कैसे कुलांचे मार गया इलाहाबाद बैंक!

काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती है और अच्छी चीजें बाज़ार की नज़रों से कभी बच नहीं सकतीं। हम देखें या न देखें, लोगों की पारखी निगाहें ताड़ ही लेती हैं कि मूल्य कहां पक रहा है। नहीं तो क्या वजह है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, इलाहाबाद बैंक का जो शेयर महीने भर पहले 130 रुपए पर डोल रहा था, वह बिना किसी ट्रिगर या खेल के 195 रुपए पर पहुंच चुका है। महीने भर में पूरे 50 फीसदी की बढ़त। एक महीने में पूंजी डेढ़ गुनी! अफसोस होता है जब हमारे-आप जैसे सामान्य निवेशक ऐसे मौके चूक जाते हैं।

इलाहाबाद बैंक का दस रुपए अंकित मूल्य का शेयर कल, 15 फरवरी 2012 को बीएसई (कोड – 532480) में 195.35 रुपए और एनएसई (कोड – ALBK) में 195.50 रुपए पर बंद हुआ है। ए ग्रुप का शेयर है, बीएसई-200 में शामिल है तो इसमें डेरिवेटिव सौदे भी होते हैं। कल इसका फरवरी का फ्यूचर्स 196.45 रुपए पर बंद हुआ है। ठीक महीने भर पहले 16 जनवरी 2012 को इस शेयर का भाव 135.15 रुपए था। तब तक बैंक ने दिसंबर तिमाही के नतीजे नहीं घोषित किए थे।

तब उसका सितंबर तिमाही तक के बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 33.72 रुपए पर था और शेयर 4.01 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के स्टॉक्स औसतन 6.9 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहे थे। पारखी निवेशकों ने मौका ताड़ लिया और उनकी खरीद ने शेयर को 50 फीसदी ऊपर उठा दिया। उन्हें शायद यह आकर्षण भी दिखा होगा कि शेयर अपनी बुक वैल्यू 160.50 रुपए से नीचे ट्रेड हो रहा था। जो और भी चौकन्ने निवेशक रहे होंगे, उन्होंने दिसंबर-जनवरी की संधि के दौरान इलाहाबाद बैंक के शेयर को पकड़ लिया होगा क्योंकि 29 दिसंबर 2011 को यह नीचे में 113.60 रुपए और 2 जनवरी 2012 को 114.70 रुपए तक चला गया था।

30 जनवरी को बैंक ने दिसंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए। इनके मुताबिक जहां उसकी कुल परिचालन आय 37 फीसदी बढ़कर 3911.87 करोड़ रुपए हो गई, वहीं शुद्ध लाभ 34.78 फीसदी बढ़कर 560.43 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। दिसंबर तिमाही को मिलाकर इलाहाबाद बैंक का पिछले बारह महीनों का ईपीएस अब बढ़कर 36.21 रुपए हो गया है और उसका शेयर फिलहाल 5.39 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। उसकी बुक वैल्यू अब बढ़कर 210.12 रुपए हो गई है। सबसे खास बात यह है कि क्लेश में फंसे एविशयन व टेलिकॉम जैसे क्षेत्रों को बैंक ने न के बराबर कर्ज दे रखा है। टेक्सटाइल जैसे दबावग्रस्त क्षेत्र को भी उसके ऋणों का मात्र दो फीसदी भाग मिला हुआ है।

यही वजह है कि उसका शुद्ध एनपीए या फंसे हुए ऋण कुल वितरित कर्ज का मात्र 0.79 फीसदी हैं। बैंक ने एनपीए के लिए 78.03 फीसदी प्रावधान कर रखा है, जबकि रिजर्व बैंक का निर्देश 70 फीसदी तक का ही है। बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 12.75 फीसदी है, जबकि मानक 9 फीसदी का है। बैंकों की कमाई की असली माप उनके शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) से होती है। इलाहाबाद बैंक का यह मार्जिन दिसंबर 2010 में 3.44 फीसदी था, जबकि दिसंबर 2011 की तिमाही में यह 3.73 फीसदी हो गया।

बैंक का लक्ष्य मार्च 2012 तक 2,80,000 करोड़ रुपए का कुल बिजनेस (प्राप्त जमा + दिए गए ऋण) हासिल कर लेना है। दिसंबर 2011 तक यह 2,46,939 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। उम्मीद करते हैं कि 2.40 करोड़ ग्राहकों से जुड़ा इलाहाबाद बैंक अपने 1,76,331 शेयरधारकों के निवेश का मूल्य यूं ही बढ़ाता रहेगा। वैसे, बैंक लाभांश भी ठीकठाक देता है। इसका मौजूदा लाभांश यील्ड 3.07 फीसदी है। बीते साल इसने दस रुपए के शेयर पर छह रुपए यानी 60 फीसदी का लाभांश दिया था। बैंक की 476.22 करोड़ रुपए की इक्विटी में भारत सरकार की हिस्सेदारी 58 फीसदी है।

आखिरी बात, आप चाहें तो इसमें निवेश कर सकते हैं क्योंकि पिछले साल 30 मार्च 2011 को यह 240 रुपए तक जा चुका है। लेकिन मैं तो फिलहाल इसके 50-100 शेयर खरीदकर थोड़ा नीचे आने का इंतजार करूंगा। यह शेयर लंबे निवेश के लिए अच्छा है।

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