डिफेंस जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विदेशी कंपनियों कों 74% मालिकाना देकर भारत को आत्मनिर्भर बनाने का दावा करना मात्र एक सब्ज़बाग है। भारत को अपने प्राकृतिक, मानव व ऐतिहासिक संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल और घरों के सोने व मंदिरों की अकूत संपदा में फंसी अनुत्पादक पूंजी को निकालकर ही आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। भारत में ज़मीन से उठे ब्रांडों को भी उभारना पड़ेगा। आज तथास्तु में पेश है एक ऐसे ही मजबूत ब्रांड से जुड़ी कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में लिस्टेड अधिकांश कंपनियों के लिए 23 और 24 मार्च 2020 यादगार तारीख बन गई है क्योंकि कोरोना के कहर के बीच उस दिन उनके शेयरों ने ऐतिहासिक तलहटी पकड़ ली थी। लेकिन बहुतेरी कंपनियां इस कहर से अछूती रहीं जिनमें से ज्यादातर नेस्ले व हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी बहुराष्ट्रीय एफएमसीजी कंपनियां हैं। हालांकि कुछ देशी कंपनियां भी इस मार से बची रहीं। तथास्तु में पेश है आज नामी ब्रांड वाली ऐसी ही एक देशी कंपनी…औरऔर भी

लॉकडाउन के बावजूद कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। अपने यहां कोरोना के मरीजों की संख्या चीन से ज्यादा हो चुकी है। 20 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक पैकेज फिलहाल खोखला दिख रहा है। ऐसे में वही कंपनियां मैदान में डटी रह सकती हैं जिनकी बैलेस शीट तगड़ी हो और जिनके उत्पाद व सेवाओं में इतना दम हो कि वे कोरोना की मार के बावजूद अपना बाज़ार बढ़ा सकें। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

अमेरिका में बेरोजगारी 1929 की महामंदी के बाद सबसे बदतर अवस्था में है। चीन पहले से त्रस्त है। भारत की विकास दर का अनुमान मूडीज़ ने शून्य कर दिया है। कुछ अर्थशास्त्री तो इसके ऋणात्मक होने की गणना कर रहे हैं। शेयर बाज़ार से निवेशक दूर भाग रहे हैं। अप्रैल में इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश 47% घट गया है। ऐसे में भागना उचित है या डटे रहना। तथास्तु में इसका जवाब एक कंपनी के साथ…औरऔर भी

हमने बायनॉमिअल प्राइसिंग मॉडल में बैंकवर्ड इंडक्शन करते हुए ऑप्शन का भाव पोर्टफोलियो के मिलान या रेप्लिकेशन से निकाला। हमने यह भी देखा कि गिनने में यह तरीका ज्यादा ही जटिल है। मात्र दो ही चरणों में बहुत सारी गणनाएं करनी पड़ीं। इसकी तुलना में रिस्क न्यूट्रल वैल्यूएशन इस मॉडल का काफी आसान तरीका है। इसमें गणना कई चरणों में नहीं करनी पड़ती। सब कुछ आसान व सहज है। वैसे, यह कैसे काम करता है और इसमेंऔरऔर भी

ऑप्शन प्राइसिंग के ब्लैक-शोल्स मॉडल की तह में जाने से पहले हम एक दूसरे प्राइसिंग मॉडल को जानने की कोशिश करते हैं जो बाद में ब्लैक-शोल्स मॉडल को ठीक से जानने में काम आ सकता है। यह है बायनोमिअल मॉडल। हम इसे यूरोपियन कॉल ऑप्शन पर लागू करके उसका भाव निकालेंगे। बाद में पुट ऑप्शन का भाव कॉल-पुट समता के आधार पर निकाल सकते हैं। याद रखें कि यूरोपियन ऑप्शन सौदे एक्सपायरी के वक्त ही काटे जाऔरऔर भी

अगर आप ऑप्शन ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो सबसे पहले यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि इसमें 88 प्रतिशत प्रायिकता ऑप्शन बेचनेवाले या राइटर के मुनाफा कमाने की होती है और केवल 12 प्रतिशत प्रायिकता इस बात की होती है कि ऑप्शन खरीदनेवाला जीतकर लाभ कमा सके। यह निष्कर्ष किसी के मन की बात नहीं, बल्कि इसे दुनिया के पहले ऑप्शन एक्सचेंज, शिकागो बोर्ड ऑफ ऑप्शन एक्सचेंज (सीबीओई) के करीब डेढ़ सौ साल के डेटा केऔरऔर भी

देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि 0.33% कोरोना मरीज ही वेंटीलेटर पर हैं। लेकिन बाद में ज़रूरत तो बढ़ ही सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में अभी 19,398 वेंटीलेटर ही उपलब्ध हैं, जबकि 60,884 का ऑर्डर दिया गया है जिसमें से 59,884 वेंटीलेटर घरेलू कंपनियां बना कर देंगी। साफ है देश में वेंटीलेटर काफी कम हैं। तथास्तु में कोरोना काल में बिजनेस के मौके पकड़ती एक कंपनी…औरऔर भी

अप्रैल माह का आखिरी दिन। गुरुवार था तो डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी या सेटलमेंट का दिन। इसके विस्तृत आंकड़ों में वह तस्वीर छिपी है जो हमें ऑप्शन ट्रेडिंग की व्यावहारिक स्थिति, उसके विस्तार व महत्व से वाकिफ करा सकती है। इसलिए आज हम इन्हीं आंकडों की तह में पैठेंगे और अब तक हासिल की गई समझ की धार को थोड़ा तेज़ करने की कोशिश करेंगे। एनएसई में कल गुरुवार, 30 अप्रैल को समूचे एफ एंड ओ (फ्यूचर्सऔरऔर भी

आज महीने का अंतिम गुरुवार होने के नाते अप्रैल के डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी का दिन है। यह दिन आपके लिए बहुत अहम है क्योंकि आज ऑप्शन के भाव, निफ्टी के सेटलमेंट भाव और अलग-अलग कॉल व पुट ऑप्शन की स्थिति पर बारीकी से नज़र डालकर आप ऑप्शन ट्रेडिंग के पैटर्न को समझने का आधार बना सकते हैं, इस पाठ-श्रंखला में अब तक की दस कड़ियों में जो भी पढ़ा है और जो भी समझा है, उसेऔरऔर भी