रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि; जहां काम आवे सुई, कहा करे तलवारि। जीवन में छोटी-छोटी चीजों की बड़ी अहमियत है। हमारी अर्थव्यवस्था में भी लघु उद्योगों का भारी योगदान है। लघु समय के साथ बड़ा हो जाता है। सरकार ने हाल ही में लघु कंपनियों की परिभाषा बदल दी है। उसने तय किया है कि अब 4 करोड़ रुपए तक की चुकता पूंजी वाली कंपनियों को लघु माना जाएगा। इससे पहले 2013 में यहऔरऔर भी