भरा यहां रिस्क ही रिस्क, बचें तो कैसे!
यूं तो पूरा जीवन ही रिस्क से भरा पड़ा है। लेकिन शेयर बाज़ार एक ऐसी जगह है जहां रिस्क ही रिस्क है। किसी को नहीं पता कि आगे क्या हो सकता है। फिर भी कयासबाज़ी चलती है। इतनी ज्यादा कि कयासबाज़ी अपने-आप में शेयर बाज़ार से जुड़ा धंधा बन गई है। बिजनेस न्यूज़ चैनलों पर आनेवाले एनालिस्ट, अखबारों में निवेश पर कॉलम लिखनेवाले विशेषज्ञ और ब्लॉग से लेकर वेबसाइट चलानेवाले रिसर्च एनालिस्ट, सभी के सभी मूलतः कयासबाज़ीऔरऔर भी
कभी बॉन्ड में तो कभी लगाएं शेयर में!
जिस तरह देश से लेकर विदेश तक मुद्रास्फीति बढ़ रही है, उसमें इससे निपटने का सबसे अच्छा माध्यम शेयरों में निवेश है। लेकिन अभी शेयर बाज़ार की ही हालत खस्ता है। कभी भी बहुत ज्यादा गिर सकता है और हमारी पूंजी व बचत को डुबा सकता है। फिर कोई निवेशक करे तो क्या करे? उसकी बचत महंगाई के चलते वैसे भी काफी घट चुकी है। इसलिए उसे निवेश में काफी सावधानी बरतनी होगी। एक हिस्सा सुरक्षित रिटर्नऔरऔर भी
कहीं से नहीं आ रही कोई अच्छी खबर!
किसी को भरोसा नहीं कि रूस-यूक्रेन युद्ध कब खत्म होगा और युदध खत्म भी हो गया तो क्या महंगाई कम या खत्म हो जाएगी? जानकार बताते हैं कि अभी की चढ़ी हुई मुद्रास्फीति तात्कालिक नहीं है। यह लम्बे समय तक बनी रह सकती है। इसका सीधा असर कंपनियों के नतीजों पर पड़ेगा। कम के कम अगली कुछ तिमाहियों तक कॉरपोरेट क्षेत्र का मुनाफा दबा-दबा रहेगा। एक सर्वे के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2022-23 में निफ्टी-50 में शामिलऔरऔर भी
निकलते धन से निकलती जा रही जान
अमेरिका में अभी तक मुद्रास्फीति का मानक 2% रहा है। लेकिन मार्च में वहां रिटेल मुद्रास्फीति 8.5% पर पहुंच गई। खाने-पीने की चीजों और ईंधन को हटा दें तब भी वहां बची मुद्रास्फीति की दर 6.5% के ऊपर निकलती है। मार्च में भारत में रिटेल मुद्रास्फीति 6.95% और थोक मुद्रास्फीति 14.55% के स्तर पर पहुंच चुकी है। इसे थोड़ा समतल करने के लिए रिजर्व बैंक ने कल ब्याज या रेपो दर 4% से बढ़ाकर 4.40% कर दी।औरऔर भी







