मेक्सिको के कानकुन शहर में चल रहे जलवायु सम्मेलन में भारत और चीन सहित कई प्रमुख विकासशील देशों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे कार्बन उत्सर्जन में कटौती के संबंध में कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते को स्वीकार कर लें। लेकिन भारतीय पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसे किसी समझौते को तत्काल मानने को तैयार नहीं है। इस सम्मेलन में अमेरिका, भारत और चीन कानूनी तौर पर बाध्यकारी समझौते को स्वीकार करनेऔरऔर भी

फ्रांसीसी कंपनियां साल 2012 तक भारत में 10 अरब यूरो (13.37 अरब डॉलर) का निवेश करने को प्रतिबद्ध हैं। फ्रांस की वित्त मंत्री क्रिस्टीन लगार्ड ने सोमवार को उद्योग संगठन फिक्की द्वारा आयोजित भारत-फ्रांस व्यापार मंच की बैठक में कहा, ‘‘यह सिर्फ आंकड़ा (10 अरब यूरो) नहीं है। यह फ्रांसीसी कंपनियों की 2008 से 2012 के बीच भारत में निवेश को लेकर प्रतिबद्धता है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि हर बिजनेस ‘आपसी लाभ’ के सिद्धांत पर कामऔरऔर भी

मैं दस साल के नजरिए से अर्थव्यवस्था और बाजार व कॉरपोरेट क्षेत्र की स्थिति को देखता हूं। इसलिए महसूस कर सकता हूं कि क्या हो रहा है। लेकिन निवेशक तो दस घंटे की बात भी नहीं देख पाते। इसलिए बाजार के खिलाड़ियों के हाथ में अपनी गरदन पकड़ा देते हैं। मैं भी एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों को उनका पोर्टफोलियो बनाने-संभालने की सलाह देता हूं। लेकिन उन्हें नुकसान नहीं हुआ क्योंकि वे कभी भी कर्ज लेकर बाजारऔरऔर भी

भारत जितना निर्यात करता है, उससे कहीं ज्यादा आयात करता है। केवल माल के व्यापार की बात करें तो विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2009 में हमारा व्यापार घाटा (आयात व निर्यात का अंतर) 87 अरब डॉलर था। दुनिया में केवल ब्रिटेन (129 अरब डॉलर) और अमेरिका (549 अरब डॉलर) हम से ऊपर थे। माल व सेवा को मिला दें तो शुद्ध आयात में हम केवल अमेरिका से पीछे हैं। अमेरिका का आंकड़ा 699 अरबऔरऔर भी

1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत में सत्ता की बागडोर अपने हाथों में लेते ही ब्रिटिश सरकार ने सार्वजनिक खातों के लेखा-परीक्षण की अहमियत समझ ली थी। उसने 16 नवंबर 1860 को भारत का पहला महा लेखा-परीक्षक एडमंड ड्रुमंड को बनाया था। ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद भारत 1950 में गणराज्‍य बन गया और महा लेखा-परीक्षक का पद जारी रहा हालांकि इसका नाम बदलकर भारत का नियंत्रक एवं महा लेखा-परीक्षक (सीएजी या कैग) कर दियाऔरऔर भी

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत में लोगों के पास 18,000 टन सोना पड़ा है जो दुनिया में उपलब्ध सोने का कम से कम 11% है। इसका औसत निकालें तो हर भारतीय के पास करीब 15 ग्राम सोना है। भारतीयों के पास पड़े सोने की कीमत लगभग 800 अरब डॉलर निकलती है। साल 2009 में भारत में सोने की मांग 97,400 करोड़ रुपए की थी जो सारी दुनिया की मांग का 15% बैठती है। हमारी बचत दरऔरऔर भी

दुनिया के 20 प्रमुख देशों के समूह जी-20 की बैठक जब शुरू हो रही हो, अमेरिका व यूरोप समेत तमाम विकसित देशों की अर्थव्यवस्था चरमराई हुई हों, प्रमुख मुद्राओं में युद्ध की स्थिति आ गई हो, तमाम केंद्रीय बैंक व बड़े निवेशक सुरक्षा के लिए सोने की तरफ भाग रहे हों, ठीक उस वक्त विश्व बैंक भी सोने की अहमियत बताने लगे तो किसी का भी चौंकना स्वाभाविक है। लेकिन विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जॉयलिक नेऔरऔर भी

निजी चीनी मिलों की लॉबी सरकार से निर्यात की इजाजत लेने की मुहिम में जुट गई है। बुधवार को निजी चीनी मिलों के संगठन इस्मा (इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन) के अध्यक्ष विवेक सरावगी और महानिदेशक अविनाश वर्मा ने अलग-अलग समाचार एजेंसियों के जरिए दावा किया कि भारत आराम से इस साल 20 लाख टन चीनी का निर्यात कर सकता है और ऐसा न करने से दुनिया में चीनी के दामों में आग लगी रहेगी। इस्मा के अध्यक्षऔरऔर भी

मशहूर अंतरराष्ट्रीय पत्रिका फोर्ब्स ने साल 2010 के लिए दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 68 जानी-मानी हस्तियों को शामिल किया गया है। चौंकानेवाली बात यह है कि इसमें चीन के राष्ट्रपति हु जिनताओ को दुनिया की सबसे ताकतवर हस्ती माना गया है। जिनताओ सूची में पहले नंबर पर हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को दूसरे नंबर पर रखा गया है। यह आश्चर्यजनक बात है क्योंकिऔरऔर भी