अंदेशा था डाउ जोंस के 200 अंक और निफ्टी के 100 अंक गिर जाने का। लेकिन लगता है कि जैसे अपने यहां भाई लोग भरे बैठे थे। अमेरिका में फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने ऐसा कोई फैसला नहीं किया जिसकी अपेक्षा नहीं थी। सबको पता था और हमने भी लिखा था कि ऑपरेशन ट्विस्ट आना है और क्यूई-3 की गुंजाइश नहीं है। लेकिन मौका मिलते ही उस्तादों ने बाजार को धुन डाला। बीएसई सेंसेक्स का 704 अंकऔरऔर भी

चीन का भ्रष्टाचार निरोधी सुप्रीम पीपुल्स प्रोक्युरैटोरेट (एसपीपी) भ्रष्ट अधिकारियों पर नजर रखने की नीति के तहत भ्रष्टाचार के मामलों में सजा पाए व्यक्तियों का एक राष्ट्रीय ऑनलाइन डाटाबेस स्थापित करेगा। एसपीपी का नया डाटाबेस इस साल के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। चीनी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने एसपीपी के बयान के हवाले बताया है कि यह डाटाबेस नीलामी और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं के लिए एक नियंत्रण तंत्र के तौर पर काम करेगा। बता दें किऔरऔर भी

अपने यहां इनकम टैक्स की अधिकतम दर 30% है,  जबकि चीन में यह दर 45%, जर्मनी में 45%, जापान में 50% और स्वीडन में 57% है। लेकिन टैक्स की कम दरों के बावजूद भारत में अवाम पर बोझ ज्यादा है। कारण, भारत में सामाजिक सुरक्षा नहीं है, जबकि यहां गिनाए गए सभी देशों में हर व्यक्ति को रिटायरमेंट पेंशन, स्वास्थ्य और बच्चों के पालन-पोषण की अनिवार्य बीमा सरकार की तरफ से मिलती है। ऊपर से भारत मेंऔरऔर भी

निफ्टी में 4900 का स्तर अब और भी नाजुक बन गया है। कारण, लगातार तीन दिन तक 4900 का स्तर तोड़ने में नाकाम रहने पर बहुत सारे मंदडियों ने कल ही अपनी शॉर्ट पोजिशन काट डाली। ऐसा हमेशा होता है। मंदड़िए जब एक खास स्तर तोड़ने में नाकाम रहते हैं तो उन्हें अपनी शॉर्ट पोजिशन बराबर करनी पड़ती है। इसी के साथ बढ़त की तरफ झुकाव कफी बढ़ा हुआ है जो साफ दर्शाता है कि बाजार केऔरऔर भी

दुनिया भर में सोने की बिक्री बढ़वाने में लगी विश्व स्वर्ण परिषद का कहना है कि भारत में इस त्योहारी सीजन में सोने के जेवरात की रिटेल ब्रिकी 10 से 15 फीसदी बढ़ सकती है। परिषद के निदेशक शिवराम कुमार ने कोच्चि में संवाददाताओं से कहा कि अब तक सोने की खरीदारी शादी-ब्याह के दौरान ही की जाती थी। लेकिन अब धारणा बदल रही है। उन्होंने कहा कि हमें इस साल त्योहारी सीजन में देश भर मेंऔरऔर भी

इधर हर कोई सोने में चल रही तेजी की वजह यूरोप के ऋण संकट और अमेरिका में आई आर्थिक सुस्ती को बता रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बाजार विश्लेषक क्लाइड रसेल का कहना है कि इसकी असली वजह दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीद के अलावा भारत व चीन के ग्राहकों की बढ़ी हुई मांग है जहां सोना खरीदना मुद्रास्फीति के बचाव के साथ-साथ स्टेटस सिम्बल भी बनता जा रहा है। क्लाइड रसेल काऔरऔर भी

उभरते बाजारों में निवेश करने वाले प्राइवेट इक्विटी (पीई) फंडों ने सबसे ज्यादा धन भारत और चीन में लगाया है। उभरते बाजारों में पीई निवेश में इन दो देशों की कुल हिस्सेदारी 68 फीसदी है। इमर्जिंग मार्केट्स प्राइवेट इक्विटी एसोसिएशन द्वारा कराए गए अध्ययन के मुताबिक, इस साल जून तक के छह महीनों में दुनिया में हुए कुल पीई निवेश में चीन और भारत की हिस्सेदारी 68 फीसदी रही। जहां चीन में 5.8 अरब डॉलर का पीईऔरऔर भी

दुनिया की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने जापान के सरकार ऋणों की रेटिंग घटा दी है। उसने इसे एक पायदान नीचे खिसका कर Aa3 कर दिया है। अभी तक यह Aa2 थी। एजेंसी ने कहा कि 2009 की मंदी के बाद से ही जापान का ऋण बढ़ता जा रहा है और वहां राजनीतिक नेतृत्व बहुत तेजी से बदल रहा है जिससे कारगर आर्थिक रणनीति नहीं अपनाई जा पा रही है। बता दें कि जापान में पांचऔरऔर भी

अगले कुछ महीनों में कई भारतीय और चीनी कारें अमेरिकी बाजार में पेश की जाने वाली हैं। लेकिन एक नई रिपोर्ट में पाया गया कि ज्यादातर अमेरिकी टाटा, महिंद्रा और बीवाईडी जैसी कंपनियों की कारें नहीं खरीदना चाहते। बाजार अनुसंधान कंपनी जीएफके ऑटोमोटिव की एक रिपोर्ट में पाया गया कि चीन और भारत के वाहन निर्माताओं को वही दिन देखने पड़ेंगे जो कोरियाई वाहनों को अमेरिका में लांच किए जाने के बाद देखना पड़े थे। उपभोक्ताओं कोऔरऔर भी

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई है कि उनका देश विज्ञान और गणित के क्षेत्र में तेजी से भारत और चीन जैसे देशों से पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से इन क्षेत्रों में अमेरिका को तुलनात्मक रूप से बढ़त हासिल थी, लेकिन अब वह भारत और चीन जैसे देशों से पिछड़ता जा रहा है। अमेरिका के ग्रामीण इलाकों की तीन दिन की बस यात्रा के समापन के बादऔरऔर भी