समय व चंचलता नचाए ऑप्शन भाव

आज महीने का अंतिम गुरुवार होने के नाते अप्रैल के डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी का दिन है। यह दिन आपके लिए बहुत अहम है क्योंकि आज ऑप्शन के भाव, निफ्टी के सेटलमेंट भाव और अलग-अलग कॉल व पुट ऑप्शन की स्थिति पर बारीकी से नज़र डालकर आप ऑप्शन ट्रेडिंग के पैटर्न को समझने का आधार बना सकते हैं, इस पाठ-श्रंखला में अब तक की दस कड़ियों में जो भी पढ़ा है और जो भी समझा है, उसे व्यवहार में दोहरा सकते हैं। आज शाम को गौर कीजिएगा कि बहुत सारे ऑप्शंस के भाव 0.05 रुपए दर्ज किए जाएंगे। सोचिएगा कि ऐसा क्यों है?

खैर, पिछला सिलसिला आगे बढ़ाते हैं। किसी भी ऑप्शन के भाव के दो हिस्से होते हैं। एक इन्ट्रिंजिक या अंतर्निहित मूल्य और दूसरा टाइम या समय मूल्य। जहां अंतर्निहित मूल्य का सीधा रिश्ता ऑप्शन के स्ट्राइक मूल्य और संबंधित शेयर या सूचकांक के स्पॉट/सेटलमेंट मूल्य से होता है, वहीं समय मूल्य का शेयर या सूचकांक के किसी भी मूल्य से कोई रिश्ता नहीं होता। ऑप्शन का समय मूल्य मुख्यतः दो कारकों पर निर्भर है। एक उसकी एक्सपायरी में कितना वक्त बचा है और दो, उस शेयर की वोलैटिलिटी कितनी है। अगर समान स्ट्राइक मूल्य वाले ऑप्शन की एक्सपायरी में ज्यादा वक्त बचा है तो उसका समय मूल्य ज्यादा होगा। मसलन, निफ्टी में 9600 स्ट्राइक मूल्य के मई कॉल ऑप्शन का भाव अप्रैल के कॉल ऑप्शन भाव से ज्यादा होगा।

उदाहरण के लिए कल इस कॉल ऑप्शन में 30 अप्रैल की एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट का भाव 25.90 रुपए, 7 मई वाले कॉन्ट्रैक्ट का भाव 113.90 रुपए और 28 मई की एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट का भाव 294.95 रुपए रहा है। इस कॉल ऑप्शन का अंतनिर्हित मूल्य फिलहाल शून्य है क्योंकि निफ्टी-50 का स्पॉट मूल्य स्ट्राइक मूल्य कम है। ध्यान रहे कि कॉल ऑप्शन के धारक को स्ट्राइक मूल्य पर निफ्टी को खरीदने का अधिकार होता है तो जब बाज़ार में निफ्टी का भाव स्ट्राइक मूल्य से नीचे है तो वह महंगे दाम पर खरीदने की मूर्खता क्यों करेगा। इसलिए कॉन्ट्रैक्ट के उक्त भावों का अंतर उसके समय मूल्य के ही अंतर को दिखाता है।

ऑप्शन का समय मूल्य एक्सपायरी के बचे हुए समय के साथ बढ़ता जाता है, यह नियम पुट ऑप्शन पर भी समान रूप से लागू होता है। जैसे, कल निफ्टी में 9600 के स्ट्राइक मूल्य वाले पुट ऑप्शन में 30 अप्रैल की एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट का भाव 98 रुपए, 7 मई वाले कॉन्ट्रैक्ट का भाव 185 रुपए और 28 मई की एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट का भाव 420 रुपए रहा है। लेकिन पुट ऑप्शन का अंतनिर्हित मूल्य अभी 46.65 रुपए है क्योंकि निफ्टी-50 का स्पॉट मूल्य 9553.35 रुपए पुट ऑप्शन के 9600 के स्ट्राइक मूल्य से 46.65 रुपए कम है। पुट ऑप्शन के धारक को स्ट्राइक मूल्य पर निफ्टी को बेचने का अधिकार होता है तो जब बाज़ार में कम भाव पर निफ्टी खरीदकर स्ट्राइक मूल्य पर बेच सकता है। इसलिए इस पुट ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का समय मूल्य उसके कुल भाव से 46.55 रुपए को घटाकर निकाला जाएगा।

ऑप्शन के भाव स्टॉक या सूचकांक की वोलैटिलिटी पर भी निर्भर करते हैं। वोलैटिलिटी का मतलब है कि उस शेयर के स्पॉट मूल्य में कितना तेज़ बदलाव आता है। इसकी गणना स्टैंडर्ड डेविएशन के माध्यम से करते हैं। वैसे, एनएसई की वेवसाइट पर दैनिक व सालाना वोलैटिलिटी दी रहती है। लेकिन आप चाहें तो इसकी गणना एक्सेल-शीट पर एनएसई से डेटा इन्पोर्ट करके कर सकते हैं। अगर वोलैटिलिटी ज्यादा है तो ऑप्शन का भाव ज्यादा होगा और वोलैटिलिटी कम है तो उसके ऑप्शन का भाव कम होगा। चूंकि ज्यादा वोलैटाइल शेयर में ऊपर या नीचे जाने की प्रायिकता कम वोलैटाइल शेयर से अधिक होगी। इसलिए उसके ऑप्शन भाव ज्यादा रहते हैं।

दो अन्य कारक हैं, जिनसे ऑप्शन के भाव निर्धारित होते हैं। इसमें से पहला कारक है कि अर्थव्यवस्था में ब्याज की दर क्या चल रही है। इसे पूंजी की प्रचलित लागत भी कहा जाता है। हालांकि ऑप्शन के भाव पर इनका बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता। मोटे तौर पर होता यह है कि अगर ब्याज दर ज्यादा है तो कॉल ऑप्शन के भाव अपेक्षाकृत ज्यादा और पुट ऑप्शन के भाव अपेक्षाकृत कम होंगे। दूसरा कारक है लाभांश का। इसका निफ्टी के नही, बल्कि स्टॉक्स के ऑप्शन सौदों से वास्ता है। लाभांश से किसी शेयर का बाज़ार भाव घट जाता है। इसलिए जब कोई कंपनी लाभांश घोषित करती है तो उसके कॉल ऑप्शन का भाव घट जाता है, जबकि पुट ऑप्शन का भाव बढ़ जाता है।

कल मई दिवस और महाराष्ट्र दिवस है तो बाज़ार बंद है। फिर भी हम उदाहरण के ज़रिए समझने की कोशिश करेंगे कि अप्रैल महीने के ऑप्शन सौदों की एक्सपायरी पर क्या हुआ? उसके बाद सोमवार को जानने की कोशिश करेंगे कि कैसे पता लगाया जा सकता है कि कोई ऑप्शन बाज़ार में सही भाव पर मिल रहा है या नहीं? कहीं उसके भाव में कुछ गड़बड़ या विसंगति तो नहीं?

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