग तो इस चक्कर में हैं कि अपने उद्यम की इक्विटी इन विदेशियों को बेचकर कैसेऔरऔर भी

काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती है और अच्छी चीजें बाज़ार की नज़रों से कभी बच नहीं सकतीं। हम देखें या न देखें, लोगों की पारखी निगाहें ताड़ ही लेती हैं कि मूल्य कहां पक रहा है। नहीं तो क्या वजह है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, इलाहाबाद बैंक का जो शेयर महीने भर पहले 130 रुपए पर डोल रहा था, वह बिना किसी ट्रिगर या खेल के 195 रुपए पर पहुंच चुका है। महीने भर मेंऔरऔर भी

अरंडी बड़े ही जीवट वाला ऐसा पौधा है जो देश में उत्तर से दक्षिण तक कहीं भी आपको सड़क किनारे उगा हुआ मिल जाएगा। गुजरात, राजस्थान व आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में जमकर इसकी व्यावसायिक खेती होती है। भारत दुनिया में अरंडी व इससे बने उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक है। दुनिया के बाजार का 65 फीसदी हिस्सा इसके पास है। अरंडी की खली से लेकर तेल तक में औषधीय गुण होते हैं। हिंदी भाषी इलाकों केऔरऔर भी

कोई समझे या न समझे। हमारा तो यही अंदाज़ है। जयश्री टी में हमने जो लक्ष्य 30 दिन में हासिल करने की बात कही थी, उसे तीन ट्रेडिंग सत्रों में ही हासिल कर लिया। हमने इसके 99 रुपए पर पहुंचने की बात कही थी। कल यह 99.40 रुपए तक चला गया। हमारा काम है पूरी ईमानदारी से निवेश की सलाह देना और वह काम हम किए जा रहे हैं। हां, बुद्धि और विश्लेषण की सीमा है तोऔरऔर भी

महात्मा गांधी ने पूंजीपतियों को जनता के धन का ट्रस्टी होने की बात कही थी। मार्क्स-एंगेल्स ने भी पूंजी के स्वामित्व को व्यापक आधार देने की वकालत की थी। लिस्टेड कंपनियां शेयर बाजार के जरिए इसी स्वामित्व का विस्तार करती हैं। लेकिन एक तो हमारे लचर कानून, दूसरे कंपनी के मामलों में आम शेयरधारकों की निष्क्रियता के चलते भारतीय प्रवर्तक जनधन के ट्रस्टी के बजाय उसकी निजी लूटखसोट में व्यस्त हैं। इसे ठीक करने के लिए जरूरीऔरऔर भी

हमें अपने निवेश के प्रति बड़ा निर्मम होना चाहिए। लक्ष्य पूरा हुआ, खटाक से कमाकर निकल लिए। कोई स्टॉक खरीद मूल्य से 25 फीसदी नीचे चला गया तो बिना मोह पाले उसे नमस्कार बोल डाला। डिवीज़ लैब में निवेश की सलाह हमारे चक्री महाशय ने सबसे पहले 27 अप्रैल 2011 को दी थी। तब इसका दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर 715 रुपए पर था। तीन महीने में ही यह करीब 18 फीसदी बढ़कर 28 जुलाई 2011औरऔर भी

जयश्री टी एंड इंडस्ट्रीज़ के दिसंबर तिमाही के नतीजे बड़े खराब रहे हैं। चाय और चीनी के दोनों ही धंधों में उसका मुनाफा घटा है। चाय सेगमेंट से बिक्री साल भर पहले की समान तिमाही से मात्र 5.7 फीसदी बढ़कर 104.93 करोड़ से 110.91 करोड़ रुपए हुई, पर यहां से हुआ शुद्ध लाभ 22.6 करोड़ से घटकर 9.33 करोड़ रुपए पर आ गया। चीनी में कंपनी ने देरी से पेराई शुरू की तो इस सेगमेंट की बिक्रीऔरऔर भी

सारा खेल गणनाओं और सही समय पर सही सूचनाओं को पकड़ने का है। याद करें 24 जनवरी को हमने कहा था – जागरण में 10% बस 10-15 दिन में। उसके एक दिन पहले 23 जनवरी को जागरण प्रकाशन का शेयर बीएसई में 98.15 रुपए पर बंद हुआ था। हमने कहा था कि यह 110 रुपए को पार कर सकता है। कल, 7 फरवरी को हमारे लिखे को 14 दिन ही पूरे हुए और जागरण का शेयर 114.50औरऔर भी