समय और उसके साथ निरतंर विकास। जीवन के तमाम क्षेत्रों की तरह निवेश में भी इन्हीं दो पक्षों का ध्यान रखना पड़ता है। चाहने से चंद दिन में पौधा पेड़ नहीं बनता। यह भी सही है कि बोया पेड़ बबूत का तो आम कहां से होए। कंपनियां अच्छी चुनो। फिर देखो चक्रवृद्धि दर का कमाल। कंपनी के साथ आपका धन कुलांचे मारता बढ़ेगा। दीर्घकालिक निवेश की सेवा तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी, जिसे बढ़ना है आगे…औरऔर भी

जो सहज हो, वो सही हो, यह जरूरी नहीं। मसलन, इस समय सहज सोच यही है कि खरीदो। हम नहीं समझते कि इससे पीछे सारा खेल लालच का है। आज या कभी भी चढ़े हुए बाज़ार में सही चीज़ होनी चाहिए कि बेचकर पिछला घाटा बराबर कर लो; जो शेयर लक्ष्य पर पहुंच गए हों, उनसे धन निकालकर सुरक्षित माध्यमों में लगा दिया जाए। सहज और सही के समीकरण के बीच तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

लालच के भाव से शेयर बाज़ार में कतई पैसा न लगाएं। नहीं तो घात लगाए शिकारी कभी भी आपका शिकार कर सकते हैं। निवेश का मूल मकसद है कि हम अपनी बचत को महंगाई/मुद्रास्फीति की मार से बचाएं और लंबे समय में दौलत बना सकें। इसलिए मोटामोटी नियम यह है कि जब शेयर बाज़ार सस्ता हो तो ज्यादा निवेश उसमें करें। चढ़ा हुआ हो तो ज्यादा धन एफडी-बांड वगैरह में लगाएं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

समाज के आगे बढ़ने के साथ ज्ञान से लेकर समृद्धि तक का लोकतंत्रीकरण होता गया। यह किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि ज़रूरत के चलते हुआ। हालांकि अब भी विशेषाधिकार बचे हुए हैं। लेकिन अधिकारों और समृद्धि का विस्तार आज की जरूरत बन गया है। जो कंपनियां बढ़ना चाहती हैं, वे रिस्क पूंजी के लिए अवाम के बीच आती हैं। आम लोगो को भी इस निवेश का फायदा मिलता है। आज तथास्तु में पेश है एक संकोची कंपनी…औरऔर भी

इस देश में अजब-गजब हाल है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे पूरे बैंकिंग क्षेत्र ने सबसे बड़ी कंपनियों को जितना ऋण दे रखा है वो लगभग उनकी नेटवर्थ के बराबर है। दूसरे शब्दों में इन शीर्षस्थ कंपनियों ने खुदा-न-खास्ता किसी वजह से अपने ऋण न चुकाए तो हमारी बैंकिंग का भट्ठा बैठ सकता है। इसलिए बड़ों के नाम से ही डर लगने लगता है। कुछ ऐसी ही सोच-विचार के बीच आज तथास्तु में एक स्मॉल-कैप कंपनी…औरऔर भी

शेयरों में निवेश से जो लोग पैसा बनाते हैं और जो नहीं बना पाते, उनमें सबसे बड़ा अंतर यह नहीं कि पहला हर वक्त सही शेयरों को चुनता है और दूसरा नहीं। अंतर पड़ता है इससे कि आप अपना निवेश विभिन्न स्तर की कंपनियों में कैसे बांटते हैं। समयसिद्ध नियम है कि निवेशयोग्य धन का 50-60% लार्जकैप, 25-30% मिडकैप और 5-10% स्मॉलकैप स्टॉक्स में लगाएं तो घाटे में कभी नहीं रहेंगे। आज तथास्तु में एक स्मॉलकैप स्टॉक…औरऔर भी

थोड़े समय तक शेयर बाज़ार सनकी जैसा अतार्किक बर्ताव कर सकता है और शेयरों के भाव असली मूल्य से दूर पड़े रह सकते हैं। पर, लंबे समय में भाव हमेशा सच्चे मूल्य पर आ जाते हैं। यह बात बेंजामिन ग्राहम ने अस्सी साल पहले 1934 में अपनी किताब ‘सिक्यूरिटी एनालिसिस’ में लिखी थी। वॉरेन बफेट ग्राहम को अपना गुरु मानते हैं। भाव सबको दिखते हैं, असली मूल्य को पकड़ना चुनौती है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अच्छी चीज़ों के पीछे दुनिया भागती है। बस, पता नहीं होता कि अच्छी चीजें हैं कौन-सी। पता भी होता है तो भरोसा नहीं होता कि क्या वो चीज़ वाकई अच्छी है। एक छोटी-सी आईटी कंपनी है। टेलिकॉम व हेल्थकेयर उद्योग को सॉफ्टवेयर बेचती है। आपको यकीन नहीं आएगा कि बुधवार को उसके बारे में सुगबुगाहट शुरू हुई और अगले दो दिनों में ही उसका शेयर 22.82% बढ़ चुका है। तथास्तु में इसी कंपनी को पकड़ने की सलाह…औरऔर भी

नामी ब्रोकरेज फर्म है। ईनाम भी बटोरे हैं। पैसे व बुद्धिमत्ता की बात करती है। उसने 26 दिसंबर को नए साल के लिए दस कंपनियां पेश की। अडानी पोर्ट, कैयर्न, एस्कोर्ट्स, क्रॉम्प्टन, एस्सेल प्रोपैक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पीएनबी, सेसा स्टरलाइट, टोरेंट फार्मा व विप्रो। इनमें से आठ में घाटा है। हमने तब से दो कंपनियां बताईं ल्यूपिन और टेक सोल्यूशंस। दोनों फायदे में हैं। यह है किसी ब्रोकर व निष्पक्ष सलाह का फर्क। अब आज की कंपनी…औरऔर भी

तथास्तु की यह सेवा जब पेड नहीं थी, तब भी हम यहां अच्छी व संभावनामय कंपनियों में निवेश की सलाह देते रहे हैं। ठीक दो साल पहले हमने यहां इनफोसिस में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 2865 रुपए पर था। अभी वो 3575 की ऊंचाई पर है। दो साल में 33% से ज्यादा बढ़त। यह है अच्छी कंपनियों में सही वक्त पर निवेश का कमाल। आज इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से ही जुड़ी एक स्मॉलकैप कंपनी…औरऔर भी