भोपाल गैस कांड में ढिलाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जमकर लताड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से सवाल किया है कि वह 1996 में भोपाल गैस कांड के आरोपियों के खिलाफ आरोपों को हल्का करने के 14 साल बाद अब क्यों अदालत के पास पहुंची है। बुधवार को सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश एस एच कपाडिया के नेतृत्व में पांच न्यायाधीशों की विशेष पीठ ने विलंब पर सवाल किया और सीबीआई से पूछा कि उसने इतने साल में कोई पुनरीक्षा याचिका दायर क्यों नहीं की।

सीबीआई की ओर से पेश अटार्नी जनरल जी ई वाहनवती ने कहा, ‘‘मैं नहीं जानता कि आखिर सीबीआई ने याचिका क्यों नहीं दायर की, लेकिन इस मामले में एक पुनरीक्षा याचिका किसी की ओर से दायर की गई थी और रद्द कर दी गई थी।’’ वाहनवती ने कहा कि 1982 के बाद से आरोपितों ने अनेक गड़बड़ियां की थी जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। उन्होंने कहा, ‘‘मैं दिखा सकता हूं कि  1982 के बाद से किस तरह अवैध कमियों की श्रृंखला चली जो यह दिखाती हैं कि इस तरह का हादसा तो होना ही था।’’

सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ इस समय इसी अदालत द्वारा 14 साल पुराने सिंतबर 1996 में दिए गए उस फैसले पर पुनर्विचार के लिए सीबीआई की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें भोपाल गैस कांड के आरोपियों को केवल लापरवाही से हुई मृत्यु का दोषी करार दिया गया था और उन्हें सदोष मानवहत्या या कल्पेबल होमिसाइड के दोष से बरी कर दिया था। पुराने फैसले पर पुनर्विचार का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2010 को किया था।

बता दें कि भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी में जहरीली गैस मिथाइल आइसो-साइनेट के रिसाव के कारण 15,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और हजारों अंधे या अपाहिज हो गए। इसे दुनिया में अब तक का सबसे बदतर औद्योगिक हादसा माना जाता है।

मालूम को 7 जून 2010 को भोपाल के चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने इस मामले में सात अभियुक्तों को मात्र दो साल की सजा सुनाई है। ये सात अभियुक्त हैं – यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन चेयरमैन केशब महिंद्रा, प्रबंध निदेशक विजय गोखले, वाइस प्रेसिडेंट किशोर कामदार, वर्क्स मैनेजर जे एन मुकुंद, प्रोडक्शन मैनेजर एस पी चौधरी, प्लांट सुपरिंटेंडेंट के वी शेट्टी और तत्कालीन प्रोडक्शन असिस्टेंट एस आई कुरैशी। इस फैसले के बाद सुप्रीम को धक्का लगा और उसने सदोष हत्या के आरोप को हल्का करने के फैसले पर फिर से विचार करने का फैसला किया।

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