पूर्ण-अपूर्ण
इंसानों की बनाई इस दुनिया में कुछ भी पूर्ण नहीं। अपनी समझ से सब कुछ सही करते हुए भी हम गलत मोड़ पर पहुंच सकते हैं। तरीका सही, जवाब एकदम गलत। लेकिन इस तरह हम अपनी सोचने की प्रक्रिया को माजते हुए जरूर पूर्ण बना सकते हैं।और भीऔर भी
सांसदों की सौदेबाजी से मनमोहन ने पल्ला झाड़ा, कहा – मैंने नहीं किया
लोकसभा में जुलाई 2008 में विश्वास मत के दौरान ‘वोट के बदले नोट घोटाले’ संबंधी विकिलीक्स के खुलासों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को खीझ और बचाव की मुद्रा में ला खड़ा दिया है। वे जहां संसद में विपक्ष को जनता द्वारा खारिज किए जाने की दुहाई देते रहे, वहीं संसद से बाहर उन्होंने खुद अपने पाक-साफ होने की दलील थी। उनका सांसदों की खरीद-फरोख्त से साफ इनकार नहीं किया। बस इतना कहते रहे कि उनका इससे कोईऔरऔर भी
कौन-से रसातल तक जाएगा बाजार?
यूं तो मिस्र से भारत का कोई सीधा लेनादेना नहीं है, लेकिन मिस्र में उठे राजनीतिक तूफान ने पहले से हैरान-परेशान हमारे शेयर बाजार की हवा और बिगाड़ दी है। वैसे भी जब बुरा दौर चल रहा हो, तब मामूली-सी बुरी खबर भी बिगड़ी सूरत को बदतर बनाने के लिए काफी होती है। सेंसेक्स आखिरकार आज नीचे में 18,038.48 तक चला गया। हालांकि बाद में सुधरकर 18327.76 पर बंद हुआ। भारतीय बाजार को पसंद करनेवाले किसी भीऔरऔर भी
पात्र या कुपात्र
जानने की पहली सीढ़ी है सवाल। जिसके पास भी सवाल होंगे, उसे उनका जवाब मिल जाएगा। सब कुछ है इस दुनिया में। हां, इतना जरूर है कि यहां कुछ भी पाने से पहले उसकी पात्रता हासिल करनी पड़ती है।और भीऔर भी
सवालों को आने दो
ये सीलन भरी बास, ये घुटे-घुटे विचार अच्छे नहीं लगते। सारे खिड़की दरवाजे खोल दो। हवाओं को आने दो, सवालों को आने दो। हवाएं सफाई का सरंजाम साथ लेकर चलती हैं और सवाल हर घुटन का जवाब।और भीऔर भी


