बाजार में कदमताल जारी है। उठता है। गिरता है। बढ़ता है। पीछे आता है। फिर बढ़ जाता है। लेकिन एक बात साफ है कि बाजार से जबरदस्ती खेलने का दौर अब खत्म होता दिख रहा है क्योंकि जहां निफ्टी को सायास दबाकर रखा जा रहा है, वहीं इसमें शामिल स्टॉक्स की खरीद शुरू हो गई है। यह इशारा इस बात का है कि बाजार अब अपनी तलहटी पकड़ चुका है। हालांकि ट्रेडरों में इस समय ताजातरीन सोचऔरऔर भी

यह वाकई बहुत बुरी बात है कि बिजनेस चैनल अब दर्शकों की भावनाओं के साथ खेलने लगे हैं। एक बिजनेस चैनल और उससे जुड़ी समाचार एजेंसी ने खबर फ्लैश कर दी कि सरकार पेट्रोलियम तेलों पर फिर से नियंत्रण कायम करने जा रही है। कितनी भयंकर बेवकूफी की बात है? सुधारों को पटलने का सवाल कहां उठता है? यह तो तभी हो सकता है जब सीपीएम केंद्र सरकार की लगाम थाम ले! स्वाभाविक रूप से पेट्रोलियम मंत्रीऔरऔर भी

देश में हर 1700 लोगों पर एक डॉक्टर है, जबकि दुनिया का औसत 1000 लोगों पर डेढ़ डॉक्टर का है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने लक्ष्य बनाया है कि 2031 तक हर 1000 भारतीय पर एक डॉक्टर उपलब्ध करा दिया जाएगा। इस समय जर्मनी में 296 पर एक, अमेरिका में 350 पर एक, ब्रिटेन में 469 पर एक, ब्राजील में 844 पर एक, चीन में 1063 पर एक और पाकिस्तान में 1923 लोगों पर एक डॉक्टरऔरऔर भी

कपास उत्पादन में संकर प्रजाति के बीजों का इस्तेमाल बढ़ने और आने वाले समय में जैव प्रौद्योगिकी की विशेषताओं की वजह से भारत कपास उत्पादन में 2015 तक चीन को पछाड़ कर दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक बन सकता है। वर्ष 2010-11 में चीन का कपास उत्पादन कुल 4.5 करोड़ गांठ (प्रति गांठ 170 किलो) रहने का अनुमान है, जबकि भारत में इस दौरान कुल 3.39 करोड़ गांठ कपास उत्पादन होने की उम्मीद है। वैश्विक स्तरऔरऔर भी

व्यापक दक्षता आधार और पहले शुरुआत करने का लाभ भारत को आज भी आउटसोर्सिंग क्षेत्र में मिल रहा है और यह दुनिया की कई प्रमुख कंपनियों का पसंदीदा ठिकाना बना हुआ है। यह बात ग्लोबल मैनेजमेंट कंसल्टेंसी फर्म ए टी केयर्नी की रिपोर्ट में कही गई है। ए टी केयर्नी के वैश्विक सेवा स्थल सूचकांक (जीएसएलआई) 2011, सूची में भारत, चीन और मलयेशिया क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। ये तीनों देश वर्ष 2003 मेंऔरऔर भी

मेक्सिको के कानकुन शहर में चल रहे जलवायु सम्मेलन में भारत और चीन सहित कई प्रमुख विकासशील देशों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे कार्बन उत्सर्जन में कटौती के संबंध में कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते को स्वीकार कर लें। लेकिन भारतीय पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसे किसी समझौते को तत्काल मानने को तैयार नहीं है। इस सम्मेलन में अमेरिका, भारत और चीन कानूनी तौर पर बाध्यकारी समझौते को स्वीकार करनेऔरऔर भी

सेंचुरी टेक्सटाइल्स के 400 से बढ़कर 455 रुपए और एचडीआईएल के 164 से बढ़कर 200 रुपए तक पहुंचने ने साफ-साफ रीयल्टी सेक्टर में छिपी संभावनाओं की झलक दिखा दी है। यह बात आप खुली आंखों से देख सकते हैं। लेकिन भविष्य के गर्भ में छिपी लंबी कहानी आपको दिमाग लगाकर पढ़नी होगी। निफ्टी 5750 से पलटकर 5960 तक आ चुका है। बहुत से लोग अब भी कह रहे हैं कि यह तात्कालिक राहत की रैली है। लेकिनऔरऔर भी

मैं दस साल के नजरिए से अर्थव्यवस्था और बाजार व कॉरपोरेट क्षेत्र की स्थिति को देखता हूं। इसलिए महसूस कर सकता हूं कि क्या हो रहा है। लेकिन निवेशक तो दस घंटे की बात भी नहीं देख पाते। इसलिए बाजार के खिलाड़ियों के हाथ में अपनी गरदन पकड़ा देते हैं। मैं भी एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों को उनका पोर्टफोलियो बनाने-संभालने की सलाह देता हूं। लेकिन उन्हें नुकसान नहीं हुआ क्योंकि वे कभी भी कर्ज लेकर बाजारऔरऔर भी

भारत जितना निर्यात करता है, उससे कहीं ज्यादा आयात करता है। केवल माल के व्यापार की बात करें तो विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2009 में हमारा व्यापार घाटा (आयात व निर्यात का अंतर) 87 अरब डॉलर था। दुनिया में केवल ब्रिटेन (129 अरब डॉलर) और अमेरिका (549 अरब डॉलर) हम से ऊपर थे। माल व सेवा को मिला दें तो शुद्ध आयात में हम केवल अमेरिका से पीछे हैं। अमेरिका का आंकड़ा 699 अरबऔरऔर भी

तमाम अखबार, पत्र-पत्रिकाएं और बिजनेस चैनल भारतीय शेयर बाजार को लगी 1200 अंकों से ज्यादा की चपत की वजह वैश्विक कारकों में तलाश रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि असली बात यह नहीं है। लेहमान ब्रदर्स के डूबने का मसला हो या उसके बाद के तमाम वैश्विक कारक हों, उन्होंने यकीकन कमजोर बाजारों को चोट पहुंचाई, लेकिन इनके बीच भारतीय बाजार ने पुरानी ऊंचाई फिर से हासिल कर ली और यही नहीं, दूसरी अर्थव्यवस्थाओं ने हमाराऔरऔर भी