हम प्रकृति से बने हैं। प्रकृति के सामने अक्सर बेबस हो जाते हैं। लेकिन समाज के सामने बेबसी बकवास है। समाज को हमने बनाया है तो इसे ठोंक-पीटकर बराबर दुरुस्त करते रहने का काम भी हमारा है।और भीऔर भी

ज़िदगी तो हम अकेले ही जीते हैं। परिवार इसे आसान व रागात्मक बना देता है। समाज इसे लय व ताल से भर देता है। देश इसे सुरक्षित व उदात्त बना देता है। आखिर कौन हैं वे जो देश को ऐसा बनने नहीं दे रहे?और भीऔर भी

एक हद के बाद हम कुछ नहीं कर सकते। फिर जो भी है, वह दूसरे को ही करना होता है। यह दूसरा प्रकृति भी हो सकती है और इंसान भी। प्रकृति पर हमारा वश नहीं, लेकिन इंसान को समाज ठीक कर सकता है।और भीऔर भी

भय व भ्रमों के चलते हम चीजों को आधा-अधूरा या आड़ा-तिरछा देखते हैं। सच देखने के लिए हमें निर्भय होना पड़ेगा और इसके लिए समाज व परंपरा से मिली सुरक्षा को तोड़कर असुरक्षित हो जाना जरूरी है।और भीऔर भी

कोई कितना ही रोके, चलनेवाले तो अपनी मंजिल और मौका तलाश ही लेते हैं। पानी अपनी डगर बना ही लेता है। हमारा काम बस इतना है कि समाज में जंगल की निरंकुशता न पले, अराजकता न चले।और भीऔर भी

समाज है तो सहयोग है। लेकिन हम पोटली पर हाथ धरे बैठे रहें और कोई दूसरा हमारा फायदा करा देगा, यह सोच ही मूलतः गलत है। इसी का फायदा उठाकर दूसरे हमारी जमापूंजी पर हाथ साफ कर जाते हैं।और भीऔर भी

जब तक जिंदा हूं, देख-सुन सकता हूं, तब तक जहां तक निगाहें, वहां तक फतेह। घर छीन लो, समाज छीन लो। लेकिन प्रकृति को कौन मुझसे छीन सकता है? वो तो जन्म से मेरी है और मरने पर भी रहेगी।और भीऔर भी

प्रकृति ने जो हमें दिया है, उसे मानकर चलना चाहिए। लेकिन समाज ने जो दिया है, वहां हम मानकर चलते हैं तो दूसरे की मौज हो जाती है। खुश रहने के लिए सतत असंतोष जरूरी है। संतोष तो बस छलावा है।और भीऔर भी

मास्टेक लिमिटेड के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और सीईओ भी सुधाकर राम हैं। मैं तो उनके विचारों का मुरीद हूं। आप भी पढेंगे तो कायल हो जाएंगे। करीब डेढ़ साल पहले शिक्षा पर मैंने उनका लेख पढ़ा था जिसमें उन्होंने एक अनुसंधान का जिक्र करते हुए लिखा था कि चार साल की उम्र तक लगभग हर बच्चा जीनियस होता है। फिर मैंने मास्टेक फाउंडेशन की तरफ से चलाई जानेवाली वेबसाइट पर उनके कई लेख पढ़े और इस शख्सऔरऔर भी

जैसी कि उम्मीद थी, बाजार ने कल 5420 पर पहुंचने के बाद यू-टर्न लिया और आज 5490 तक चलता चला गया। हालांकि इसके बाद वो गिरना शुरू हो गया क्योंकि मंदड़िए अपना करतब दिखाने लगे। वे निफ्टी को 5432 तक गिरा ले गए। लेकिन बाजार उसके बाद उठा तो उठता ही जा रहा है। 5500 के ऊपर वो पहुंच चुका है। दिक्कत यह है कि इस वक्त ज्यादातर ट्रेडर व निवेशक के मन में यह बात घरऔरऔर भी