सरकारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति की दर 16 जुलाई को समाप्त सप्ताह में घटकर 20 माह के न्यूनतम स्तर 7.33 फीसदी पर आ गई। लेकिन दूध, फल और अंडा, मांस व मछली जैसी जिन प्रोटीन-युक्त खाद्य वस्तुओं का खास जिक्र दो दिन पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने मौद्रिक की समीक्षा में किया था, उनके दाम अब भी ज्यादा बने हुए हैं। साल भर की समान अवधि की तुलना में उक्त सप्ताह में फलऔरऔर भी

बताते हैं कि रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. दुव्वरि सुब्बाराव ने मुद्रास्फीति के मोर्चे पर ठंडी पड़ी सरकार को झटका देने के लिए ही उम्मीद के विपरीत ब्याज दरों को एकबारगी 0.50 फीसदी बढ़ाया है। पिछले 17 महीनों से थोड़ी-थोड़ी ब्याज वृद्धि का डोज काम न आने से हताश रिजर्व बैंक ने तेज झटका देकर गेंद अब सरकार के पाले में फेंक दी है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को भी सुब्बाराव का इशारा समझ में आ गयाऔरऔर भी

विदेशी बैंकों में जमा देश के काले धन को वापस लाने के लिए सरकार ने 97 देशों से बात की है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि विदेशी बैंकों में अवैध रूप से जमा भारतीय पैसे को वापस लाने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठा रही है। राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में मुखर्जी ने कहा कि काले धन को वापस देश में लाने के लिए सरकार लगातार कोशिशऔरऔर भी

वि‍त्‍त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि‍ मुद्रास्फीति को स्वीकार्य स्तर पर लाना जरूरी है और रि‍जर्व बैंक द्वारा ब्याज दर आधा फीसदी बढ़ाने से मुद्रास्फीति की अपेक्षा को थामने में मदद मिलेगी। उन्होंने मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा की पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 7.50 फीसदी से 8 फीसदी कर मंहगाई में और कमी लाने का ठोस संकेत दि‍या है। वि‍त्‍त मंत्री ने कहा कि ‍इसऔरऔर भी

बढ़ती मुद्रास्फीति को काबू में लाना रिजर्व बैंक की प्राथमिकता है। इसके लिए कड़ी मौद्रिक नीति को अपनाना जरूरी है, भले ही आर्थिक विकास को धक्का पहुंच जाए। रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की पहली त्रैमासिक समीक्षा से ठीक पहले आर्थिक हालात की स्थिति बयां करते हुए यह बात कही है। इसलिए माना जा रहा है कि इस बार भी वह नीतिगत दरों (रेपो व रिवर्स) में 0.25 फीसदी वृद्धि कर सकता है। अभी रेपो दर 7.50औरऔर भी

जब देश में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर हो तो खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आना स्वाभाविक है। इसी को दर्शाते हुए खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 9 जुलाई को समाप्त सप्ताह में घटकर 7.58 फीसदी पर आ गई है। इससे पिछले सप्ताह यह 8.31 फीसदी और साल भर पहले इसी दरम्यान 19.52 फीसदी के ऊंचे स्तर पर थी। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दालों के दाम आलोच्य सप्ताह केऔरऔर भी

रिजर्व बैंक ने इस साल की मौद्रिक नीति में कहा था कि दूसरी छमाही यानी सितंबर 2011 के बाद से मुद्रास्फीति में कमी आनी शुरू हो जाएगी। लेकिन अब वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी कह रहे हैं कि यह दिसंबर के अंत तक ऊंची ही बनी रहेगी। वित्त मंत्री ने चुनिंदा अखबारों के संवाददाताओं को भेजे गए बयान में कहा है कि मुद्रास्फीति के ज्यादा रहने से निजी निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उनका कहना है,औरऔर भी

भंडारण सुविधाओं की तंगी से तंग आकर सरकार ने चार साल पहले गेहूं निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध उठा लिया है। यह फैसला करीब हफ्ते भर पहले 11 जुलाई को मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह की बैठक में लिया जा चुका है। लेकिन कृषि मंत्री शरद पवार ने दिल्ली में यह जानकारी शनिवार को दी। जब उनसे मीडिया ने पूछा कि क्या गेहूं निर्यात पर बैन हटाया जा चुका है तो उनका जवाब था, “हां, अब कोईऔरऔर भी

केंद्र सरकार को कुल टैक्स का 56% हिस्सा अब आयकर या कॉरपोरेट करों के रूप में प्रत्यक्ष करों से मिंलता है। बाकी 44% टैक्स ही एक्साइज व कस्टम जैसे परोक्ष करों से मिलता है। नब्बे के दशक तक स्थिति यह थी कि सरकार को मात्र 12% प्रत्यक्ष करों से मिलते थे और 88% अप्रत्यक्ष या परोक्ष करों से। वित्त वर्ष 2010-11 में केंद्र सरकार का कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 4.46 लाख करोड़ रुपए रहा है, जबकि परोक्षऔरऔर भी