शेयर बाज़ार किसी गूढ़ मंत्र से बंधा नहीं, न ही इसे सीखना कोई रॉकेट साइंस है। फाइनेंस न जाननेवाला शख्स भी इसमें पारंगत हो सकता है। लेकिन इसकी दो मूलभूत शर्तें हैं। एक, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण और दो, जो जैसा है उसे वैसा देखने की खुली बुद्धि। ये दोनों ही शर्तें नियमित अभ्यास से पूरी की जा सकती है जिसे हम साधना भी कह सकते हैं। अपने यहां जिस तरह बेरोगगारी की समस्या बेलगाम होती जाऔरऔर भी

सारी दुनिया में इस समय महंगाई विकट समस्या बन गई है। सितंबर में अपने यहां थोक मुद्रास्फीति की दर 10.70% और रिटेल मुद्रास्फीति की दर 7.41% रही है। इसी दौरान अमेरिका में मुद्रास्फीति की दर 8.2%, यूरो ज़ोन में 9.9% और ब्रिटेन में 10.1% रही है। वहां यह दो-चार साल नहीं, करीब चार दशकों का उच्चतम स्तर है। बड़े-बड़े देशों की मुद्राएं भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरती जा रही हैं। अपना रुपया भी इस साल डॉलरऔरऔर भी

लैरी विलियम्स ने बेटी मिशेल को ज़ीरो से सिखाना शुरू किया। तब तक साहित्य व थियेयर की पृष्ठभूमि वाली मिशेल को फाइनेंस का क-ख-ग-घ भी नहीं आता था। फाइनेंशियल कैलकुलस, टेक्निकल एनालिसिस और ट्रेडिंग टर्मिनल उसके लिए अजूबी चीज़ें थी। लेकिन पिता के निर्देशन में बेटी धीरे-धीरे भावों के चार्ट और ट्रेडिंग स्क्रीन की बारीकियां समझने लगी। यहीं से उसके महारथी बनने की यात्रा शुरू हो गई। पिता लैरी विलियम्स ने 1987 में ट्रेडिंग की रॉबिन्स कपऔरऔर भी

लैरी विलियम्स ने अपनी बेटी मिशेल को वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग सिखाने की पेशकश की तो थिएटर व साहित्य की पृष्ठभूमि वाली उनकी बेटी ने शर्त रख दी कि वह एक बार ही ऐसा करेगी, उसके बाद कतई नहीं। पिता ने कहा कि एक बार पूरे मनोयोग से सीखकर तो देखो। बेटी ने मान लिया। लेकिन काम बेहद कठिन था। लगातार 365 दिनों तक बेरोकटोक ट्रेडिंग के विश्वस्तरीय महारथियों से होड़ लेना कतई आसान नहीं था। मिशेलऔरऔर भी