बाज़ार हुआ चंचल, सौदे निपटाएं झटपट
चुनावों के माहौल में किन उद्योगों की कंपनियों के स्टॉक्स में ट्रेड करना लाभ का सौदा साबित हो सकता है? उपभोक्ता साजोसामान, टू-ह्वीलर, शराब, इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया और टेक्सटाइल उद्योग। लेकिन फिलहाल बैंकिंग और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से दूर रहना चाहिए। एक खास बात हमेशा ध्यान में रखें कि इस दौरान बाज़ार बड़ा चंचल या वोलैटाइल हो जाता है तो पोजिशनल या लम्बे ट्रेड से बचना चाहिए। फटाफट सौदे निपटाना ज्यादा सही रहता है। साथ हीऔरऔर भी
चुनावों में कुछ उछलते, कुछ डूबते क्यों!
अपने यहां चुनाव धन लुटाने का महोत्सव होता है। मतदाताओं से लेकर कार्यकर्ताओं को लुभाने, बहकाने और खींचने के लिए धन पानी की तरह बहाया जाता है। यही वजह है कि चुनावों के बाद उपभोक्ता साजोसामान से लेकर टू-व्हीलर जैसी कंपनियों की भी बिक्री बढ़ जाती है। सत्ताधारी पार्टी की यह भी कोशिश रहती है कि इस दौरान महंगाई न बढ़े। शायद यही वजह है कि इस साल अप्रैल के बाद अब तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहींऔरऔर भी
चुनावों का धन जमकर बहता बाज़ार में
चुनावों में जमकर धन बहता है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकती, लेकिन माना जाता है कि एफपीआई या एफआईआई के माध्यम से भी इस दौरान राजनीतिक जोड़तोड़ में लगे भारतीय व्यापारियों व उद्योगपतियों का धन बाहर भेजकर वापस लाया जाता है। यूं तो चुनावों में काले-सफेद धन का भेद मिट जाता है। फिर भी इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि इस दौरान कालेधन की वैतरिणी ज़ोर-शोर से बहती है। भरपूर विज्ञापन दिखाए और छापे जातेऔरऔर भी
हर तरफ चुनावी रंग, विज्ञापनों का शोर
हिमाचल प्रदेश का चुनाव हो गया। गुजरात विधानसभा चुनाव कुछ हफ्तों में होना है। अगले साल मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक व तेलंगाना से लेकर त्रिपुरा, मेघालय, मिज़ोरम व नगालैंड तक के विधानसभा चुनाव होने हैं। उसके बाद तो 2024 के लोकसभा चुनावों का हंगामा शुरू हो जाएगा। हर सरकार व राजनीतिक दल चुनावी मूड में आ चुके हैं। ओडिशा जैसा राज्य जहां की विधानसभा का चुनाव 2024 में लोकसभा चुनावों के बाद होना है, उसकी भीऔरऔर भी










