उधर डॉलर का जनक अमेरिकी क्रेद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व घोषणा करता है कि वो जनवरी से सिस्टम में 85 अरब के बजाय 75 अरब डॉलर के ही नोट डालेगा, इधर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयरों की खरीद घटाने के बजाय बढ़ा देते हैं। बुधवार की घोषणा के अगले दिन गुरुवार को एफआईआई ने हमारे कैश सेगमेंट में 2264.11 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद की। कल शुक्रवार को भी उन्होंने शुद्ध रूप से 990.19 करोड़ रुपए केऔरऔर भी

विश्व स्तर पर मशहूर निवेश गुरु मार्क मोबियस का कहना है कि इस साल 2011 में भी भारतीय शेयर बाजार निवेशकों को लगभग 15 फीसदी रिटर्न देगा। उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक समारोह में कहा कि भारतीय शेयर बाजार साल 2011 में पिछले साल से बेहतर नहीं तो उतना रिटर्न दे ही देंगे। मोबियस टेम्प्लेटन एमर्जिंग मार्केट्स ग्रुप के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं। पिछले साल 2010 में बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 15 फीसदी बढ़तऔरऔर भी

तमाम अखबार, पत्र-पत्रिकाएं और बिजनेस चैनल भारतीय शेयर बाजार को लगी 1200 अंकों से ज्यादा की चपत की वजह वैश्विक कारकों में तलाश रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि असली बात यह नहीं है। लेहमान ब्रदर्स के डूबने का मसला हो या उसके बाद के तमाम वैश्विक कारक हों, उन्होंने यकीकन कमजोर बाजारों को चोट पहुंचाई, लेकिन इनके बीच भारतीय बाजार ने पुरानी ऊंचाई फिर से हासिल कर ली और यही नहीं, दूसरी अर्थव्यवस्थाओं ने हमाराऔरऔर भी

अब मैं अपने मुंह से क्या कहूं? सारी दुनिया समझ गई है कि जब ग्रीस को ऋण संकट में मदद देनी की बात यूरोपीय संघ ने मंजूर कर ली थी, तब बाजार में इस तरह की गिरावट का कोई तुक नहीं था। मैंने आपको बता दिया था कि रविवार को ऐसा हो जाएगा। मैंने यह भी कहा था कि यूरोपीय संघ के पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है। चाहे कुछ भी हो जाए, यूरो डूब नहींऔरऔर भी