साल 2012 में जनवरी से लेकर मार्च तक भारतीय शेयर बाजार में धनात्मक रहा एफआईआई निवेश अप्रैल में पहली बार ऋणात्मक हो गया है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के ताजा आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में एफआईआई ने बाजार से 1657.19 करोड़ रुपए निकाले हैं, जबकि एफआईआई ने जनवरी में बाजार में शुद्ध रूप से 10,357.50 करोड़ रुपए, फरवरी में 25,212 करोड़ रुपए और मार्च में 8381.30 करोड़ रुपए डाले थे। इसमें प्राइमरी बाजार और ऋण प्रपत्रों का निवेशऔरऔर भी

हमने इसी जगह करीब सवा साल पहले 13 जनवरी 2011 को अमारा राजा बैटरीज में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 185 रुपए पर चल रहा था। कल, 23 अप्रैल 2012 को 4.06 फीसदी गिरने के बावजूद वो 302.20 रुपए पर बंद हुआ है। इस बीच यह बहुत नीचे गया तो 30 दिसंबर 2011 को 179 रुपए तक, जबकि 19 अप्रैल 2012 को उसने 324 रुपए का शिखर हासिल किया है। हालांकि, इसमें अब भीऔरऔर भी

बाजार इस हफ्ते दायरे में बंधकर चलेगा। पहले निफ्टी 5230 से 5340 का दायरा तोड़े, तभी आगे की दिशा साफ हो सकती है। यह कहना है जानकारों का। लेकिन जीवन की तरह शेयर बाजार भी किसी फिल्म या सीरियल की स्क्रिप्ट नहीं है कि कम से कम लिखनेवाले को आगे का पता हो। यहां तो हर कोई, बड़े से बड़ा दिग्गज भी अंदाज ही लगाता है। नहीं लगा तो तीर, लग गया तो तुक्का। बाजार में हरऔरऔर भी

इस बार के बजट में घोषित गार (जनरल एंटी एवॉयडेंस रूल) की ऐसी मार दुनिया की सबसे पुरानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानीमानी, टूर व ट्रैवेल कंपनी कॉक्स एंड किंग्स पर पड़ी है कि उसका शेयर हर दिन दबता ही चला जा रहा है। कल, 19 अप्रैल 2012 को उसने 139 रुपए पर 52 हफ्ते की नई तलहटी बना डाली। हो सकता है कि आज फिर नई तलहटी बन जाए। यह बजट आने के एक दिन पहले 15औरऔर भी

कैस्ट्रॉल इंडिया का शेयर इस साल जनवरी से लेकर कल तक 26.76 फीसदी बढ़ चुका है। इसी दौरान सेंसेक्स 12.08 फीसदी बढ़ा है। लेकिन कैस्ट्रॉल शायद बाजार से आगे रहने का यह क्रम आगे जारी न रख सके। कारण, तीन दिन पहले सोमवार को घोषित मार्च तिमाही के उसके नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। इस दौरान जहां उसकी बिक्री 4.13 फीसदी बढ़कर 781.7 करोड़ रुपए पर पहुंची है, वहीं शुद्ध लाभ 10.03 फीसदी घटकर 122.9 करोड़ रुपएऔरऔर भी

अजीब विरोधाभासों से भरा देश है अपना। यहां की 60 फीसदी से ज्यादा श्रमशक्ति कृषि पर निर्भर है। लेकिन खेतों में काम करने के लिए मजदूर नहीं मिलते। मिलें भी तो कैसे? जहां 80 फीसदी से ज्यादा किसानों के पास ढाई एकड़ से कम जमीन हो और देश में जोतों का औसत आकार दस साल पहले 2001-02 में ही 3.5 एकड़ पर आ चुका हो, वहां मजदूर खेती-किसानी में काम करें भी तो किसके यहां। यहां तोऔरऔर भी

बहुत साफ-सी बात है कि मूल्य सामाजिक लेनदेन का पैमाना है। मूल्य किसी चीज को उतना ही मिलता है, जितना लोग उसे भाव देते हैं। और, लंबे समय तक भाव पाने के लिए उस चीज की अपनी औकात और दमखम होना जरूरी है। हम लंबे समय में फलने-फूलनेवाली ऐसी ही सामर्थ्यवान और संभावनामय कंपनियां आपके लिए छांटकर लाने की कोशिश करते हैं। साथ ही आपसे अपेक्षा भी करते हैं कि निवेश करने से पहले खुद एक बारऔरऔर भी

बीते शुक्रवार को इनफोसिस ने जो किया, वही इस शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा किए जाने का अंदेशा है। इनफोसिस को पहले लगी 12.6 फीसदी चोट के ऊपर करीब 1.5 फीसदी का फटका आज और लग गया। शेयर 25 अगस्त 2011 को हासिल 2169 रुपए के न्यूनतम स्तर से थोड़ा ही दूर, 2339.35 पर बंद हुआ। अब बाजार में चर्चा चल निकली है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का लाभ चौथी तिमाही में उम्मीद से लगभग 7 फीसदी कमऔरऔर भी

जुआरी इंडस्ट्रीज 1967 में बनी के के बिड़ला समूह की कंपनी है। वो समूह जो हिंदुस्तान टाइम्स व मिंट जैसे अखबार भी निकालता है। इसके बारे में हमने सबसे पहले इसी जगह 6 जनवरी 2011 को लिखा था। तब इसका दस रुपए का शेयर 690 रुपए के आसपास चल रहा था। करीब तीन महीने में यह लगभग 6 फीसदी बढ़कर 15 अप्रैल 2011 को 730 रुपए के शिखर पर पहुंच गया। लेकिन इस समय दस रुपए अंकितऔरऔर भी

अकेले इनफोसिस में इतना दम है कि वह पूरे बाजार को दबाकर बैठा सकता है। शुक्रवार को यह बात साबित हो गई। सेंसेक्स 238.11 अंक गिर गया, जिसमें से 201.82 अंक का योगदान अकेले इनफोसिस का था। वह भी तब, जब सेंसेक्स में इनफोसिस का योगदान 8.18 फीसदी है। सेंसेक्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज का योगदान सबसे ज्यादा 9.44 फीसदी और आईटीसी का उससे कम 9.02 फीसदी है। इस तरह सेंसेक्स में वजन के मामले में इनफोसिस तीससेऔरऔर भी