यह सेबी और स्टॉक एक्सचेंजों की नई व्यवस्था की पहली परीक्षा थी और दोनों ही इसमें फेल हो गए। इससे सरकार भी बड़ी किरकिरी हुई क्योंकि गुरुवार देर रात तक साफ नहीं हो पाया कि ओएनजीसी में सरकार के 5 फीसदी शेयर बेचने की पेशकश पूरी हुई है या नहीं। पहले विनिवेश विभाग के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ प्रधान ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि 42,77,75,504 शेयरों की नीलामी पूरी संपन्न हो गई है। लेकिन सिस्टमऔरऔर भी

एक तरफ किंगफिशर एयरलाइंस अपना वजूद बचाने के चक्कर में लगी हुई है, सरकार ने उसे कोई भी आर्थिक पैकेज देने से इनकार कर दिया है, उसकी उड़ानें रद्द होने का सिलसिला जारी है, दूसरी तरफ कुछ लोग आम निवेशकों को इसके शेयर खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह स्टॉक जल्दी ही ‘बाउंस-बैक’ करेगा। निवेशकों को ऐसे लोगों की बातों में कतई नहीं आना चाहिए क्योंकि वे लोग वैसे घाघ उस्तादों केऔरऔर भी

सोमवार को महाशिवरात्रि की छुट्टी। बाजार मंगलवार को खुलेगा। डेरिवेटिव सौदों का सेटलमेंट इसके दो दिन बाद गुरुवार 23 फरवरी को पूरा होगा। इस तरह रोलओवर के लिए मंगलवार को मिलाकर तीन दिन ही बचे हैं। सिद्धांत कहता है कि बीते हफ्ते जिस तरह बाजार 3 फीसदी बढ़ा है, उसमें अब करेक्शन आना चाहिए। लेकिन भारतीय बाजार का व्यवहार कहता है कि गुरुवार तक ऐसा होने के आसार नहीं है। कुछ जानकारों का कहना है कि शुक्रवारऔरऔर भी

दलित के नाम पर आप क्यों सत्ता पाना चाहती हैं बहनजी? जनता के नाम पर आप सरकार में क्यों आना चाहते हैं नेताजी? जनता पर यूं मुफ्त कृपा बरसाने के पीछे की असली नीयत तो खोलिए जनाब!और भीऔर भी

जनता के धन की लूट भ्रष्टाचार है और जनता के धन से सरकार की तिजोरी भरती है जिसे जन-प्रतिनिधि ही लूटते हैं। ऐसे में ये प्रतिनिधि कैसे जनता के सच्चे प्रतिनिधि और ये लूटतंत्र लोकतंत्र कैसे हो सकता है?और भीऔर भी

सरकार ने खुद को लकवा का शिकार कहने को सरासर गलत बताया है। उसके बचाव का मोर्चा संभाला है गृह मंत्री पी चिदम्‍बरम और संसदीय कार्य व जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल ने। उन्हीं के शब्दों में, “यह कहना कि सरकार को लकवे ने जकड़ रखा है, पूरी तरह से ग़लत, अस्‍वीकार्य और बेतुका तर्क है।” इन मंत्रीगणों से गुरुवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन विधेयकों के बारे में विस्तार सेऔरऔर भी

दुनिया में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर होते रुपए के चलते सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) की अंडर-रिकवरी चालू वित्त वर्ष 2011-12 में 1.40 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है। यह आकलन है देश की प्रमुख रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिसर्च शाखा का। अंडर-रिकवरी का मतलब उस नुकसान से है जो ओएमसी को डीजल, रसोई गैस व कैरोसिन को सरकार निर्धारित दामों पर बेचने के चलते उठाना पड़ता है। उनका लागतऔरऔर भी

सरकार ने राष्‍ट्रीय भूमि‍ रि‍कॉर्ड आधुनि‍कीरण कार्यक्रम (एनएलआरएमपी) को शुरू करने के तीन साल बाद इसके अंतर्गत तीन केंद्र बनाने को मंजूरी दे दी है। ये केंद्र पश्‍चि‍म बंगाल के सालबोनी, संघशासित क्षेत्र पुडुचेरी और उड़ीसा के बेरहामपुर में खोले जाएंगे। अभी चल रहे वित्त वर्ष 2011-12 में हरेक केंद्र के लि‍ए 196 लाख रुपए मंजूर कि‍ए गए हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय का दावा है कि मंजूरी मि‍लने के दि‍न से साल भर के अंदर ये केंद्रऔरऔर भी

विश्व अर्थव्यवस्था प्राकृतिक आपदा या आतंकवादी हमले से होनेवाली व्यापक तबाही ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते तक झेल सकती है क्योंकि सरकारों या उद्योग-धंधों ने ऐसी अनहोनी के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर रखी है। यह आकलन है दुनिया के एक प्रतिष्ठित चिंतन केंद्र, चैथम हाउस का। चैथम हाउस लंदन का एक संस्थान है जो अंतरराष्ट्रीय मसलों से संबंधित नीतियों पर नजर रखता है। दुनिया भर के नीति-नियामकों के बीच इसकी बड़ी साख है। चैथम हाउस नेऔरऔर भी

ये सरकार भी बड़ी जालिम चीज़ है! कहने को सबकी संरक्षक है, पालनहार है। मगर जब कंगाली में फंसते हो तो पूछती तक नहीं और जैसे ही आप कहीं से कमाई कर लेते हो, फौरन टैक्स वसूलने आ जाती है।और भीऔर भी