देश के ऋण की तुलना जीडीपी के करना सही नहीं क्योंकि स्टॉक की तुलना फ्लो से नही की जा सकती। तुलना के लिए दोनों का स्वरूप फ्लो या प्रवाह का रहना चाहिए। इसलिए तुलना करनी ही है तो ऋण नहीं, ब्याज भुगतान की तुलना जीडीपी से करनी चाहिए। भारत की स्थिति यह है कि वह अकेले ब्याज की अदायगी पर ही जीडीपी का 5.11% खर्च कर देता है। यह वियतनाम (0.89%), इंडोनेशिया (2.21%) और मलयशिया (2.84%) जैसी समतुल्य उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों की तुलना में दोगुना है। हमारे सालाना बजट का लगभग 20% हिस्सा ब्याज अदायगी में चला जाता है। अर्थशास्त्री यह भी कहते हैं कि चूंकि जीडीपी कोई धन नहीं, जिसे सरकार खर्च कर सके। इसलिए देश की वित्तीय सेहत जानने का ज्यादा सही तरीका ब्याज भुगतान और सरकार की कुल आय/राजस्व के अनुपात का हो सकता है। बजट के मुताबिक सरकार कुल राजस्व का 39.74% ब्याज अदायगी पर खर्च करेगी। वहीं, विश्व बैंक के मुताबिक ब्राज़ील 30.1%, कनाडा 8.4%, चीन 3.4%, जर्मनी 2.5%, मेक्सिको 20%, रूस 2.4% और दक्षिण अफ्रीका 18.2% खर्च करता है। यहां तक कि अमेरिका जिस पर 40.35 ट्रिलियन डॉलर (भारत के जीडीपी के दस गुना से ज्यादा) का ऋण है, वो भी अपनी आय का आय का 20.3% हिस्सा ही ब्याज चुकाने पर खर्च करता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…
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