लगातार दो हफ्ते की गिरावट के बाद यह हफ्ता थोड़ा तेज़ी का हो सकता है। निफ्टी शुक्रवार को 5651 पर बंद हुआ था। जानकार बताते हैं कि अगर निफ्टी आज 5690 के ऊपर बंद होता है तो वह जल्दी ही 5825 की मंजिल तक पहुंच सकता है। वैसे, इस हफ्ते बुधवार को होली और शुक्रवार को गुड फ्राइडे के चलते बाज़ार बंद है। इसलिए केवल तीन दिन ही ट्रेडिंग होनी है। इसमें भी गुरुवार को इस महीनेऔरऔर भी

सुप्रीम पेट्रोकेम देश में पॉलिस्टिरीन के धंधे की सबसे बड़ी कंपनी है। घरेलू बाज़ार में उसकी हिस्सेदारी आधे से ज्यादा है। वो पॉलिस्टिरीन की सबसे बड़ी निर्यातक भी है। दुनिया में 80 से ज्यादा देशों को निर्यात करती है। दिसंबर 2012 की तिमाही में उसका धंधा साल भर पहले की अपेक्षा 35.69 फीसदी बढ़कर 1415.49 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इस पर उसका शुद्ध लाभ 33.47 करोड़ रुपए का है जो साल भर पहले से 289.18 फीसदीऔरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था पर दुनिया के हाल का कितना असर पड़ता है, यह भले ही बहस का मुद्दा हो। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय शेयर बाज़ार पर दुनिया के हाल का सीधा असर पड़ता है। साइप्रस और यूरो ज़ोन के झटके से भारतीय शेयर बाज़ार दोपहर दो बजे के बाद पस्त होने लगा। लेकिन कमाल की बात यह है कि विदेशी घटनाक्रमों से विदेशी निवेशक (एफआईआई) ज्यादा प्रभावित नहीं होते। इसका सबूत है कि कलऔरऔर भी

केंद्र सरकार के वजूद पर सच में कहें तो कोई तलवार नहीं लटकी है। फिर भी बाज़ार है कि गिरता ही जा रहा है। बड़े-बड़े निवेशक राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर घबरा गए हैं। ऊपर से कॉरपोरेट क्षेत्र भी निराशा जता रहा है। बहुत ही कम मौके ऐसे होते हैं जब एफआईआई (विदेशी निवेशक संस्थाएं) और डीआईआई (घरेलू निवेशक सस्थाएं) एक जैसा बर्ताव करें। लेकिन कल ऐसा ही हुआ। एफआईआई और डीआईआई दोनों ही बिक्री पर उतारू रहे।औरऔर भी

बाज़ार जो चाहता था, रिजर्व बैंक ने उसे दे दिया। ब्याज दर चौथाई फीसदी घटा दी। कच्चे तेल के दाम भी नीचे हैं। फिर भी वह डेढ़ फीसदी का गोता लगा गया। कारण, मनचाहे आर्थिक फैसले पर अनचाही राजनीति हावी हो गई। केंद्र सरकार से डीएमके की समर्थन वापसी की बात बाज़ार को जमी नहीं।  खैर, इससे शायद सरकार के टिके रहने पर कोई फर्क न पड़े क्योंकि समाजवादी पार्टी और बीएसपी का बाहरी समर्थन उसे बचाऔरऔर भी

आज सुबह 11 बजे रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की समीक्षा करते वक्त ब्याज दरें घटा सकता है। ज्यादातर लोगों का यही मानना है। हालांकि वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी रिजर्व बैंक से यही अपील की है। लेकिन यह महज एक आशावाद है। रिजर्व बैंक गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव वही करते हैं जो उनकी समझ और विवेक कहता है। वे तो मौद्रिक नीति पर सलाह देने के लिए बनी समिति के बहुमत को भी ठुकरा कर फैसला करतेऔरऔर भी

बाज़ार में एक तरह का आशावाद छा गया है। थोक महंगाई की दर पहले से थोड़ा बढ़ गई। लेकिन इसमें मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की महंगाई पहले से घट गई। और, रिजर्व बैंक इसे ही ब्याज दर में कटौती का आधार बनाता है। ऊपर से रिजर्व बैंक गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम की तारीफ करते हुए कहा है कि वे विकास को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं। इससे लग रहा है कि अगले हफ्ते मंगलवार,औरऔर भी

बजट के बाद बाज़ार को सबसे बड़ा झटका। सेंसेक्स 1.03 फीसदी तो निफ्टी 1.06 फीसदी नीचे। वजह कोई खास नहीं। फिर भी बताते हैं कि बाज़ार को ब्याज दरें न घटने का भरोसा हो चला है। दूसरे, मॉरगन स्टैनले और एचएसबीसी ने कहा है कि नए साल में भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ने की दर घट जाएगी। लेकिन असली खेल यह है कि छोटे-बड़े सभी निवेशक ज़रा-सा बढ़ने पर मुनाफा काटने में जुट जा रहे हैं। आज थोकऔरऔर भी

जनवरी में देश का औद्योगिक उत्पादन 2.4 फीसदी बढ़ा है। यह उम्मीद से दोगुना है। फिर भी इन आंकड़ों के आने के बाद बाज़ार गिरता गया। कारण, लोगों को लग रहा है कि रिजर्व बैंक शायद अब ब्याज दरों में कटौती न करे क्योंकि कल ही ये आंकड़े भी सामने आए कि रिटेल महंगाई की दर फरवरी में बढ़कर 10.91 फीसदी हो गई है। गुरुवार को थोक महंगाई के आंकड़े आने हैं। वैसे अब भी ज्यादातर जानकारऔरऔर भी

बाजार पर गिरावट की हल्की-सी मार पड़ने लगी है। आज जनवरी में उद्योग की विकास दर कितनी बढ़ी, इसे बतानेवाले औद्योदिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े आएंगे और गुरुवार को फरवरी में रही थोक मूल्य सूचकांकों पर आधारित मुद्रास्फीति के। इनसे हफ्ते भर बाद ब्याज दरें घटाने का माहौल बन सकता है। हालांकि रिजर्व बैंक गवर्नर डी. सुब्बाराव फिलहाल ऐसे किसी मूड में नहीं लगते। निफ्टी ने कल 5970 की बाधा तोड़ने की कोशिश की। मगर कामयाबऔरऔर भी