देश की रक्षा कौन करेगा? हम करेंगे, हम करेंगे, हम करेंगे! गांवो, कस्बों और शहरों के हिंदी माध्यम स्कूलों में बच्चे यह नारा लगाकर ही बड़े होते हैं। कहीं और नौकरी नहीं मिली और सेना में भर्ती हो गए तो सीमा पर हंसते-हंसते शहीद हो जाते हैं। मां-बाप, बीवी-बच्चे बिखर जाते हैं, बिलखते जरूर हैं। पर घर-परिवार, नाते-रिश्तेदार उन पर गर्व करते हैं। इलाके में उनके नाम पर सड़क और विद्यालय बन जाते हैं। लेकिन भावना सेऔरऔर भी

अमेरिका ने अपने रक्षा बजट में अगले दस सालों के दौरान 488 अरब डॉलर की कटौती की घोषणा की है। साथ ही अगले पांच साल में थल सेना में करीब 70,000 और मरीन कोर में 22,000 सैनिक घटाए जाएंगे। इसके अलावा युद्धपोतों को भी रिटायर किया जाएगा। 9 सितंबर 2001 के हमले के बाद अमेरिका के रुख में आया यह ऐतिहासिक बदलाव है। अमेरिकी रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा ने वॉशिंगटन में गुरुवार को रक्षा बजट में कटौतीऔरऔर भी

सरकार ने सालाना रक्षा आयात बिल को 40,000 करोड़ रुपए से घटाकर 20,000 करोड़ रुपए करने की योजना बनाई है। यह कहना है कि रक्षा राज्यमंत्री एम.एम. पल्लम राजू का। उन्होंने गुरुवार को हैदराबाद में निजी क्षेत्र की कंपनी न्यूकॉन इंडस्ट्रीज की डिफेंस व एयरोस्पेस सिस्टम एकीकरण यूनिट का उद्घाटन करते हुए कहा कि आयात घटाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। इस समय रक्षा सामग्रियों के लिए नियत रकम का करीब 65 फीसदी आयातऔरऔर भी