बैक्टीरिया व वायरस हर तरफ फैले रहते हैं। लेकिन जिनके शरीर का एम्यून सिस्टम या प्रतिरोध तंत्र मजूबत रहता है, उनका ये कुछ नहीं बिगाड़ पाते। हां, उनके भी शरीर को बैक्टीरिया व वायरस से बराबर युद्धरत रहना पड़ता है। इसी तरह कंपनियों को भी बराबर बदलते हालात व समस्याओं से दो-चार होना ही पड़ता है। प्रबंधन तंत्र दुरुस्त हो, नेतृत्व दक्ष हो तो कंपनी हर समस्या के बाद और निखरकर सामने आती है, जबकि प्रबंधन तंत्रऔरऔर भी

चक्र का चक्कर प्रकृति में ही नहीं, शेयर बाजार में भी चलता है। बाजार सीधे नहीं भागता, बल्कि चक्रों में चलता है। जो उठा है, वो और उठने से पहले गिरेगा जरूर। इसे ही करेक्शन कहते हैं। इसी तरह कंपनी अगर मजबूत है और बढ़ रही है तो उसका गिरा हुआ शेयर जरूर बढ़ता है। हां, कंपनी ही अगर डूब रही है तो उसके शेयर को अंततः डूब जाने से ऑपरेटर भी नहीं बचा सकते। इसीलिए जिसऔरऔर भी

स्टर्लिंग बायोटेक दवा उद्योग से जुड़ी कंपनी है। मुख्य रूप से जेलैटिन बनाती है। कंपनी का दावा है कि दुनिया के जेलैटिन बाजार में उसकी 7.5 फीसदी और भारतीय बाजार में 60 फीसदी हिस्सेदारी है। वह मानव कोशिकाओं में बहुतायत से पाया जानेवाला पोषक यौगिक, यूबिक्विनोन या को-एनजाइम क्यू-10 भी बनाती है। वह फरमेंटेशन के जरिए यह उत्पाद बनानेवाली दुनिया की चुनिंदा कंपनियों में शुमार है। गुजरात की कंपनी है। वडोदरा जिले के मासर गांव में उसकाऔरऔर भी

यह सेबी और स्टॉक एक्सचेंजों की नई व्यवस्था की पहली परीक्षा थी और दोनों ही इसमें फेल हो गए। इससे सरकार भी बड़ी किरकिरी हुई क्योंकि गुरुवार देर रात तक साफ नहीं हो पाया कि ओएनजीसी में सरकार के 5 फीसदी शेयर बेचने की पेशकश पूरी हुई है या नहीं। पहले विनिवेश विभाग के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ प्रधान ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि 42,77,75,504 शेयरों की नीलामी पूरी संपन्न हो गई है। लेकिन सिस्टमऔरऔर भी

सुप्रजीत इंजीनियरिंग है तो स्मॉल कैप कंपनी। इक्विटी 12 करोड़ रुपए है और बाजार पूंजीकरण 240 करोड़ रुपए के आसपास। लेकिन देश में वाहनों के केबल बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनी है। वह गाड़ियों के स्पीडोमीटर भी बनाती है। कंपनी के तार विदेश तक फैले हैं। करीब छह साल पहले 2006 में इसने एक ब्रिटिश कंपनी गिल्स केबल्स का अधिग्रहण किया था जिसका नाम अब सुप्रजीत यूरोप लिमिटेड कर दिया गया है। घरेलू बाजार की मांग को पूराऔरऔर भी

चुटकी भर टिप्स, मुठ्ठी भर मंत्र। यही अपना मूल मकसद है। टिप्स तो बहाना है, असली काम तो आपको बताना है शेयर बाजार ही नहीं, पूरे वित्तीय बाज़ार की बारीकियों के बारे में ताकि कोई आपको झांसा न दे सके और आप अपने फैसले खुद ले सकें। ऐसे में हर बड़ी खबर या घटना का इस्तेमाल हमें जानने-समझने के मौके के रूप में करना चाहिए। शनिवार को वेदांत समूह ने अपनी एक कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को दूसरीऔरऔर भी

शेयर बाजार पिछले तीन दिनों से भले ही गिरावट का शिकार हो, लेकिन प्राइमरी बाजार ने इन्हीं तीन दिनों में अपनी ताकत दिखा दी है। एमसीएक्स के जिस आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) को अधिकतम 663.30 करोड़ रुपए जुटाने थे, उसे असल में 35,805 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। बीएसई व एनएसई के सम्मिलित आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार को इश्यू बंद होने पर शाम छह बजे तक देश के इस सबसे कमोडिटी एक्सचेंज का आईपीओ 53.98 गुना सब्सक्राइबऔरऔर भी

जिस तरह गहरा पानी शांत बहता है, कम गहरा पानी थोड़ा ज्यादा और ज्यादा छिछला पानी कुछ ज्यादा ही उछलता है, उसी तरह का हाल शेयर बाजार में लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप स्टॉक्स का रहता है। यह बाजार का ऐसा स्वभाव है जिसे हम बदल नहीं सकते। समझदारी इसी में है कि इसी स्वभाव के मद्देनज़र निवेश और रिटर्न का हिसाब-किताब बैठाया जाए। इसी से फैसला किया जाए कि कहां लंबे समय का निवेशऔरऔर भी

यूं तो आज के समय में कंपनियों के साथ राष्ट्रीयता या राष्ट्रवाद को जोड़ने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि देशी-विदेशी हर कंपनी का मकसद अंधाधुंध मुनाफा कमाना है। अन्यथा, वॉलमार्ट या केयरफोर से सबसे ज्यादा चोट खा सकने वाले बिग बाज़ार या रिलायंस फ्रेश जैसे देशी रिटेलर ही उनका स्वागत पलक पांवड़े बिछाकर नहीं कर रहे होते। किशोर बियानी जैसे लोग तो इस चक्कर में हैं कि अपने उद्यम की इक्विटी इन विदेशियों को बेचकर कैसेऔरऔर भी

काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती है और अच्छी चीजें बाज़ार की नज़रों से कभी बच नहीं सकतीं। हम देखें या न देखें, लोगों की पारखी निगाहें ताड़ ही लेती हैं कि मूल्य कहां पक रहा है। नहीं तो क्या वजह है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी, इलाहाबाद बैंक का जो शेयर महीने भर पहले 130 रुपए पर डोल रहा था, वह बिना किसी ट्रिगर या खेल के 195 रुपए पर पहुंच चुका है। महीने भर मेंऔरऔर भी