गुजरात में भी विधायक काटते सेवा का मेवा, 5 साल में 231% बढ़ी संपत्ति
देश की राजनीति में सेवा भाव कब का खत्म हो चुका है। वो विशुद्ध रूप से धंधा बन चुकी है, वह भी जनधन की लूट का। इसे एक बार फिर साबित किया है गुजरात विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों ने। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की तरफ से सजाए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राज्य की नई विधानसभा में 99 विधायक ऐसे हैं जो 2007 में भी विधायक थे। इनकी औसत संपत्ति बीते पांच सालों में 2.20 करोड़औरऔर भी
सांसद मस्त हैं और आयुध कारखानों में जारी है जनधन की लूट
जुमे का दिन है, शुक्रवार है। लोकसभा ने सांसदों के वेतन को तीन गुना बढ़ाने और प्रमुख भत्तों को दोगुना करने का विधेयक पास कर दिया। सांसद गदगद हैं, मस्त हैं। लेकिन पिछले शुक्रवार को जब उन्होंने इसके लिए संसद में गदर मचा रखी थी, उसी दिन भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी, कैग) ने उनके ध्यानार्थ एक रिपोर्ट पेश की थी कि कैसे देश की ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों में शीर्ष अधिकारियों की मिलीभगत से जनधन कीऔरऔर भी

