रेनेसां ज्वेलरी का आईपीओ नवंबर 2007 में आया था और उसके शेयर 150 रुपए मूल्य पर जारी किए गए थे। 12 दिसंबर 2007 को लिस्टिंग के दिन यह 190 रुपए तक चला गया। लेकिन इस समय इसका भाव 73 रुपए चल रहा है। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 95.40 रुपए (6 मई 2010) और न्यूनतम स्तर 39.60 रुपए (5 नवंबर 2009) रहा है। कंपनी अभी तक अपने लगभग सारे जेवरात अमेरिका को निर्यात करती रही हैऔरऔर भी

आरती ड्रग्स (बीएसई कोड – 524348, एसएनई कोड – AARTIDRUGS) का शेयर अपनी बुक वैल्यू के आसपास चल रहा है। उसकी बुक वैल्यू 121.46 रुपए है, जबकि कल वह 137.40 रुपए पर बंद हुआ है। हालांकि पंद्रह दिन पहले ही 30 अगस्त को वह 52 हफ्ते की चोटी 153.65 रुपए पर पहुंचा है। फिर भी उसे सस्ता ही माना जाएगा क्योंकि उसका पी/ई अनुपात 6.72 है, जबकि इसी उद्योग की अन्य कंपनी सिप्ला का मौजूदा पी/ई अनुपातऔरऔर भी

बाजार का बहुत तेजी से बढ़ना अच्छा नहीं है तो पंटर भाईलोग शॉर्ट सेलिंग करने लगे। पहले कहा जा रहा था कि बहुत धीमा होना बाजार के लिए बहुत बुरा है और इसलिए शॉर्ट सेलिंग हो रही है। अरे भाई मेरे! आप लोग बाजार को कब समझेंगे? निफ्टी 5800 पर है और सारे के सारे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) सेंसेक्स में शामिल स्टॉक खरीदने में जुटे हैं क्योंकि ऐसा करना उनकी मजबूरी है। मैं तो कहूंगा किऔरऔर भी

नितिन फायर प्रोटेक्शन इंडस्ट्रीज (बीएसई कोड – 532854, एनएसई कोड – NITINFIRE) तीन दशक पुरानी कंपनी है। तमाम अग्निशामक उपकरणों के साथ ही सीएनजी सिलेंडर भी बनाती है। राजस्थान के एक ऑयल ब्लॉक से कच्चा तेल निकालने के लिए बने कंसोर्टियम में भी 10 फीसदी हिस्सेदारी रखती है। उसकी एक सब्सिडियरी ने दुबई की एक फायर प्रोटेक्शन कंपनी में 40 फीसदी हिस्सेदारी ले रखी है। चालू वित्त वर्ष 2010-11 में जून की तिमाही में उसकी आय 67.3औरऔर भी

आप जानते ही होंगे कि ‘सबसे तेज’ चैनल आजतक को चलानेवाली कंपनी का नाम है टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड। दिसंबर 2003 में इसका आईपीओ 95 रुपए के मूल्य पर आया था और उसने 36.26 गुना ओवर-सब्सक्राइब होने का रिकॉर्ड बनाया था। कंपनी ने 5 रुपए अंकित मूल्य के 145 लाख शेयर जारी करके 137.75 करोड़ रुपए जुटाए थे। तब से लेकर आज तक आजतक हफ्ते-दो हफ्ते इधर-उधर होने के अलावा लगातार देश का नंबर-1 न्यूज चैनल बनाऔरऔर भी

प्रेसिजन पाइप्स एंड प्रोफाल्स कंपनी लिमिटेड पाइप नहीं बनाती। वह कारों में इस्तेमाल होनेवाले सीलिंग सिस्टम व मोल्डिंग, रेफ्रिजरेशन में लगनेवाले तमाम पीवीसी पार्ट और निर्यात बाजार के लिए भांति-भंति की मोल्डिंग बनाती है। हां, उसके समूह की अन्य कंपनी जरूर पीवीसी पाइप बनाती है। 1978 में बनी कंपनी है। जापान की तोकाई कोग्यो कंपनी से तकनीक का करार कर रखा है। मारुति, होंडा, फिएट व जनरल मोटर्स से लेकर गोदरेज, इलेक्ट्रोलक्स, कैरियर, वीडियोकॉन, वोल्टास और ब्लूऔरऔर भी

इस साल जनवरी में जिसने भी जयप्रकाश एसोसिएट्स का शेयर 160-165 रुपए के भाव पर खरीदा होगा, वह इस समय वाकई दुखी होगा। उसका दुख स्वाभाविक है कि क्योंकि यह शेयर 1 सितंबर 2010 को अपने 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 107.65 रुपए पर आ चुका है। इस तरह यह शेयर अब तक 35 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है, जबकि इसी दौरान बीएसई सेंसेक्स 4.5 फीसदी बढ़ा है। जिसने यह शेयर पिछले साल अक्टूबर में 180औरऔर भी

सेंसेक्स 18,600 पर पहुंच चुका है और एफआईआई बाजार में पैसा लगाए जा रहे हैं। यह उनका दोमुंहापन नहीं तो और क्या है। बिजनेस चैनलों पर वे कहते हैं कि 18,000 अंक पर बाजार महंगा है और दूसरी तरफ वे खुद खरीद किए जा रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि वे सेंसेक्स के 26,000 होने तक भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसकी तीन वजहें हैं। एक, भारत में वो सब कुछ है जिसके दम परऔरऔर भी

किसी शेयर के बढ़ने या गिरने से निवेशक पर क्या फर्क पड़ता है? क्या टेक्निकल एनालिस्टों के चार्ट चलते हैं या फंडामेंटल ही शेयर का दमखम तय करते हैं? मेरी राय में आखिरकार फंडामेंटल ही काम करते हैं और हकीकत यही है कि बाजार से चार्ट बनते हैं, न कि चार्ज बाजार को बनाते हैं। हमने हीरो होंडा में बिक्री की पहली कॉल 1926 रुपए पर दी और यह स्टॉक अब गिरते-गिरते 1700 रुपए पर आ गयाऔरऔर भी

जन्माष्टमी पर ध्यान बालकृष्ण पर न जाता तो आश्चर्य होता। सो, पहले से ज्यादा लोगों ने बालकृष्ण इंडस्ट्रीज के शेयरों की खरीद की और यह शेयर बीएसई में (कोड – 502355) 6.27 फीसदी बढ़कर 710.60 रुपए और एनएसई में (कोड – BALKRISIND) 6.35 फीसदी बढ़कर 713.90 रुपए पर बंद हुआ। ठहरे हुए बाजार में किसी भी शेयर का एक दिन में 6 फीसदी से ज्यादा बढ़ जाना मायने रखता है। लेकिन बालकृष्ण इंडस्ट्रीज पर ध्यान दें तोऔरऔर भी