भारत के पास अपना खुद का विशाल बाज़ार है। साथ ही हमारी 65% आबादी की उम्र 35 साल से कम है। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था को तेज़ी से फलने-फूलने के लिए किसी बाहरी सहारे की ज़रूरत नहीं। लेकिन यह भी सच है कि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों या साफ कहें तो कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भर हैं जिसमें हमारे जीडीपी का तकरीबन 4% भाग चला जाता है। हमारी अर्थव्यवस्था में कुल निर्यात का हिस्सा तीनऔरऔर भी

यकीनन, भारत अन्य देशों से अभी बेहतर स्थिति में है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष 2022-23 में हमारी अर्थव्यवस्था 7% बढ़ेगी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने अपना अनुमान 7.4% से घटाकर 6.8% कर दिया है। वहीं, विश्व बैंक ने अपना अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया है। इससे पहले अपना रिजर्व बैंक अप्रैल में कह रहा था कि हमारा जीडीपी इस साल 7.2% बढ़ेगा। लेकिन उसने दिसंबर तक यह अनुमानऔरऔर भी

केंद्र सरकार की मूल घोषणा के मुताबिक भारत के जीडीपी को मार्च 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाना था। अभी डेढ़ महीने पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने ललकारा कि भारत 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा और 2027 तक दुनिया की तीसरे सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। किसी ने उनसे पूछा नहीं जो अर्थव्यवस्था 2022-23 में अंत में 1.92 ट्रिलियन डॉलर की होगी, वो दो ही साल बाद 2024-25 के अंतऔरऔर भी

भारत की अर्थव्यवस्था का आकार अभी कितना है? सरकार के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक हमारा जीडीपी मार्च 2022 के अंत में 147.36 लाख करोड़ रुपए का था। यह 7% बढ़कर मार्च 2023 तक 157.60 लाख करोड़ रुपए हो जाने का पहला अनुमान है। मौजूदा विनिमय दर पर डॉलर में यह रकम 1.79 ट्रिलियन डॉलर और 1.92 ट्रिलियन डॉलर की निकलती है। आखिर उस सपने का क्या हुआ जो केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2018 में दिखाया था किऔरऔर भी

बड़े व नामी निवेशक छोटी-छोटी कंपनियों को पकड़ते हैं। जैसे, आकाश कचोलिया देश के सफलतम निवेशकों में गिने जाते हैं। उन्हें मल्टी-बैगर यानी कई गुना बढ़नेवाले स्टॉक्स को पकड़ने का महारथी माना जाता है। उन्होंने शेयर बाज़ार में निवेश से करीब 1700 करोड़ रुपए की दौलत बनाई है। उनके निवेश पोर्टफोलियो की पांच शीर्ष कंपनियां हैं – सफारी इंडस्ट्रीज़, शैली इंजीनियरिंग प्लास्टिक्स, एनआईआईटी, फिलिप्स कार्बन ब्लैंक और रेनबो चिल्ड्रेन्स मेडिकेयर। इनमें से सफारी और एनआईआईटी के अलावाऔरऔर भी