हिंदुस्तान यूनिलीवर: लूट, झूठ, छूट!

विज्ञापन लोगों के मासूम मन को छलनेवाला ऐसा करतब है जिस पर नियामक बैठाने की बात तो बार-बार हुई है, लेकिन अभी तक कंपनियों व विज्ञापन जगत के नुमाइंदों से बने संगठन एएससीआई (एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया) को पंच बनाकर रखा हुआ है जिसकी कमान एक क्लर्कनुमा सज्जन, एलन कोल्लाको को सालोंसाल से सौंप रखी है। यह तो वही बात हुई कि ठगों को ही ठगी को रोकने का थानेदार बना दिया। इसीलिए अक्सर लगता है कि अपने यहां लूट का लोकतंत्र है। जैसे चाहो, लोक को वैसे नचाओ और अपना तंत्र चलाते रहो। कोई पूछनेवाला नहीं, कोई पहरेदार नहीं। सीधे भावनाओं पर चोट करके बुद्धि को सुन्न कर दो और अपना माल बेचकर सीना ताने मुख्य द्वार से निकल जाओ।

देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर इस धंधे की भी सरगना है। हर तीन में से दो हिंदुस्तानी इस कंपनी के उत्पाद इस्तेमाल करता है। चाय से लेकर आटा, साबुन से लेकर शैम्पू, टूथपेस्ट से लेकर क्रीम और सूप से लेकर वॉटर प्यूरीफायर तक। आटा बनाया तो अन्नपूर्णा के नाम से और पानी बनाया तो प्यूरइट के नाम से। जहां भी धंधे की गुंजाइश दिखी, लपक लिए। मूलतः विदेशी कंपनी यूनिलीवर की 52.52 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी वाली सब्सिडियरी है तो दुनिया में बिकनेवाले ऐक्स व डेनिम जैसे ब्रांड भी बेधड़क देश में लाती रहती है। जब तक टीवी कम था, तब तक अखबारों में इसके विज्ञापन छाए रहते थे। अब टीवी है तो सबसे ज्यादा विज्ञापन इसी के उत्पादों के रहते हैं। जब तक टीवी खुला है, हमारे दिमाग पर इसकी बमबारी जारी रहती है।

कंपनी विज्ञापन पर दिल खोलकर खर्च करती है। साल-दर-साल, तिमाही-दर-तिमाही उसका विज्ञापन खर्च शुद्ध लाभ से या तो ज्यादा होता है या लगभग बराबर। जैसे, सितंबर 2011 की तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 688.92 करोड़ रुपए रहा है, जबकि विज्ञापन व प्रचार का खर्च 651.37 करोड़ रुपए था। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी ने 19,735.20 करोड़ रुपए की कुल आय पर 2305.97 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया, जबकि उसका विज्ञापन व प्रचार पर खर्च 2764.23 करोड़ रुपए का था। सोचिए, कंपनी अगर विज्ञापन पर इतना खर्च नहीं करती है तो रिन से लेकर सर्फ, पांड्स व नोर सूप तक कितने सस्ते होते। लेकिन विज्ञापन नहीं होते तो उसके उत्पाद बिकते ही कहां?

बाजार में भी कंपनी के शेयरों की धूम है। सेंसेक्स से लेकर निफ्टी तक में शामिल। जनवरी से लेकर अब तक बाजार 20 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। लेकिन इसी दौरान हिंदुस्तान यूनिलीवर ने 14 नवंबर 2011 को 403.35 रुपए का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर हासिल किया। यह अलग बात है कि तब से ढलान पर है। कल 13 दिसंबर को इसका एक रुपए अंकित मूल्य का शेयर बीएसई (कोड – 500696) में 386.45 रुपए और एनएसई (कोड – HINDUNILVR) में 386.05 रुपए पर बंद हुआ है। इस तरह बीते एक महीने में 4 फीसदी से ज्यादा गिरा है। फिर भी यह इस समय ठीक पिछले बारह महीनों के कंसोलिडेटेड ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 8.33 रुपए से 46.34 गुना और स्टैंड-एलोन ईपीएस 10.51 रुपए से 36.71 गुना या पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। सेंसेक्स जब 16.98 के पी/ई अनुपात पर हो, तब उससे दोगुने से भी ज्यादा भाव हिंदुस्तान यूनिलीवर को इसलिए मिल रहा है क्योंकि उसने अपने ब्रांडों की बमबारी से हमारे दिमाग को गुलाम बना रखा है जिसे लोग ब्रांड वैल्यू या गुडविल भी कहते हैं।

ब्रोकरेज फर्म एचडीएफसी सिक्यूरिटीज की मानें तो इसका शेयर यहां से गिरकर जल्दी ही 360 रुपए पर जानेवाला है। हालांकि एचडीएफसी सिक्यूरिटीज ने 2 नवंबर को जब अपनी रिपोर्ट जारी की थी, तब यह बाजार में 388 रुपए पर था। उसके बाद 14 नवंबर को यह 403.35 रुपए पर 52 हफ्ते ही नहीं, तीन या पांच साल भी नहीं, अब तक तक का सबसे ऊंचा स्तर हासिल कर चुका है। लेकिन ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि आगे मुद्रास्फीति और रुपए के गिरते मूल्यों का मार कंपनी की लाभप्रदता पर पड़ेगी। इसलिए उसके शेयरों का गिरना सुनिश्चित है। वैसे भी, हम इस कंपनी में किसी को निवेश की सलाह नहीं दे सकते। हालांकि यह बुद्धि का नहीं, भावना का मामला है। लेकिन इसके पीछे भाव यह है कि हम किसी झूठ को अपनी भावनाओं से खेलने की छूट नहीं दे सकते।

कंपनी की 216.10 करोड़ रुपए की इक्विटी में पब्लिक की हिस्सेदारी 47.48 फीसदी है। इसमें से 17.68 फीसदी एफआईआई और 12.11 फीसदी शेयर डीआईआई के पास हैं। इनके बाद कंपनी के 17.69 फीसदी शेयर ही बचते हैं जिसमें से 2.77 कॉरपोरेट निकायों के पास हैं। इस तरह आम पब्लिक के पास कंपनी के 14.92 फीसदी शेयर हैं। इसमें से 14.18 फीसदी शेयर कंपनी के 3,28,196 छोटे निवेशकों के पास हैं। इनकी संख्या कंपनी के कुल 3,36,649 की 97.5 फीसदी निकलती है। इन सभी लोगों को फायदे से मतलब है। कौन कहां से दिलाता है, इससे नहीं। इन्हें साध्य से मतलब है, साधन से नहीं। गांधी के देश का व्यवहार फिलहाल यही है। क्या कीजिएगा!!!

हां, अंत में एक बात और। इधर कई मित्रगण खास-खास स्टॉक्स पर लिखने को कहते हैं, कभी कमेंट में तो कभी सीधा मेल भेजकर। उनसे मेरा विनम्र अनुरोध है कि मैं निश्चित रूप से आपके अनुरोध को आदेश मानकर पूरा करूंगा, लेकिन पहले सांकेतिक रूप से ही सही, अपनी बारी तो निभाइए।

1 Comment

  1. Namaste Anil ji,
    Waah kya likha apne, aisa laga jaise mere dil ki baat kar rahe ho… is company aur desh ke bare mera soch hubahu apke tarah hai.

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