बीएसएनल में दो साल से कोई निदेशक-वित्त नहीं

सरकारी रवैये से किसी कंपनी का क्या हश्र हो सकता है इसका एक और उदाहरण सामने आया है। कानूनी बाधाओं के कारण दूरसंचार मंत्रालय पिछले करीब दो साल से सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) में वित्त निदेशक की नियुक्त नहीं कर सका है। कंपनी का कारोबार 30,000 करोड़ रुपए सालाना से अधिक है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस नियुक्ति पर रोक लगा रखी है।

दूरसंचार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बारे में कहा, ‘‘सरकार नियुक्ति में देरी को लेकर चिंतित है। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रक्रिया पर रोक लगाई हुई है। यह हमें नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं देता और इसके कारण कंपनी में निदेशक वित्त की नियुक्ति पिछले साल से दो नहीं हो पाई है।’’ हाल ही में सरकार ने आर के उपाध्याय को बीएसएनएल का चेयरमैन व प्रबंध निदेशक नियुक्त किया है।

मामले की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछे जाने पर अधिकारियों ने कहा, ‘‘सरकार ने मामले में तेजी लाने के लिए कई याचिकाएं दायर की है। दलीलें भी पूरी हो गई हैं और मामले पर लगी रोक को हटाने का फिर से अनुरोध किया गया है। दो महीने हो गए हैं लेकिन स्थिति जस की तस है।’’

इस बारे में संपर्क किये जाने पर दूरसंचार सचिव आर चंद्रशेखर ने कहा कि सरकार नियुक्ति पर लगी रोक हटाने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्दी ही नए निदेशक (वित्त) की नियुक्ति हो जाएगी। कंपनी के सूत्रों का कहना है कि निदेशक (वित्त) की अनुपस्थिति से कई परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को अच्छा राजस्व मिल सकता था। (प्रेट्र)

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