कृषि पस्त, सेवाएं सुस्त। विकास के आंकड़े बेमानी है। राष्ट्रीय राजमार्गों से नीचे उतरकर गांवों की तरफ बढ़ते ही चमामक सड़कें खड्ढों से भर जाती हैं। डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर की हकीकत असली लाभार्थियों से बात करने पर साफ हो जाती है कि प्रधान की कृपा से ही उनके बैंक खाते में धन आता है, जहां से निकालते ही प्रधान से लेकर ग्राम सचिव और ठेकेदार तक अपना हिस्सा खाने के लिए घेर लेते हैं। फिर भी सरकारीऔरऔर भी

सरकार का खजाना लबालब है। प्रत्य़क्ष और परोक्ष टैक्स जमकर बढ़ रहे हैं। 9 अक्टूबर तक केंद्र सरकार को रिफंड वगैरह घटाने के बाद शुद्ध रूप से 9.57 लाख करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष टैक्स (कॉरपोरेट टैक्स, इनकम टैक्स + सिक्यूरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स) मिल चुका है जो साल भर पहले की समान अवधि की तुलना में 21.8% ज्यादा है। सितंबर 2023 तक की छमाही में सरकार का एडवांस टैक्स संग्रह 20% बढ़कर 3.54 लाख करोड़ रुपए हो चुकाऔरऔर भी

जिस कृषि ने कोरोनाकाल तक में देश की अर्थव्यवस्था को बचा लिया और जिस पर अब भी हमारी लगभग 60% आबादी निर्भर है, उसकी विकास दर सितंबर 2023 की तिमाही में घटकर 1.2% पर आ गई है। यह 18 तिमाहियों यानी साढ़े चार साल की न्यूनतम दर है। इससे देश की कृषि और किसानों के ताज़ा हाल का पता चलता है। स्पष्ट तौर पर इससे ग्रामीण इलाकों में मांग पर नकारात्मक असर पड़ेगा जो अभी से हिंदुस्तानऔरऔर भी

देश में कॉरपोरेट क्षेत्र का पूंजी निवेश अभी तक ठंडा पड़ा हुआ है। रिजर्व बैंक के मुताबिक निजी उद्योगों में क्षमता इस्तेमाल का स्तर 73.6% पर अटका हुआ है। कॉरपोरेट क्षेत्र ने सितंबर तक पिछले साल से कम 8.26 लाख करोड़ रुपए के नए निवेश की घोषणा की है। इसमें से भी 4.74 लाख करोड़ रुपए ट्रांसपोर्ट सेक्टर से आए हैं। जाहिर है कि निजी निवेश बहुत सतर्क व चौकन्ना है। केवल सरकारी पूंजी निवेश के बलऔरऔर भी

सरकार का कहना है कि इस बार सितंबर तिमाही में देश का जीडीपी 7.6% बढा है। यह जून तिमाही के 7.8% से कम है। लेकिन तमाम अर्थशास्त्रियों की साझा राय 6.8% और यहां तक कि रिजर्व बैंक के 6.5% के अनुमान से अच्छा-खासा ज्यादा है। हर तरफ बल्ले-बल्ले। लेकिन सतह के नीचे ही नहीं, ऊपर से भी देखें तो तस्वीर में काफी झोल दिखता है। इस बार वर्तमान मूल्यों पर जीडीपी साल भर पहले से 9.1% बढ़ाऔरऔर भी