अमेरिकी के एक अखबार में छपे लेख में बताया गया है कि चांदी में सट्टेबाजी क्या आलम है। यहां तक कि सट्टेबाजों के कहने पर वहां के कमोडिटी एक्सचेंज ने मार्जिन कॉल जारी करने में देर कर दी। इसके बाद भी चांदी में गिरावट आई तो सही, लेकिन काफी देरी के बाद। भारत की बात करें तो यहां भी सट्टेबाजी सिर चढ़कर बोल रही है। इसमें कोई शक नहीं कि रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति की गंभीर अवस्थाऔरऔर भी

जूपिटर बायोसाइंसेज दवा उद्योग व बायोटेक्नोलॉजी से जुड़ी 1985 में बनी कंपनी है। बहुत कुछ नायाब बनाती है। लगातार बढ़ रही है। अधिग्रहण भी करती है। हाथ भी मिलाती है। 2006 में हैदराबाद की कंपनी का अधिग्रहण किया तो 2008 में स्विटजरलैंड की एक उत्पादन इकाई खरीद डाली। 2007 में रैनबैक्सी के साथ रणनीतिक गठजोड़ किया। इस मायने में भी यह बड़ी विचित्र कंपनी है कि इसकी 62.43 करोड़ रुपए की इक्विटी में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी मात्रऔरऔर भी

उम्मीद पर दुनिया कायम है और शेयर बाजार भी। किसी कंपनी ने लाख अच्छा किया हो, लेकिन अगर वो बाजार की उम्मीद पर खरी नहीं उतरी तो उसका शेयर गिर जाता है। नहीं तो क्या वजह है कि टीवीएस मोटर कंपनी का शुद्ध लाभ मार्च तिमाही में साल भर पहले की तुलना में दोगुना हो गया। पहले 20.29 करोड़ रुपए था। अब 105.42 फीसदी बढ़कर 41.68 करोड़ रुपए हो गया। फिर भी शुक्रवार 29 अप्रैल को नतीजोंऔरऔर भी

किसी भी शेयर में निवेश करते समय हम यह सोचते हैं कि इससे हम कितना कमा सकते हैं। लेकिन पहले सोचना यह चाहिए कि हम इसमें कितना गंवा सकते हैं क्योंकि निवेश के सभी माध्यमों में सबसे ज्यादा जोखिम शेयरों में ही होता है। इसलिए जोखिम की पूरी मानसिक तैयारी के बिना इसमें कूद पड़ता ‘स्वास्थ्य के लिए हानिकारक’ है। आज चर्चा इलेक्ट्राल बनानेवाली कंपनी एफडीसी की। दवा उद्योग की कंपनी है। बल्क फार्मूलेशन और एंटी ऑक्सीडेंटऔरऔर भी

पहले नाम बड़ा था – गुजरात हैवी केमिकल्स लिमिटेड। अब छोटे में जीएचसीएल लिमिटेड हो गया है। 1988 से चल रही कंपनी है। रसायनों से लेकर टेक्सटाइल्स तक में सक्रिय है। 2009-10 में 1213.96 करोड़ रुपए की बिक्री पर 140.85 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में दिसंबर तक के नौ महीनों में उसकी बिक्री 1051.05 करोड़ और शुद्ध लाभ 91.18 करोड़ रुपए रहा है। अगर ठीक पिछले बारह महीनों की बातऔरऔर भी

बाजार एक बार फिर डेरिवेटिव सौदों में ली गई पोजिशंस के हिसाब से चला। निफ्टी 0.83 फीसदी गिरकर 5785.45 पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए क्योंकि डेरिवेटिव सौदों के गढ़ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में अभी तक फिजिकल सेटलमेंट नहीं है। हमें बाजार की इस गति का पहले से अंदाजा था। इसीलिए हमने केवल बचाव वाली कॉल्स ही दी थी। फिर भी तेजी का रुझान कायम है। कल नए सेटलमेंट की शुरुआत के साथ नई पोजिशन ली जाएंगी।औरऔर भी

कोरोमंडल इंटरनेशनल दक्षिण भारत के मुरुगप्पा समूह की कंपनी है। फर्टिलाइजर, स्पेशियलिटी न्यूट्रिएंट व फसल बचाने के उत्पादों के साथ-साथ रिटेल के धंधे में भी है। 2007 में उसने दो रिटेल आउटलेट से शुरुआत की थी। अभी उसके पास आंध्र प्रदेश के ग्रामीण अंचल में 425 से ज्यादा रिटेल स्टोर हैं जहां खाद वगैरह के साथ ही कपड़े-लत्ते व रोजम्रर्रा की तमाम चीजें मिलती हैं। कंपनी फॉस्फेट खाद में देश की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता है। मतलबऔरऔर भी

कॉरपोरेट दुनिया में हालात इतनी तेजी से बदल जाते हैं कि बहुत सावधान न रहिए तो चूक हो ही जाती है। हमने 17 जून 2010 को जब बसंत कुमार बिड़ला समूह की नामी कंपनी केसोराम इंडस्ट्रीज के बारे में लिखा था, तब उसका शेयर 328.95 रुपए पर था। शेयर की बुक वैल्यू इससे ज्यादा 335.97 रुपए थी। टीटीएम ईपीएस 51.88 रुपए तो शेयर मात्र 6.3 पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था। लगा कि बिड़ला परिवार कीऔरऔर भी

ऐसी कंपनी जिसका नाम हो, लेकिन वह बदनाम न हो, उसके शेयरों में निवेश करना हमेशा सुरक्षित व लाभकारी होता है। आईएफबी इंडस्ट्रीज ने ऐसा ही नाम कमा रखा है, खासकर ऑटोमेटिक वॉशिंग मशीन में। वैसे, वह इसके अलावा भी कई उत्पाद बनाती है। उसकी छवि ऐसी बनी है जैसे वो कोई विदेशी कंपनी हो, जबकि हकीकत में वो एकदम देशी कंपनी है। हालांकि 1974 में उसकी शुरुआत स्विटजरलैंड की कंपनी हीनरिच श्मिड एजी के सहयोग सेऔरऔर भी

हर दिन उछलते दामों के चलते सोने में निवेश बढ़े या न बढे, लेकिन गोल्ड ईटीएफ में निवेश बढ़ रहा है। देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नेशनल स्टाक एक्सचेंज में गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) का कारोबार पिछले साल दोगुने से अधिक हो गया। गोल्ड इटीएफ में निवेशकों को सोने को इलेक्ट्रानिक रूप में खरीदने और बेचने की अनुमति होती है। एनएसई में गोल्ड ईटीएफ का कुल कारोबार 2010-11 में बढ़कर 4074.30 रुपए हो गया जोऔरऔर भी